भारतीय शेयर बाजार में पिछले कुछ महीनों से स्थिरता की उम्मीद लगाए बैठे निवेशकों के लिए एक बार फिर चिंता की खबर सामने आई है। जुलाई और अगस्त के महीनों में भारतीय बाजारों पर मेहरबान रहने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) अब अचानक से बिकवाल की भूमिका में आ गए हैं। सितंबर के महीने की शुरुआत होते ही विदेशी निवेशकों ने जिस रफ्तार से भारतीय शेयरों की बिकवाली शुरू की है, उसने बाजार के जानकारों को भी चौंका दिया है।
सितंबर के शुरुआती महज चार कारोबारी सत्रों के भीतर ही विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 7,443 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि निकाल ली है। इस अचानक आए बदलाव ने निवेशकों के मन में यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या आने वाले दिनों में बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है?
साल 2026 में FPI का उतार-चढ़ाव भरा सफर
अगर गौर करें तो साल 2026 की शुरुआत से ही विदेशी निवेशकों का रुख भारतीय बाजारों को लेकर बहुत ज्यादा स्थिर नहीं रहा है। इस पूरे साल के दौरान FPI ज्यादातर समय बिकवाल ही रहे हैं। साल के शुरुआती महीने यानी जनवरी में जहां विदेशी निवेशकों ने 35,962 करोड़ रुपये की बिकवाली की थी, वहीं फरवरी के महीने में बाजार में कुछ राहत दिखी और FPI ने 22,615 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया।
लेकिन मार्च का महीना भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के लिए दर्ज हो गया। इस महीने FPI ने ताबड़तोड़ बिकवाली करते हुए रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये भारतीय बाजारों से बाहर निकाल लिए। यह सिलसिला अप्रैल और मई में भी जारी रहा:
- अप्रैल 2026: 60,847 करोड़ रुपये की निकासी
- मई 2026: 32,963 करोड़ रुपये की बिकवाली
- जून 2026: 49,340 करोड़ रुपये के शेयर बेचे गए
इसके बाद जुलाई और अगस्त के महीने भारतीय बाजारों के लिए राहत भरे रहे। जुलाई में विदेशी निवेशकों ने 20,199 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया, जबकि अगस्त के महीने में भी यह सिलसिला जारी रहा और FPI ने घरेलू बाजारों में 30,919 करोड़ रुपये झोंक दिए। लेकिन सितंबर की शुरुआत के साथ ही इस राहत पर ब्रेक लग गया है।
कुल निकासी का आंकड़ा पहुंचा 2 लाख करोड़ के पार
जनवरी से लेकर सितंबर के शुरुआती दिनों तक के आंकड़ों को अगर मिला दिया जाए, तो तस्वीर काफी डरावनी नजर आती है। फरवरी, जुलाई और अगस्त जैसे कुछ महीनों में हुई छिटपुट खरीदारी को छोड़ दें, तो साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने कुल मिलाकर 2,29,822 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी कर ली है।
यह आंकड़ा पिछले साल यानी 2025 के मुकाबले भी काफी बड़ा है। आपको बता दें कि साल 2025 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से कुल 1.66 लाख करोड़ रुपये निकाले थे, जबकि 2026 में यह आंकड़ा सितंबर से पहले ही काफी आगे निकल चुका है।
अचानक क्यों बिकवाली कर रहे हैं विदेशी निवेशक?
बाजार के जानकारों और वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों द्वारा की जा रही इस बिकवाली के पीछे कई बड़े वैश्विक और घरेलू कारण जिम्मेदार हैं।
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि पिछले कुछ दिनों के दौरान एफपीआई की बिकवाली के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई तेजी है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में क्रूड ऑयल के महंगे होने से देश में महंगाई बढ़ने और चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को लेकर चिंताएं काफी गहरी हो जाती हैं।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर का मजबूत होना
तारकेश्वर नाथ वैष्णव के मुताबिक, इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और डॉलर सूचकांक (Dollar Index) भी मजबूत बना हुआ है। ऐसी स्थिति में भारत जैसे उभरते बाजारों (Emerging Markets) के मुकाबले निवेशकों को अमेरिका जैसे विकसित बाजारों में सुरक्षित रिटर्न की उम्मीद नजर आती है, जिससे उनकी जोखिम लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है।
3. भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक
खुराना सिक्योरिटीज एंड फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ रवि चंदर खुराना का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियां (Geo-political Situation) भी बड़ा फैक्टर हैं। इसके अलावा अमेरिका में महंगाई के आंकड़ों का डर भी विदेशी निवेशकों को सतर्क कर रहा है।
रवि चंदर खुराना ने बताया कि अमेरिका के केंद्रीय बैंक 'फेडरल रिजर्व' की सितंबर के मध्य में ब्याज दरों की समीक्षा को लेकर एक अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक के जो भी नतीजे आएंगे, वे अमेरिकी बाजार के साथ-साथ पूरी दुनिया के स्टॉक मार्केट और विदेशी निवेशकों की चाल को तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाएंगे। यही वजह है कि निवेशक इस बैठक से पहले अपने पैसे सुरक्षित करने की फिराक में हैं।
आम निवेशकों पर इसका क्या असर होगा?
जब भी विदेशी संस्थागत निवेशक या एफपीआई बड़े पैमाने पर बिकवाली करते हैं, तो उसका सीधा असर घरेलू शेयर बाजार के सूचकांकों (Sensex and Nifty) पर देखने को मिलता है। बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ जाता है और चुनिंदा शेयरों में बिकवाली का दबाव बन जाता है। हालांकि, भारतीय म्यूचुअल फंड्स और घरेलू निवेशकों (DIIs) की मजबूत खरीदारी के चलते अब भारतीय बाजार इन झटकों को काफी हद तक झेलने में सक्षम हो रहे हैं, फिर भी छोटे निवेशकों को इस दौरान पूरी सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।