देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में अपने बच्चों को दाखिला दिलाने का सपना हर माता-पिता का होता है। लेकिन क्या हो जब यही सपना किसी शातिर ठग का धंधा बन जाए? हाल ही में मुंबई पुलिस ने एक ऐसे ही हाई-टेक और बेहद शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने देश के नामी इंजीनियरिंग कॉलेजों (IITs और टॉप B.Tech संस्थानों) में एनआरआई (NRI) और मैनेजमेंट कोटे से एडमिशन दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया। हैरानी की बात यह है कि इस बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देने वाले कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि खुद पढ़े-लिखे युवा हैं, जिनमें 5 बीटेक पास इंजीनियर भी शामिल हैं।
इंस्टाग्राम पर विज्ञापन और कॉलिंग सेंटरों का जाल
मुंबई की पवई पुलिस ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरा सिंडिकेट बेहद शातिर तरीके से काम कर रहा था। आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खासकर इंस्टाग्राम पर बेहद आकर्षक विज्ञापन पोस्ट करते थे। इन विज्ञापनों में देश के टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में कन्फर्म एडमिशन का लालच दिया जाता था।
डीसीपी दत्ता नलावडे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि पवई पुलिस स्टेशन में एक पीड़ित द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया था। तकनीकी सर्विलांस और डिजिटल फुटप्रिंट्स की मदद से पुलिस को पता चला कि इस गिरोह की जड़ें महाराष्ट्र के पुणे शहर में फैली हुई हैं।
पुणे से चलाए जा रहे थे फर्जी कॉल सेंटर
जांच में यह बात सामने आई कि आरोपियों ने पुणे में बकायदा दो फुल-फंक्शनल कॉल सेंटर बना रखे थे। इन सेंटरों से युवाओं की एक टीम छात्रों और उनके अभिभावकों को फोन करती थी। चूंकि इस गिरोह में खुद बीटेक पास इंजीनियर शामिल थे, इसलिए वे अभिभावकों से तकनीकी भाषा में बात करके उनका भरोसा आसानी से जीत लेते थे।
वे एनआरआई और मैनेजमेंट कोटे की सीटों का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठते थे। साल 2024 से यह गिरोह सक्रिय था और अब तक इसने न जाने कितने छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है।
फ्लाइट से हैदराबाद और दिल्ली ले जाकर देते थे चकमा
इस ठगी का सबसे खतरनाक पहलू यह था कि जालसाज पीड़ितों का विश्वास जीतने के लिए किसी भी हद तक चले जाते थे। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अभिभावकों और छात्रों को दिल्ली, हैदराबाद और अन्य बड़े शहरों के संस्थानों में ले जाते थे।
- फ्लाइट का सफर: पीड़ित को शक न हो, इसलिए उसे हवाई जहाज से दूसरे शहर ले जाया जाता था।
- फर्जी कागजी कार्रवाई: हैदराबाद या अन्य शहरों में ले जाकर फर्जी काउंसलिंग और एडमिशन लेटर सौंपे जाते थे।
- भारी रकम वसूली: इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पीड़ित को पूरी तरह यकीन हो जाता था कि उसका काम हो गया है और वे मोटी रकम ट्रांसफर कर देते थे।
बिहार का सोनू कुमार है मास्टरमाइंड, लग्जरी गाड़ियां जब्त
मुंबई पुलिस की इस रेड में जो 10 आरोपी पकड़े गए हैं, वे देश के अलग-अलग राज्यों से ताल्लुक रखते हैं। इनमें 4 आरोपी बिहार के, 4 उत्तर प्रदेश के, 1 झारखंड और 1 हरियाणा का रहने वाला है। इन सभी की उम्र 25 से 30 वर्ष के बीच है। इस पूरे सिंडिकेट का मास्टरमाइंड बिहार का रहने वाला 35 वर्षीय सोनू कुमार है।
पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान जब्त किया है, जिसकी कीमत 1 करोड़ रुपये से अधिक है:
- 22 स्मार्टफोन और कई हाई-एंड लैपटॉप
- ठगी के पैसों से खरीदी गई जगुआर (Jaguar) और बीएमडब्ल्यू (BMW) जैसी लग्जरी कारें
- मारुति सुजुकी एस-क्रॉस और अन्य वाहन (कुछ गाड़ियां दोस्तों के नाम पर रजिस्टर्ड थीं)
अभिभावकों के लिए एक बड़ी चेतावनी
यह घटना देश के लाखों माता-पिता के लिए एक गंभीर चेतावनी है। शॉर्टकट या पैसों के दम पर मैनेजमेंट और एनआरआई कोटे से एडमिशन कराने के नाम पर सक्रिय ऐसे फर्जी गिरोहों से हमेशा सतर्क रहना चाहिए। किसी भी संस्थान में एडमिशन लेने से पहले उसकी आधिकारिक वेबसाइट और यूनिवर्सिटी के माध्यम से ही पूरी पुष्टि करें।
फिलहाल, मुंबई पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक कुल कितने छात्रों को अपना शिकार बनाया है और इनके बैंक खातों में कितने करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। पुलिस इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां भी कर सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. यह फर्जीवाड़ा किस तरह से अंजाम दिया जाता था?
आरोपी इंस्टाग्राम पर विज्ञापन देकर और पुणे में कॉल सेंटर चलाकर छात्रों को टॉप इंजीनियरिंग कॉलेजों में एनआरआई कोटे से एडमिशन दिलाने का झूठा वादा करते थे।
2. पुलिस ने इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया है?
मुंबई की पवई पुलिस ने कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 5 बीटेक पास इंजीनियर भी शामिल हैं। इस गिरोह का मास्टरमाइंड सोनू कुमार है।
3. इस ठगी से बचने के लिए छात्रों और अभिभावकों को क्या करना चाहिए?
कभी भी सोशल मीडिया विज्ञापनों या एजेंटों के झांसे में आकर एडमिशन के लिए डायरेक्ट कैश या अनधिकृत खातों में पैसे न भेजें। हमेशा कॉलेजों की ऑफिशियल वेबसाइट से ही वेरीफाई करें।