भारतीय राजनीति के गलियारों में रायबरेली और नेहरू-गांधी परिवार का रिश्ता हमेशा से चर्चा का केंद्र रहा है। समय-समय पर इस सीट को लेकर राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग भी देखने को मिलती है। हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला था। सीएम मोहन यादव ने एक बड़ा सवाल उठाया था कि आखिर नेहरू-गांधी परिवार दिल्ली छोड़कर चुनाव लड़ने के लिए रायबरेली क्यों जाता है? इस सियासी बयानबाजी के बाद कांग्रेस पार्टी की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें अंग्रेजों के जमाने के एक ऐतिहासिक किस्से का हवाला दिया गया है।
इतिहास की जानकारी न होने का बीजेपी पर आरोप
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए इस सवाल का जवाब देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता पीसी शर्मा ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर जोरदार पलटवार किया है। पीसी शर्मा ने तंज कसते हुए कहा कि बीजेपी के नेताओं को देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास की पूरी जानकारी नहीं है, इसलिए उनसे इस तरह के बेतुके सवालों की ही उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गांधी परिवार और रायबरेली का यह रिश्ता किसी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि कुर्बानियों और संघर्ष की लंबी दास्तान पर टिका हुआ है।
कांग्रेस नेता ने विस्तार से बताते हुए कहा, "बीजेपी के जितने भी नेता हैं, उन्हें शायद आजादी की लड़ाई के इतिहास का सही ज्ञान नहीं है। अगर उन्हें पता होता कि गांधी परिवार का रायबरेली से क्या नाता है, तो वे कभी ऐसा सवाल नहीं उठाते। यह रिश्ता देश की आजादी की लड़ाई के समय से ही बहुत मजबूत रहा है।"
अंग्रेजों के जमाने की वह कहानी, जिसने जोड़े रिश्ते
रायबरेली और गांधी परिवार के बीच की इस अटूट डोर के पीछे के इतिहास को साझा करते हुए पीसी शर्मा ने बताया कि यह कहानी अंग्रेजों के शासनकाल से जुड़ी हुई है। आजादी की लड़ाई के उस दौर में रायबरेली की धरती पर किसानों का एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक आंदोलन हुआ था। उस मुश्किल दौर में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किसानों का साथ देने का फैसला किया था।
पीसी शर्मा ने उस घटना को याद करते हुए आगे कहा, "पंडित जवाहरलाल नेहरू उस दौरान रायबरेली में करीब डेढ़ महीने तक रुके थे। उन्होंने वहां रहकर अंग्रेजों के खिलाफ सीधी लड़ाई लड़ी थी। अंग्रेजों के उस दमनकारी समय में उन्होंने रायबरेली के आम किसानों की समस्याओं को नजदीक से समझा और उनका समाधान भी कराया। उस ऐतिहासिक संघर्ष के बाद से ही रायबरेली के लोगों के दिलों में नेहरू-गांधी परिवार के लिए एक खास जगह बन गई। तब से लेकर आज तक रायबरेली की जनता इस परिवार को नहीं छोड़ती और हर चुनाव में यही मांग करती है कि गांधी परिवार का कोई सदस्य यहीं से चुनावी मैदान में उतरे।"
'घबराहट में दिए जा रहे हैं ऐसे बयान'
केवल इतिहास का जिक्र करने तक ही कांग्रेस नेता नहीं रुके, बल्कि उन्होंने मौजूदा राजनीतिक हालातों को लेकर भी सत्ताधारी पार्टी पर जमकर निशाना साधा। पीसी शर्मा का दावा है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव का यह बयान किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा नहीं, बल्कि अंदरूनी घबराहट का नतीजा है। उन्होंने इसके पीछे राहुल गांधी के हालिया दौरों और कार्यक्रमों का हवाला दिया।
कांग्रेस नेता ने कहा कि इन दिनों राहुल गांधी मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में युवाओं से संवाद कर रहे हैं और जेन-जी (Gen-Z) पीढ़ी के साथ जुड़ रहे हैं। इस बढ़ते जनसमर्थन और युवाओं के भारी उत्साह को देखकर बीजेपी पूरी तरह से डरी हुई है। अगर ऐसा न होता, तो मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस तरह की बयानबाजी करने की कोई आवश्यकता ही महसूस नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि जब प्रशासन ने देखा कि राहुल गांधी के इस कार्यक्रम के लिए भारी संख्या में रजिस्ट्रेशन हो रहे हैं और हजारों युवा इसमें शामिल होना चाहते हैं, तो सरकार असहज हो गई।
कार्यक्रम के लिए 10 लाख रुपये की भारी फीस का दावा
इस पूरे मामले में एक और नया मोड़ लाते हुए पीसी शर्मा ने एक सनसनीखेज दावा भी किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष के कार्यक्रम के आयोजन के लिए नियमों से परे जाकर 10 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस जमा कराई गई है। उनके मुताबिक, हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास में इस तरह की शर्त आज तक कभी देखने को नहीं मिली।
इसे सरकार की हताशा बताते हुए उन्होंने कहा, "यह सब सिर्फ और सिर्फ सरकार के डर को दर्शाता है। उन्हें यह लगता है कि अगर इस तरह के नियम और शर्तें थोप दी जाएंगी, तो शायद कार्यक्रम रद्द हो जाएगा, राहुल गांधी राज्य में नहीं आएंगे और युवा एक जगह इकट्ठा नहीं हो पाएंगे। लेकिन सरकार की इन कोशिशों के बावजूद युवाओं में भारी जोश देखने को मिल रहा है।"
युवाओं के मुद्दों से डरी हुई है सत्ता
कांग्रेस पार्टी का मानना है कि जब से राहुल गांधी ने देश के युवाओं के भविष्य, उनकी पढ़ाई, अच्छे स्कूलों, परीक्षाओं में पारदर्शिता और सबसे अहम मुद्दे यानी रोजगार पर खुलकर बात करना शुरू किया है, तब से देश भर की बीजेपी सरकारें दबाव में आ गई हैं। युवाओं के बीच राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता से राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं।
विशेषज्ञों का भी मानना है कि इंदौर जैसी जगहों पर अगर बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी (Gen-Z) एकजुट होती है, तो इसका सीधा असर आने वाले समय में मध्य प्रदेश की पूरी राजनीति पर पड़ेगा। यही वजह है कि ऐसे बयानों के जरिए राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बहरहाल, रायबरेली की सीट को लेकर शुरू हुई यह बहस एक बार फिर से देश के स्वतंत्रता संग्राम के पन्नों को टटोलने पर मजबूर कर रही है, जहां से इस सियासी रिश्ते की नींव पड़ी थी।