देश की राजधानी नई दिल्ली में सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के विरोध में विपक्षी दलों के गठबंधन 'INDIA' ने मोर्चा खोल दिया है। जंतर-मंतर पर आज, 8 अक्टूबर 2026 को विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। इस आंदोलन के और अधिक उग्र होने के संकेत मिल रहे हैं, क्योंकि गठबंधन ने देशव्यापी स्तर पर विरोध और बंद का आह्वान किया है।
जंतर-मंतर पर उमड़ी भीड़, नेताओं ने भरी हुंकार
सुबह से ही दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर विभिन्न विपक्षी दलों के दिग्गज नेता और कार्यकर्ता जुटने शुरू हो गए थे। हाथों में तख्तियां और बैनर लिए प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता खतरे में है और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए शीर्ष स्तर पर बदलाव बेहद जरूरी हो चुके हैं।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रमुख नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक पद या व्यक्ति की नहीं, बल्कि देश के लोकतंत्र और संविधान को बचाने की है। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के फैसले लगातार एकतरफा और संदिग्ध प्रतीत हो रहे हैं, जिससे आम जनता का लोकतांत्रिक संस्थाओं से भरोसा उठ रहा है।
क्यों गरमाई है सियासत? मुख्य चुनाव आयुक्त पर गंभीर सवाल
विपक्षी गठबंधन 'INDIA' पिछले कुछ समय से चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर लगातार हमलावर रहा है। उनका दावा है कि चुनावी अनियमितताओं और शिकायतों पर आयोग का रुख उदासीन रहा है। विपक्षी दलों का यह भी कहना है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन हालिया दौर में इस पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
प्रमुख मांगें और आरोप:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का तत्काल प्रभाव से इस्तीफा।
- चुनावी प्रक्रियाओं और ईवीएम-वीवीपैट मिलान को लेकर उठ रहे सवालों पर पारदर्शी जवाब।
- विपक्ष की शिकायतों पर निष्पक्ष और त्वरित कार्रवाई का आश्वासन।
- संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा के लिए ठोस कदम।
देशव्यापी 'बंद' और आगे की रणनीति
जंतर-मंतर के इस प्रदर्शन को सिर्फ एक शुरुआत माना जा रहा है। गठबंधन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके तहत देश के विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय स्तर पर रैलियां, धरने और भारत बंद जैसे कदम उठाए जा सकते हैं ताकि सरकार और चुनाव आयोग पर दबाव बनाया जा सके।
विपक्षी दलों की योजना है कि इस मुद्दे को संसद से लेकर सड़क तक पूरी ताकत से उठाया जाए। आने वाले सत्र में भी इस पर भारी हंगामा होने के पूरे आसार हैं। हालांकि, सत्तारूढ़ दल की तरफ से अभी तक इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए विपक्षी दलों पर संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप लगाया गया है।
प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था सख्त
विपक्ष के इस आक्रामक रुख को देखते हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बनी रहे। ट्रैफिक डायवर्जन के कारण आम नागरिकों को भी कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन स्थिति फिलहाल नियंत्रण में बताई जा रही है।
इस ताजा राजनीतिक घटनाक्रम ने देश की राजनीति में एक बार फिर भूचाल ला दिया है। देखना यह होगा कि सरकार और चुनाव आयोग इस बढ़ते दबाव पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और क्या यह विरोध प्रदर्शन देश की राजनीति में कोई बड़ा मोड़ ला पाएगा।