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IIT Madras का कमाल! अब सिर्फ 5 मिनट में पता चलेगी धमनियों की असली उम्र

IIT Madras का कमाल! अब सिर्फ 5 मिनट में पता चलेगी धमनियों की असली उम्र

आधुनिक दौर की भागदौड़ भरी जिंदगी और अनियमित जीवनशैली ने इंसान की सेहत के समीकरण पूरी तरह से बदल कर रख दिए हैं। आज के समय में दिल से जुड़ी बीमारियां (Heart Diseases) बेहद आम हो चुकी हैं और सबसे डरावनी बात यह है कि ये समस्याएं अब युवाओं को भी अपनी चपेट में ले रही हैं। अक्सर लोगों को अपनी धमनियों (Arteries) में आ रही दिक्कतों का तब पता चलता है, जब बहुत देर हो चुकी होती है। लेकिन अब चिकित्सा और तकनीक के क्षेत्र में एक ऐसी बड़ी सफलता हाथ लगी है, जो इस तस्वीर को पूरी तरह से बदल सकती है।

देश के प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras) ने एक बेहद क्रांतिकारी और अनूठी पहल की शुरुआत की है। इस मिशन का नाम 'वेस्पा' (VESPA) मिशन रखा गया है। इस नई तकनीक के आ जाने से अब किसी भी व्यक्ति की धमनियों की सेहत और उनकी 'असली उम्र' का आकलन करने में घंटों या दिनों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि यह काम महज 5 मिनट के भीतर संभव हो सकेगा। आइए विस्तार से जानते हैं कि आखिर यह तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है।

क्या है आईआईटी मद्रास का 'वेस्पा' मिशन?

स्वास्थ्य अनुसंधान और तकनीक के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होने वाले इस 'वेस्पा' मिशन का मुख्य उद्देश्य कार्डियोवैस्कुलर यानी हृदय से जुड़ी बीमारियों का शुरुआती दौर में ही सटीक पता लगाना है। आमतौर पर मेडिकल साइंस में क्रोनोलॉजिकल एज (जन्म के हिसाब से उम्र) और बायोलॉजिकल एज (शरीर के अंगों की स्थिति के हिसाब से उम्र) का जिक्र होता है। इसी तरह, हमारी धमनियां अंदर से कितनी स्वस्थ हैं और उन पर उम्र का क्या असर हुआ है, इसे धमनियों की उम्र कहा जाता है।

IIT Madras के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों ने मिलकर इस 'वेस्पा' (VESPA) सिस्टम को विकसित किया है। यह तकनीक नॉन-इवेसिव (Non-invasive) यानी बिना किसी चीर-फाड़ या जटिल प्रक्रिया के शरीर के भीतर रक्त वाहिकाओं की स्थिति का सटीक डेटा उपलब्ध कराती है। इसके जरिए मेडिकल प्रोफेशनल्स को यह समझने में आसानी होती है कि संबंधित व्यक्ति की धमनियां कितनी लचीली या कठोर (Stiff) हो चुकी हैं।

सिर्फ 5 मिनट में कैसे होगी जांच?

आम तौर पर धमनियों के स्वास्थ्य की जांच करने के लिए या तो महंगे स्कैन की जरूरत होती है या फिर जटिल क्लीनिकल टेस्ट करवाने पड़ते हैं, जिसमें काफी समय लगता है। इसके विपरीत, 'वेस्पा' मिशन के तहत तैयार की गई प्रणाली बेहद तेज और प्रभावी है।

  • अल्ट्रा-फास्ट स्क्रीनिंग: यह तकनीक केवल 5 मिनट के भीतर मरीज की रक्त वाहिकाओं की स्थिति का आकलन कर लेती है।
  • दर्द रहित प्रक्रिया: इसमें किसी भी प्रकार की सुई या दर्दनाक प्रक्रिया का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।
  • तुरंत नतीजे: जांच पूरी होते ही सिस्टम सटीक आंकड़े सामने रख देता है, जिससे डॉक्टर तुरंत सही फैसला ले सकते हैं।

इस पूरी प्रक्रिया में अत्याधुनिक सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित एल्गोरिदम का इस्तेमाल किया जाता है, जो पल्स वेव वेलोसिटी (Pulse Wave Velocity) को मापकर धमनियों के कड़ेपन का सटीक अनुमान लगाते हैं।

क्यों पड़ी इस तकनीक की जरूरत?

भारत समेत पूरी दुनिया में कार्डियक अरेस्ट और हार्ट अटैक के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। कई बार बाहर से पूरी तरह स्वस्थ दिखने वाले व्यक्ति को अचानक गंभीर दिल का दौरा पड़ जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अंदरूनी तौर पर धमनियां कमजोर या संकरी हो चुकी होती हैं, लेकिन पारंपरिक जांचों में इसका शुरुआती संकेत नहीं मिल पाता।

धमनियों का कड़ा होना एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) की ओर इशारा करता है, जो आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर, स्ट्रोक और दिल की बीमारियों का बड़ा कारण बनता है। 'वेस्पा' जैसी तकनीक के आ जाने से समय रहते ही इस खतरे को भांपा जा सकता है। यदि किसी युवा की भी धमनियों की उम्र उसकी वास्तविक उम्र से ज्यादा पाई जाती है, तो वह समय रहते अपनी जीवनशैली, खानपान और वर्कआउट में बदलाव कर सकता है।

रोकथाम की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम

चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इलाज से हमेशा बेहतर बचाव होता है। 'वेस्पा' मिशन इसी अवधारणा पर काम करता है। यह तकनीक न केवल बड़े अस्पतालों बल्कि सुदूर ग्रामीण इलाकों या छोटे क्लीनिकों में भी आसानी से पहुंचाई जा सकती है क्योंकि यह पोर्टेबल और उपयोग में आसान है।

आईआईटी मद्रास की इस पहल से भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रिवेंटिव हेल्थकेयर (Preventive Healthcare) को एक नई दिशा मिलेगी। आने वाले समय में जब यह तकनीक बड़े पैमाने पर आम जनता के लिए उपलब्ध होगी, तो यह लाखों लोगों की जान बचाने में मददगार साबित हो सकती है।

संस्थान के विशेषज्ञों का कहना है कि वेस्पा मिशन पर अभी और भी शोध किए जा रहे हैं ताकि इसकी सटीकता को और अधिक बढ़ाया जा सके। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारतीय संस्थान किस प्रकार तकनीकी नवाचारों के जरिए आम आदमी के जीवन को आसान और सुरक्षित बनाने में जुटे हुए हैं।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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