महाराष्ट्र के गड़चिरोली जिले से एक डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने दक्षिण गड़चिरोली के भामरागड़ को शेष दुनिया से पूरी तरह काट दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पूरा भामरागड़ शहर एक टापू में तब्दील हो चुका है। उफनती हुई पर्लकोटा और इंद्रावती नदियों का पानी रिहायशी इलाकों में घुसने के बाद प्रशासन को युद्धस्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा है।
पर्लकोटा नदी का विकराल रूप, शहर बना टापू
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ के जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश का सीधा असर गड़चिरोली पर पड़ा है। भामरागड़ तहसील मुख्यालय के ठीक पास से गुजरने वाली पर्लकोटा नदी का जलस्तर अचानक खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। देखते ही देखते बाढ़ का पानी सड़कों और घरों में घुसने लगा। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमों ने तुरंत मोर्चा संभाला और पानी के बीच फंसे 525 नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया।
हालांकि शनिवार को नदी के जलस्तर में मामूली गिरावट जरूर दर्ज की गई है, लेकिन जमीन पर हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। पानी उतरने के साथ ही कीचड़ और जलजनित बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगा है, जिससे स्थानीय प्रशासन पूरी तरह सतर्क मोड पर है।
63 गांवों का संपर्क टूटा, जनजीवन अस्त-व्यस्त
इस प्राकृतिक आपदा की वजह से भामरागड़ का जिला मुख्यालय से संपर्क बुरी तरह बाधित हुआ है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, तहसील के 63 से अधिक गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क अभी भी पूरी तरह कटा हुआ है। इन गांवों में रहने वाले लोगों के सामने खाने-पीने और रोजमर्रा की जरूरी चीजों का संकट खड़ा होने लगा है।
- पुलों के ऊपर से तेज रफ्तार में बह रहा है बाढ़ का पानी।
- सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस ने संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग की है।
- लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी सूरत में उफनती नदियों और पुलों के करीब न जाएं।
- प्रशासन की टीमें लगातार प्रभावित गांवों पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस साल मानसून सीजन के दौरान यह तीसरी बार है जब भामरागड़ का संपर्क जिला मुख्यालय से पूरी तरह कटा है। बार-बार आने वाली इस समस्या से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और लोगों को भारी आर्थिक व मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है。
SDRF के जांबाजों ने बचाई दो गंभीर मरीजों की जान
बाढ़ के इस तांडव के बीच मानवीय संवेदनाओं और कर्तव्यनिष्ठा की एक बड़ी मिसाल राज्य आपदा प्रतिक्रिया दल (SDRF) ने पेश की। भामरागड़-आलापल्ली मार्ग पर स्थित पर्लकोटा नदी की पुलिया के ऊपर से तेज पानी बहने के कारण यातायात पूरी तरह ठप था। ऐसे समय में दो गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाना प्रशासन के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था।
लेकिन SDRF की टीम ने अपनी जान की परवाह किए बिना सूझबूझ का परिचय दिया। टीम ने नाव की मदद से उफनती हुई पर्लकोटा नदी को जोखिम भरा पार किया और दोनों मरीजों को सुरक्षित हेमलकसा तक पहुंचाया। इसके बाद तुरंत एंबुलेंस की व्यवस्था कर उन्हें आगे के बेहतर इलाज के लिए अहेरी उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। समय पर मिली इस मदद से दोनों मरीजों की जान बचाई जा सकी।
नए पुल के निर्माण में देरी से स्थानीय नागरिकों में आक्रोश
इस विकट परिस्थिति के बीच स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों में सिस्टम की सुस्ती के खिलाफ भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। पर्लकोटा नदी पर बनाए जा रहे नए पुल का निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। लोगों का आरोप है कि यदि यह काम समय पर पूरा हो जाता, तो हर साल आने वाली बाढ़ के दौरान इस तरह की गंभीर यातायात और संपर्क की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।
वर्षाकाल के दौरान पुराने मार्ग पर पानी भर जाने से जो हालात बनते हैं, वे स्थानीय अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। नागरिकों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि इस बहुप्रतीक्षित पुल के काम में तेजी लाई जाए ताकि इस क्षेत्र के लोगों को इस शाश्वत मुसीबत से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके। फिलहाल, मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी रखा है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं।