उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने स्थानीय पुलिस व्यवस्था और कानून के रखवालों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक सादे कपड़ों में नजर आने वाला संदिग्ध व्यक्ति मवेशियों (भैंसों) से लदे हुए पिकअप वाहन को रोककर कथित तौर पर नकदी लेते हुए साफ दिखाई दे रहा है। यह पूरी घटना जिले के एक संवेदनशील इलाके में स्थित पुलिस चौकी के बेहद करीब की बताई जा रही है, जिसके बाद से महकमे में हड़कंप मच गया है और उच्च अधिकारियों तक यह मामला पहुंच चुका है।
वीडियो में क्या है पूरा माजरा?
सामने आए इस सनसनीखेज वीडियो के अनुसार, यह पूरी घटना 30 अगस्त की सुबह करीब 8 बजे की बताई जा रही है। स्थान गाजीपुर का देवल पुलिस चौकी क्षेत्र है। वायरल क्लिप में देखा जा सकता है कि मवेशियों से भरे हुए दो पिकअप वाहन सड़क के किनारे खड़े हैं। ये वाहन गाजीपुर के रास्ते से बिहार की तरफ जा रहे थे। इसी दौरान, देवल चौकी के पास एक व्यक्ति जो सादे कपड़ों में वहां मौजूद था, वह इन वाहनों के पास पहुंचता है।
वीडियो फुटेज में साफ नजर आ रहा है कि वह व्यक्ति वाहन के अंदर बैठे चालक या संबंधित व्यक्ति से बातचीत करता है और उससे कुछ रुपये लेता है। पैसे हाथ में आते ही वह उन्हें अपनी मुट्ठी में भींच लेता है और वहां से तेजी से हट जाता है। हैरानी की बात यह है कि पूरी घटना को पीछे से आ रहे एक अन्य बाइक सवार युवक ने अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया, जो अब इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैल चुका है।
पुलिस चौकी के पास अवैध वसूली का शक
जिस जगह पर यह पूरी घटना हुई, वह देवल पुलिस चौकी के बिल्कुल नजदीक है। ऐसे में आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर पुलिस चौकी के ठीक नाक के नीचे इस तरह मवेशियों से लदे वाहनों को रोककर पैसे लेने की नौबत क्यों आई? क्या यह वाहनों की सामान्य चेकिंग का हिस्सा था, या इसके पीछे कोई अवैध वसूली का खेल चल रहा था?
- पहला सवाल: यदि वाहन वैध कागजातों के साथ थे, तो उन्हें रोका क्यों गया?
- दूसरा सवाल: अगर दस्तावेजों में कोई कमी थी, तो क्या कानूनी कार्रवाई की बजाय मौके पर ही पैसों का लेनदेन कर मामला रफा-दफा किया जा रहा था?
- तीसरा सवाल: सादे कपड़ों में मौजूद वह शख्स कौन था और क्या उसे इस तरह वाहनों से पैसे वसूलने का अधिकार किसी ने दिया था?
इन तमाम सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास आधिकारिक रूप से नहीं हैं, लेकिन जनता के बीच इस वीडियो को लेकर भारी आक्रोश और चर्चा का बाजार गर्म है।
प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया
वीडियो के तूल पकड़ने और मीडिया में खबरें चलने के बाद गाजीपुर पुलिस प्रशासन हरकत में आ गया है। हालांकि, अभी तक वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे उस अज्ञात व्यक्ति की आधिकारिक तौर पर पुलिसकर्मी के रूप में पुष्टि नहीं हो पाई है। इसके साथ ही, इस बात की भी आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं हुई है कि जो रुपये कैमरे में लेते हुए दिखाई दिए हैं, वे किस मद में या किस एवज में दिए गए थे।
इस पूरे मामले पर गंभीर रुख अपनाते हुए एसपी ग्रामीण अतुल कुमार सोनकर ने मीडिया को जानकारी दी है कि वायरल वीडियो का संज्ञान ले लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की सख्त विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यदि इसमें किसी भी पुलिसकर्मी या चौकी के कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।
कानून व्यवस्था और पारदर्शिता पर फिर उठे सवाल
यह कोई पहला मामला नहीं है जब इस तरह के वीडियो ने खाकी की छवि पर सवालिया निशान लगाए हों। आए दिन देश के अलग-अलग हिस्सों से हाईवे और चौकियों के पास इस प्रकार की अवैध गतिविधियों के वीडियो सामने आते रहते हैं। पशु तस्करी या मवेशियों के परिवहन के नाम पर अक्सर इस तरह के मामलों में वसूली की शिकायतें आम जनता करती रही हैं।
अब देखना यह होगा कि गाजीपुर पुलिस इस मामले में कितनी जल्दी और निष्पक्षता से जांच पूरी करती है। क्या वीडियो में दिख रहा वह संदिग्ध शख्स बेनकाब हो पाएगा? क्या देवल पुलिस चौकी के इर्द-गिर्द चल रहे इस कथित खेल की परतें खुलेंगी? इन सभी सवालों के जवाब पुलिस की फाइनल जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मिल सकेंगे, जिस पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हुई हैं।