दुबई से तेल अवीव के रास्ते पर आसमान में जो कुछ बीता, उसने पूरी दुनिया की एविएशन इंडस्ट्री और सुरक्षा एजेंसियों को हिलाकर रख दिया है। फ्लाइदुबई की उस उड़ान में 170 से अधिक मासूम जानें खतरे में थीं, जब कॉकपिट के अंदर ही एक खौफनाक साजिश रची गई। इस सनसनीखेज घटना के बाद अब आरोपी को-पायलट हमम अल-हम्मामी (Humam Al-Hammami) के अतीत की परतें तेजी से उधड़ रही हैं। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकारों ने इसे सीधे तौर पर 'आतंकी हमला' करार दिया है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले की जांच का दायरा ऑस्ट्रेलिया तक बढ़ा दिया है।
ऑस्ट्रेलियाई प्रवास और स्टूडेंट वीजा की रडार पर जांच
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, 29 वर्षीय ओमान का नागरिक हमम अल-हम्मामी साल 2014 में स्टूडेंट वीजा पर ऑस्ट्रेलिया गया था। इसके अगले साल उसने वहां की एक यूनिवर्सिटी में अपनी पढ़ाई का आगाज किया था। शुरुआती रिपोर्ट्स बताती हैं कि वह साल 2017 में अचानक ऑस्ट्रेलिया छोड़कर चला गया था। इसके बाद, साल 2019 में ऑस्ट्रेलियन अधिकारियों ने उसका वीजा आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया था, क्योंकि यह पुष्टि हो चुकी थी कि वह अब उस कोर्स में नामांकित (enrolled) नहीं था।
अब जबकि उसने कॉकपिट में इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया है, तो ऑस्ट्रेलियन गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों ने उसके उस पुराने प्रवास को लेकर नए सिरे से औपचारिक और कड़ी जांच शुरू कर दी है। अधिकारी यह टटोलने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या उस दौरान भी वह किसी संदिग्ध गतिविधियों या चरमपंथी नेटवर्क के संपर्क में आया था।
ओमान एयर में पहले ही लग चुका था बैन, सीरिया दौरा बना टर्निंग पॉइंट
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि अल-हम्मामी की मानसिकता को लेकर ओमान में पहले ही खतरे की घंटियां बज चुकी थीं। ओमान एयर ने उसकी हरकतों और चरमपंथी झुकाव के शक के चलते उसे उड़ान भरने से प्रतिबंधित कर दिया था। एयरलाइन ने उसे सख्त कदम उठाते हुए कॉकपिट से हटाकर एक प्रशासनिक (administrative) नौकरी पर भेज दिया था।
यही वह दौर था जब उसने सीरिया की यात्रा भी की थी। खुफिया एजेंसियों का मानना है कि सीरिया दौरा उसके जीवन का वह काला मोड़ था, जहां उसने पूरी तरह से कट्टरपंथी समूहों के रंग में रंगना शुरू कर दिया था। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने भी इस बात की सार्वजनिक पुष्टि की है कि आरोपी पूरी तरह से इस्लामी कट्टरपंथ की आंधी का शिकार बन चुका था।
करियर का काला चिट्ठा और एयरलाइंस की चूक
अल-हम्मामी के प्रोफेशनल करियर पर नजर डालें तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आती हैं। उसने ओमान एयर में लगभग 7 साल तक सेवा दी और आखिरकार फरवरी 2025 में वहां से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद, जून 2025 में उसने मोरक्को की नेशनल एयरलाइन 'रॉयल एयर मारोक' का रुख किया और वहां ज्वाइन किया। हालांकि, महज तीन महीने की कड़ी ट्रेनिंग के बाद उस एयरलाइन ने उसे काबिल नहीं समझा और नौकरी के लिए हरी झंडी नहीं दी।
इसके बावजूद, वह फ्लाइदुबई एयरलाइन की सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाने में कामयाब रहा और वहां बतौर को-पायलट नियुक्त हो गया। इसके अलावा, उसने साल 2023 में ब्रिटेन की बकिंघमशायर न्यू यूनिवर्सिटी से डिस्टेंस-लर्निंग के जरिए एविएशन मैनेजमेंट में डिग्री हासिल की थी। हालांकि, यूनिवर्सिटी ने साफ कर दिया है कि उसने वहां से किसी भी तरह की व्यावहारिक पायलट ट्रेनिंग नहीं ली थी।
हमले के 9 घंटे बाद सोशल मीडिया पर आतंकियों के वीडियो
इस आतंकी मानसिकता की इंतहा तब देखने को मिली जब विमान में कुल्हाड़ी से हमला करने के ठीक 9 घंटे बाद, अल-हम्मामी के लिंक्डइन अकाउंट से खतरनाक आतंकवादियों के वीडियो धड़ल्ले से शेयर किए जाने लगे। उसने ओसामा बिन लादेन के बाद अल-कायदा की कमान संभालने वाले अयमान अल-जवाहिरी और साल 2009 में अफगानिस्तान में अमेरिकी सीआईए अधिकारियों को धमाके में उड़ाने वाले सुसाइड बॉम्बर हुमाम खलील से जुड़े प्रोपेगैंडा पोस्ट शेयर किए। हालांकि, जैसे ही एजेंसियों की नजर पड़ी, उसके इंस्टाग्राम और लिंक्डइन अकाउंट्स को फौरन डिलीट कर दिया गया।
विमान के अंदर रोंगटे खड़े कर देने वाली वह घटना
याद दिला दें कि बीते बुधवार को यह विमान 170 से ज्यादा मुसाफिरों को लेकर दुबई से इजरायल के तेल अवीव की तरफ बढ़ रहा था। तभी अचानक ओमान के इस को-पायलट ने साथी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर कॉकपिट के भीतर कुल्हाड़ी से कातिलाना हमला कर दिया। इस अचानक हुए वार से कॉकपिट में हड़कंप मच गया।
हमले के बाद विमान ने महज 30 सेकंड के भीतर ही लगभग 14,000 फीट नीचे खतरनाक गोता लगाना शुरू कर दिया, जिससे विमान में सवार यात्रियों की सांसें थम गईं। गनीमत यह रही कि कैप्टन स्मित मच्छर ने अपनी अदम्य सूझबूझ, असाधारण साहस और क्रू मेंबर्स के सहयोग से किसी तरह विमान पर काबू पाया और उसे सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया। इस सूझबूझ ने एक बहुत बड़े आसमानी महा-विनाश को टाल दिया, वर्ना यह हादसा इतिहास के सबसे काले अध्यायों में दर्ज हो सकता था।
अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर उठ रहे बड़े सवाल
इस घटना के बाद वैश्विक स्तर पर कमर्शियल विमानन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एयरलाइंस द्वारा पायलट्स के मानसिक स्वास्थ्य (mental health background check) और उनकी पृष्ठभूमि की जांच के तरीकों पर अब भारी दबाव है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां अब यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि क्या ऐसे कट्टरपंथी तत्वों के लिए एविएशन सेक्टर में कोई और स्लीपर सेल या लूपहोल्स तो मौजूद नहीं हैं।