उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक बार फिर रफ्तार का कहर सामने आया है। जिला मुख्यालय से जुड़े व्यस्त और संवेदनशील माने जाने वाले पड़ाव-मुगलसराय मार्ग पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ, जिसने एक बार फिर से सड़क सुरक्षा व्यवस्था और यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों की पोल खोल दी है। इस भीषण दुर्घटना में एक ऑटो और तेज रफ्तार डीसीएम (DCM) के बीच आमने-सामने की जोरदार टक्कर हो गई, जिसमें ऑटो सवार पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।
खून से सनी सड़क और चीख-पुकार का मंजर
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर इतनी भयानक थी कि ऑटो के परखच्चे उड़ गए। टक्कर की आवाज दूर तक सुनाई दी, जिसके बाद आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग तुरंत अपनी जान जोखिम में डालकर मौके की तरफ दौड़े। ऑटो के अंदर फंसे यात्रियों की चीख-पुकार सुनकर लोगों का कलेजा कांप उठा। खून से लथपथ यात्रियों को देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं।
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों की मुस्तैदी से तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया। कड़ी मशक्कत के बाद ऑटो में फंसे सभी पांचों घायलों को बाहर निकाला गया और तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने सभी की स्थिति बेहद गंभीर बताई है। घायलों में कुछ की हालत नाजुक बनी हुई है, जिन्हें बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किए जाने की तैयारी चल रही है।
आखिर कब थमेंगे सड़कों पर मौत के यह तांडव?
यह कोई पहली बार नहीं है जब पड़ाव-मुगलसराय रोड खून से लाल हुई हो। इस रूट पर हादसों का सिलसिला पुराना है और हर गुजरते दिन के साथ यह और ज्यादा खतरनाक होता जा रहा है। स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का सवाल साफ है—"आखिर आए दिन हो रहे इन हादसों का जिम्मेदार कौन है?"
सड़कों पर सरपट दौड़ते अनियंत्रित भारी वाहन, नियमों को ताक पर रखकर चलाई जा रही गाड़ियां और यातायात विभाग की लचर कार्यशैली आम जनता के लिए जी का जंजाल बन चुकी है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? इस सवाल का जवाब देने के लिए कोई भी अधिकारी सामने नहीं आ रहा है।
इन वजहों से बढ़ रहे हैं हादसे
- ओवरस्पीडिंग और लापरवाही: डीसीएम और अन्य भारी वाहन चालक अक्सर इस मार्ग पर अपनी गति सीमा का उल्लंघन करते हैं।
- यातायात नियमों की अनदेखी: न तो भारी वाहनों के लिए तय समय का पालन सख्ती से कराया जा रहा है और न ही बिना परमिट के चलने वाले वाहनों पर लगाम कस पा रही है।
- सड़क की बनावट और लाइटिंग की कमी: कई हिस्सों में सड़क की स्थिति और खराब स्ट्रीट लाइट्स भी इन दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं।
- प्रशासनिक उदासीनता: ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति और चेकिंग अभियान केवल कागजों तक सीमित रहना मुख्य वजहों में शुमार है।
स्थानीय लोगों में उबाल, पुलिस प्रशासन पर उठे सवाल
घटना के बाद से ही इलाके के लोगों में प्रशासन के खिलाफ रोष फूट पड़ा है। लोगों का कहना है कि वे कई बार संबंधित विभाग और पुलिस अधिकारियों को इस मार्ग पर भारी वाहनों के अनियंत्रित परिचालन की शिकायत कर चुके हैं, लेकिन हर बार उनकी आवाज़ को अनसुना कर दिया गया। यदि समय रहते इन लापरवाह चालकों पर कार्रवाई की जाती, तो शायद आज यह मासूम जिंदगियां इस तरह मौत के मुंह में न धकेली जातीं।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डीसीएम चालक की तलाश शुरू कर दी गई है जो टक्कर के बाद मौके से फरार होने में कामयाब रहा। वाहन को कब्जे में ले लिया गया है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है।
सख्त कदम उठाने की सख्त जरूरत
सितंबर 2026 के इस दौर में भी अगर सड़कों पर इस तरह की लापरवाही के चलते आम नागरिकों की जान जाती है, तो यह हमारी व्यवस्था पर एक बड़ा तमाशा है। जरूरत इस बात की है कि केवल बयानबाजी या मुआवजे के ऐलान से आगे बढ़कर सड़क सुरक्षा के नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए।
पड़ाव-मुगलसराय मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश के लिए एक निश्चित समय-सारणी तय होनी चाहिए और उसका उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना व कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। जब तक प्रशासन खुद आगे बढ़कर इन मनमाने रवैयों पर नकेल नहीं कसेगा, तब तक ऐसी दर्दनाक तस्वीरें सामने आती रहेंगी। फिलहाल, पूरा अस्पताल परिसर और पीड़ित परिवार अपनों की सलामती के लिए दुआएं मांग रहा है, और सिस्टम अपनी नाकामी छुपाने में जुटा है।