जन्म प्रमाण पत्र आपकी उम्र भले ही तीस साल बताए, लेकिन आपके शरीर के भीतर दौड़ता खून और आपकी रक्त-नलिकाएं किसी दूसरी ही कहानी बयां कर रही हो सकती हैं। यह संभव है कि कागजों पर आप युवा हों, लेकिन आपकी धमनियों की हालत किसी साठ साल के बुजुर्ग जैसी हो चुकी हो। आधुनिक जीवनशैली, तनाव, खानपान की अनियमित आदतें और शारीरिक सक्रियता की कमी हमारे दिल और रक्त-नलिकाओं पर भारी पड़ रही है। इसी छिपे हुए और गंभीर खतरे को समय रहते भांपने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास (IIT Madras) ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है।
क्या है आईआईटी मद्रास का 'वेस्पा' मिशन?
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास ने हाल ही में देश का पहला व्यापक वैस्कुलर हेल्थ मैप तैयार करने के लिए 'वेस्पा' (Vespa Mission) मिशन की शुरुआत की है। इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य हृदय रोगों या हार्ट अटैक के लक्षण प्रकट होने से काफी पहले ही शरीर में पल रहे जोखिमों की पहचान करना है। आज के समय में कार्डियोवैस्कुलर बीमारियां सबसे बड़े स्वास्थ्य संकट के रूप में उभर रही हैं, ऐसे में यह मिशन चिकित्सा जगत में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।
पारंपरिक रूप से हम दिल की सेहत की जांच के लिए कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और ईसीजी पर निर्भर रहते हैं। लेकिन धमनियों की अंदरूनी सेहत और उनके लचीलेपन को आंकने का कोई सटीक और आसान पैमाना आम तौर पर उपलब्ध नहीं था। वेस्पा मिशन इसी कमी को दूर करने के लिए डिजाइन किया गया है, जो भारत के नागरिकों के लिए एक समर्पित स्वास्थ्य डेटाबेस तैयार करेगा।
धमनियाँ भी होती हैं बूढ़ी: जानिए 'अर्ली वैस्कुलर एजिंग' का सच
एक स्वस्थ और युवा व्यक्ति की धमनियाँ रबड़ की एक लचीली नली की तरह होती हैं। जब दिल धड़कता है, तो ये धमनियाँ फैलती और सिकुड़ती हैं, जिससे रक्त प्रवाह का दबाव संतुलित रहता है। लेकिन उम्र बढ़ने के साथ और खासकर खराब जीवनशैली के कारण धमनियों का यह प्राकृतिक लचीलापन कम होने लगता है।
चिकित्सा विज्ञान में इसे 'अर्ली वैस्कुलर एजिंग' (Early Vascular Ageing) यानी समय से पहले रक्त-नलिकाओं का बूढ़ा होना कहा जाता है। जब धमनियाँ कठोर होने लगती हैं, तो दिल को रक्त पंप करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
न सुई का दर्द, न खून की जांच: आ गया 'आर्टसेंस'
इस मिशन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसके तहत की जाने वाली जांच के लिए आपको किसी भी प्रकार की सुई चुभवाने या खून निकलवाने की जरूरत नहीं है। आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक स्वदेशी उपकरण विकसित किया है, जिसका नाम 'आर्टसेंस' (ArtSense) है।
यह अनोखा और अत्याधुनिक उपकरण मात्र पांच मिनट के भीतर यह बता देता है कि आपकी धमनियों की स्थिति क्या है। यह मशीन धमनियों की कठोरता और रक्त तरंग की गति (Pulse Wave Velocity) का बारीकी से आकलन करती है। बिना किसी चीर-फाड़ या जटिल प्रक्रिया के इतनी सटीक जानकारी मिलना चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
- पल्स वेव एनालिसिस: धमनी जितनी अधिक कठोर होगी, उसके भीतर से गुजरने वाली रक्त तरंग (Pulse Wave) उतनी ही तेज गति से आगे बढ़ेगी।
- जैविक सेहत का आकलन: तरंगों की इसी गति और धमनियों के व्यवहार का अध्ययन करके आर्टसेंस उपकरण उनकी जैविक उम्र और स्वास्थ्य का सटीक अनुमान लगा लेता है।
- प्री-स्क्रीनिंग टूल: यह तकनीक किसी भविष्य की निश्चित घटना की भविष्यवाणी नहीं करती, बल्कि यह एक बेहतरीन स्क्रीनिंग टूल है जो समय रहते आपको संभलने का मौका देता है।
भारत के लिए भारत का अपना हेल्थ मानक
अब तक एक बड़ी समस्या यह रही है कि भारत में हृदय रोगों और धमनियों की स्थिति का आकलन करने के लिए विदेशी आबादी पर किए गए शोध और मानकों का इस्तेमाल किया जाता था। गोरे और एशियाई लोगों के शारीरिक गठन, खानपान और जेनेटिक्स में जमीन-आसमान का अंतर होता है, इसलिए विदेशी मानक कई बार पूरी तरह सटीक नहीं बैठते थे।
वेस्पा मिशन के तहत देश भर में एक लाख से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की जाएगी। इसके जरिए भारतीय आबादी के अनुकूल एक विशिष्ट वैस्कुलर हेल्थ डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान में देश के कई प्रतिष्ठित अस्पताल और चिकित्सा शोध संस्थान भी अपनी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
भविष्य की तैयारियों और बचाव की दिशा में कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते धमनियों की इस कठोरता का पता चल जाए, तो खानपान में बदलाव, योग, नियमित व्यायाम और उचित चिकित्सा से दिल के बड़े खतरों को टाला जा सकता है। आईआईटी मद्रास का यह प्रयास न केवल तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर भारत की मिसाल है, बल्कि यह आम जनता के स्वास्थ्य के प्रति एक संवेदनशीलता का भी प्रतीक है। आने वाले दिनों में जब यह तकनीक देश के कोने-कोने तक पहुँचेगी, तो यह अनगिनत जिंदगियों को बचाने में मददगार साबित होगी।
