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नेपाल में जल प्रलय: स्कूल में फंसे 1643 बच्चों के लिए मसीहा बने नेपाली शिक्षक, ऐसे बचाई जान

नेपाल में जल प्रलय: स्कूल में फंसे 1643 बच्चों के लिए मसीहा बने नेपाली शिक्षक, ऐसे बचाई जान

जब मौत बनकर सामने आई बाढ़ और स्कूल में गूंजी चीखें

आमतौर पर स्कूल ज्ञान के मंदिर और बच्चों के सुरक्षित ठिकाने माने जाते हैं। लेकिन क्या हो जब वही सुरक्षित प्रांगण अचानक किसी कब्रगाह में बदलने की कगार पर आ जाए? 30 अगस्त 2026 का दिन नेपाल के नुवाकोट जिले के एक स्कूल के लिए ऐसा ही खौफनाक मंजर लेकर आया था। चारों तरफ प्रकृति का ऐसा तांडव मचा कि कुछ ही पलों में पानी का तेज रेला स्कूल की दीवारों से टकराने लगा। उस वक्त स्कूल के भीतर 1643 मासूम बच्चे और शिक्षक मौजूद थे। बाहर भयंकर जल-प्रलय का रूप ले चुकी बाढ़ खड़ी थी और हर तरफ सिर्फ तबाही का खौफ था।

ऐसे में जब पल-पल मौत करीब आ रही थी, तब एक ऐसा शख्स सामने आया जिसने अपनी जान की परवाह किए बिना हजारों जिंदगियों को सुरक्षित निकाल लिया। इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सही समय पर लिया गया एक फैसला और अटूट हौसला बड़े से बड़े संकट को भी मात दे सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर उस दिन नेपाल के उस स्कूल में क्या हुआ था और कैसे इस अनहोनी को टाला गया।

अचानक बढ़ा जलस्तर और मची अफरातफरी

घटना के दिन मौसम ने अचानक ऐसा करवट लिया कि कुछ ही घंटों में मूसलाधार बारिश ने बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर दी। स्कूल के आसपास का जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि किसी को भी संभलने का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते सड़कों और मैदानों पर पानी भर गया और वह उफनती हुई धाराओं में तब्दील हो गया। स्कूल के अंदर मौजूद छोटे-छोटे बच्चों में डर का माहौल बन गया। माता-पिता अपने बच्चों की सलामती को लेकर भगवान से प्रार्थना करने लगे, क्योंकि शुरुआती जानकारी मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया था।

पानी का बहाव इतना तेज था कि अगर जरा सी भी देर होती, तो स्कूल की इमारत भी इस जल-प्रलय की चपेट में आ सकती थी। इतने बड़े पैमाने पर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना किसी लोहे के चने चबाने से कम नहीं था। पैनिक सिचुएशन यानी भगदड़ की स्थिति बनने का पूरा खतरा था, जो कि किसी भी आपदा में सबसे खतरनाक साबित होती है।

प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी बने बच्चों के असली हीरो

इस विकट परिस्थिति में स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने जिस असाधारण नेतृत्व और सूझबूझ का परिचय दिया, उसकी तारीफ आज हर कोई कर रहा है। राजेंद्र दवाड़ी ने घबराने के बजाय तुरंत स्थिति की गंभीरता को समझा और एक मास्टर प्लान तैयार किया। उनके लिए सबसे पहली प्राथमिकता उन 1643 बच्चों की सुरक्षा थी, जिन्हें उनके माता-पिता ने सुबह हंसते हुए स्कूल भेजा था।

राजेंद्र दवाड़ी ने बिना एक सेकंड गंवाए स्कूल स्टाफ और शिक्षकों की एक आपातकालीन टीम बनाई। उन्होंने बच्चों को सुरक्षित स्थानों और छत की तरफ शिफ्ट करने के निर्देश दिए। उनके चेहरे पर डर का नामोनिशान नहीं था, ताकि बच्चे और बाकी स्टाफ डर के मारे अपना आपा न खो बैठें। उनका यह शांत स्वभाव और त्वरित निर्णय ही उस दिन सबसे बड़ा जीवनरक्षक साबित हुआ।

कैसे चलाया गया रेस्क्यू ऑपरेशन?

बच्चों को बचाने का यह अभियान किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था। आइए जानते हैं कि इस दौरान क्या-क्या कदम उठाए गए:

  • तत्काल अलर्ट: पानी के खतरे को भांपते ही तुरंत सभी कक्षाओं में सायरन बजाया गया और बच्चों को करीने से सुरक्षित जोन्स में इकट्ठा किया गया।
  • ऊपरी मंजिलों का इस्तेमाल: भूतल (Ground Floor) पर तेजी से भर रहे पानी को देखते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित रूप से स्कूल की ऊपरी मंजिलों और छतों पर पहुंचाया गया।
  • स्टाफ की तैनाती: हर फ्लोर पर शिक्षकों की ड्यूटियां लगाई गईं ताकि कोई भी बच्चा घबराकर नीचे न भागे और अनुशासन बना रहे।
  • प्रशासन से समन्वय: स्कूल प्रबंधन ने तुरंत स्थानीय पुलिस, राहत दलों और जिला प्रशासन से संपर्क साधकर मदद की गुहार लगाई।

एक एक पल था भारी, जब तक हर बच्चा नहीं निकला सुरक्षित

रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान हर गुजरता सेकंड भारी पड़ रहा था। पानी का बहाव लगातार तेज होता जा रहा था। प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी खुद एक-एक कमरे और सीढ़ी पर नजर रख रहे थे। उन्होंने सुनिश्चित किया कि हर एक बच्चा सुरक्षित जगह पर पहुंच जाए। छोटे बच्चों को शिक्षकों ने अपनी गोद में उठाया और उन्हें ढांढस बंधाया।

स्थानीय प्रशासन और राहत कर्मियों के पहुंचने से पहले ही स्कूल के अंदरूनी प्रबंधन ने आधी से ज्यादा जंग जीत ली थी। जब अंततः सभी 1643 बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया और किसी भी प्रकार की जनहानि की खबर नहीं आई, तब जाकर प्रशासन और शिक्षकों ने राहत की सांस ली।

सोशल मीडिया पर हो रही है जमकर तारीफ

जैसे ही इस घटना की खबरें और तस्वीरें बाहर आईं, सोशल मीडिया पर नेपाल के इस जांबाज शिक्षक की चर्चाएं आम हो गईं। हर कोई राजेंद्र दवाड़ी की बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा को सलाम कर रहा है। लोगों का कहना है कि आज के दौर में ऐसे शिक्षक ही समाज की असली ताकत हैं जो अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की रक्षा करते हैं।

यह घटना हमें यह भी सिखाती है कि स्कूलों और संस्थानों में आपदा प्रबंधन (Disaster Management) की ट्रेनिंग कितनी जरूरी है। अगर समय रहते सही कदम न उठाया जाता, तो यह एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय त्रासदी बन सकती थी। बहरहाल, सभी बच्चे अपने-अपने घरों और परिजनों के पास सुरक्षित लौट चुके हैं, और इस पूरी आपदा ने एक बार फिर इंसानियत और जिम्मेदारी की एक मिसाल पेश की है।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor (विदेश खबरें)

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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