इंजीनियरिंग की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान यानी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) में प्रवेश पाना देश के लाखों युवाओं का सपना होता है। इस एक सपने को पूरा करने के लिए छात्र दिन-रात एक कर देते हैं, कोचिंग संस्थानों के चक्कर काटते हैं और माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई का एक-एक पैसा इन संस्थानों की पढ़ाई और तैयारी में झोंक देते हैं। लेकिन क्या हो जब आपकी इसी कमजोरी और महत्वाकांक्षा का फायदा कोई ऐसा शख्स उठाने लगे, जो खुद कभी इसी रास्ते से गुजरा हो?
वर्ष 2026 में सामने आया यह मामला बेहद चौंकाने वाला है। जिस युवक ने कभी खुद आईआईटी में दाखिला पाने का सपना देखा था और घर से इसी उद्देश्य के साथ निकला था, वक्त के पहिए ने उसे ऐसा घुमाया कि वह खुद ही छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाला एक शातिर ठग बन बैठा। 16.5 लाख रुपये की बड़ी ठगी के इस मामले ने न सिर्फ पुलिस के होश उड़ा दिए हैं, बल्कि उन तमाम अभिभावकों की नींद उड़ा दी है जो अपने बच्चों के एडमिशन के लिए शॉर्टकट या अनधिकृत माध्यमों का सहारा लेने की सोचते हैं।
कैसे बुना गया ठगी का यह पूरा जाल?
किसी भी बड़े रैकेट के पीछे एक शातिर दिमाग होता है। इस मामले में भी आरोपी ने बेहद सुनियोजित तरीके से अपना जाल बिछाया था। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी खुद भी तकनीकी शिक्षा की पृष्ठभूमि से जुड़ा रहा है, जिसके कारण उसे देश के शीर्ष इंजीनियरिंग संस्थानों की चयन प्रक्रिया, काउंसलिंग और सीट अलॉटमेंट की बारीकियों की अच्छी खासी जानकारी थी। इस तकनीकी ज्ञान का उसने गलत फायदा उठाया।
आरोपी ने उन छात्रों और उनके अभिभावकों को निशाना बनाया जो काउंसलिंग के शुरुआती चरणों में आईआईटी या एनआईटी जैसी जगहों पर सीट पाने से चूक गए थे। वह अभिभावकों से संपर्क करता और खुद को बड़े शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों या आईआईटी के शीर्ष प्रशासनिक अमले का करीबी बताता था। उसका दावा होता था कि उसके पास 'स्पेशल कोटा' या मैनेजमेंट कोटा के तहत सीटें खाली हैं, जिन्हें मोटी रकम लेकर भरा जा सकता है।
16.5 लाख रुपये की चपत और फिर खुला राज
यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब एक पीड़ित परिवार ने स्थानीय पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित पिता ने बताया कि उनके बेटे का चयन आईआईटी में कराने के नाम पर आरोपी ने अलग-अलग किस्तों में कुल 16.5 लाख रुपये ऐंठ लिए थे। शुरुआत में आरोपी ने फर्जी दस्तावेज, एडमिशन लेटर और फीस रसीद भी थमा दी थी, जिससे परिवार को उसपर थोड़ा भी शक नहीं हुआ।
शक तब गहराया जब छात्र कॉलेज रिपोर्टिंग के लिए पहुंचा और वहां संस्थान के अधिकारियों ने उसे बताया कि उसका यह एडमिशन लेटर पूरी तरह से फर्जी है और इस नाम का कोई भी छात्र उनकी रजिस्टर्ड सूची में शामिल नहीं है। इसके बाद जब परिवार ने आरोपी से संपर्क करने की कोशिश की, तो उसका फोन बंद मिलने लगा और वह भूमिगत हो गया।
पुलिस की जांच में चौंकाने वाले खुलासे
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया और तकनीकी सेल की मदद से आरोपी की तलाश शुरू की। बैंक खातों के ट्रांजैक्शन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगालने पर पुलिस के सामने जो तस्वीर आई, वह हैरान करने वाली थी।
- फर्जी दस्तावेज तैयार करना: आरोपी के पास से कई फर्जी लेटर पैड, मुहरें और शिक्षा मंत्रालय के जाली दस्तावेज बरामद हुए हैं।
- दूसरा शिकार: जांच में यह भी पता चला कि आरोपी अकेले इस खेल में नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक पूरा गिरोह काम कर रहा था जो अलग-अलग शहरों में फैला हुआ है।
- रुपयों का इस्तेमाल: ठगी से कमाए गए 16.5 लाख रुपये में से अधिकांश हिस्सा आरोपी ने अपनी ऐशो-आराम की जिंदगी और सट्टा बाजार में उड़ा दिया था।
खुद का सपना टूटा तो दूसरों की उम्मीदों से खेलने लगा
इस पूरे मामले का सबसे दुखद पहलू यह है कि आरोपी का अपना अतीत भी संघर्षों से भरा था। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि वह भी कभी आईआईटी की प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए बड़े शहर आया था, लेकिन लगातार असफलताओं और आर्थिक तंगी के कारण उसका वह सपना अधूरा रह गया। इसके बाद उसने अपनी नाकामी का बदला समाज से लेने और शॉर्टकट से अमीर बनने की ठान ली। उसने अपनी इस योग्यता का इस्तेमाल छात्रों के सपनों का सौदा करने में शुरू कर दिया।
शिक्षा जगत और अभिभावकों के लिए एक बड़ी चेतावनी
यह घटना देश के तमाम उन युवाओं और अभिभावकों के लिए एक गंभीर सबक है जो प्रवेश के नाम पर शॉर्टकट तलाशते हैं। देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश केवल और केवल पारदर्शी प्रवेश परीक्षाओं (जैसे जेईई एडवांस्ड, जेईई मेन आदि) और आधिकारिक जोसा (JoSAA) काउंसलिंग के माध्यम से ही संभव है। कोई भी व्यक्ति यदि आपको पैसों के बल पर बैकडोर एंट्री या स्पेशल कोटे का झांसा देता है, तो समझ लीजिए कि वह आपको ठगने की कोशिश कर रहा है।
फिलहाल, पुलिस इस मामले के अन्य मोर्चों पर भी जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस 16.5 लाख रुपये की ठगी के जाल में और कितने छात्र और परिवार फंसे हैं। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और अदालत में जल्द ही इस पर चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
