उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में इन दिनों धार्मिक आयोजनों और मेलों का सिलसिला बेहद उत्साह के साथ चल रहा है। इसी कड़ी में आज यानी 12 सितंबर 2026 को जिला चंदौली के थाना मुगलसराय अंतर्गत आने वाले कस्बे दुल्हीपुर सतपोखरी में एक बेहद खास और ऐतिहासिक आयोजन देखने को मिला। यहाँ हजरत फतुल्लाहशाह अलैहीरहमतुल्लाह का सालाना उर्स मुबारक बड़े ही धूमधाम और अकीदत (श्रद्धा) के साथ मनाया गया। इस मौके पर पूरे क्षेत्र में भारी उत्साह और जश्न का माहौल नजर आया।
दुल्हीपुर पोखरी में उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़
सर्दियों और त्योहारों के इस मिश्रित मौसम के बीच आज दुल्हीपुर पोखरी का इलाका पूरी तरह से गुलजार रहा। हजरत फतुल्लाहशाह अलैहीरहमतुल्लाह के सालाना उर्स के मौके पर सुबह से ही जायरीन (श्रद्धालुओं) के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। दोपहर तक यहाँ एक बड़ा मजमा इकट्ठा हो चुका था। हर कोई इस मुबारक मौके पर अपनी हाजिरी दर्ज कराने और दुआ मांगने के लिए बेताब दिखा।
आसपास के ग्रामीण इलाकों के अलावा मुगलसराय और चंदौली के दूर-दराज के कोनों से भी लोग इस सालाना उर्स में शिरकत करने पहुंचे। सुरक्षा और शांति व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए स्थानीय स्तर पर भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे ताकि आने वाले जायरीनों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
अकीदत और मोहब्बत का अनूठा संगम
उर्स के दौरान पूरा माहौल रूहानी और सुकून भरा नजर आया। मजार शरीफ को बेहद खूबसूरती के साथ सजाया गया था। चादरपोशी और फूलों की अकीदत पेश करने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगी हुई थीं। हर आंख दुआ के लिए उठी थी और हर जुबान पर अमन-चैन की दुआएं थीं।
इस सालाना उर्स की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें समाज के हर वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। यह आयोजन आपसी भाईचारे, सदभाव और गंगा-जमुनी तहजीब की एक बेहतरीन मिसाल पेश करता है, जहाँ लोग अपनी तमाम व्यस्तताओं को छोड़कर रूहानी सुकून की तलाश में खिंचे चले आते हैं।
क्षेत्र के गणमान्य लोगों की रही विशेष मौजूदगी
इस भव्य और पवित्र आयोजन को सफल बनाने तथा इसमें अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए क्षेत्र के कई प्रमुख लोग और गणमान्य व्यक्ति दुल्हीपुर पोखरी पहुंचे। उर्स के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित शख्सियतें मौजूद रहीं:
- सिराज अहमद
- नसीम अहमद
- इरशाद अहमद
- बब्लू
- मोहम्मद अमीन
- शोनु शेख
इन सभी लोगों ने न सिर्फ उर्स की रस्मों में हिस्सा लिया, बल्कि आने वाले जायरीनों की मेहमाननवाज और व्यवस्थाओं की देखरेख में भी अहम भूमिका निभाई। स्थानीय कमेटियों और इन प्रतिष्ठित नागरिकों के सहयोग से ही यह आयोजन शांतिपूर्ण और बेहद शानदार तरीके से संपन्न हो सका।
लंगर और दुआओं का दौर
उर्स मुबारक के इस मुबारक मौके पर फातिहाख्वानी का दौर चला। इसके बाद गरीबों और जरूरतमंदों में तबर्रुक और लंगर का वितरण किया गया। मान्यता है कि हजरत फतुल्लाहशाह अलैहीरहमतुल्लाह के दरबार में जो भी सच्चे दिल से मुराद मांगता है, उसकी दुआ खाली नहीं जाती। यही वजह है कि आज के दिन मजार पर मन्नतें मांगने वालों का तांता लगा रहा।
शाम ढलने के साथ ही मजार परिसर को रोशनी से जगमगा दिया गया, जिससे दुल्हीपुर पोखरी की खूबसूरती और भी बढ़ गई। इस सालाना उर्स ने एक बार फिर साबित कर दिया कि चंदौली की धरती पर आपसी सौहार्द और आस्था की जड़ें कितनी गहरी हैं।