देश की राजनीति में इन दिनों सरगर्मी काफी तेज हो चुकी है। बुधवार को हुई INDIA गठबंधन की एक उच्चस्तरीय बैठक में विपक्षी दलों ने मौजूदा राजनीतिक हालात और चुनावी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कई बड़े और रणनीतिक फैसले लिए हैं। विपक्षी खेमे ने साफ कर दिया है कि वे सरकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ अब सड़क से लेकर संसद तक और राष्ट्रपति भवन से लेकर न्यायपालिका तक आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं। इस बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने आगामी विरोध प्रदर्शनों का पूरा खाका देश के सामने रखा।
'सेव डेमोक्रेसी मार्च' और देशव्यापी जागरूकता अभियान
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि INDIA ब्लॉक ने देश के युवाओं, विभिन्न राजनीतिक दलों और संविधान में अटूट विश्वास रखने वाले नागरिकों को जोड़ने के लिए एक व्यापक कार्यक्रम रूपरेखा तैयार की है। इसी कड़ी में आगामी 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देश के हर कोने में 'सेव डेमोक्रेसी मार्च' (Save Democracy March) निकाला जाएगा।
यह मार्च केवल किसी एक शहर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के सभी जिलों में इसका आयोजन किया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य आम जनता को मौजूदा राजनीतिक और चुनावी चुनौतियों के प्रति जागरूक करना है। मार्च के समापन पर हर जिले में स्थानीय जिला अधिकारियों के कार्यालयों के माध्यम से ज्ञापन भी सौंपे जाएंगे, ताकि प्रशासन तक सीधी आवाज पहुंचाई जा सके।
चुनाव आयोग तक मार्च और राष्ट्रपति से मुलाकात
विपक्षी रणनीति का सबसे अहम हिस्सा आगामी 6 अक्टूबर को देखने को मिलेगा, जब सभी विपक्षी सांसद मिलकर चुनाव आयोग के दफ्तर तक एक मार्च निकालेंगे। इस मार्च के जरिए मुख्य रूप से चुनावों में कथित वोट चोरी और अन्य गंभीर चुनावी अनियमितताओं के मामलों को उठाया जाएगा।
इतना ही नहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने यह भी जानकारी दी कि अक्टूबर महीने के दूसरे सप्ताह में विपक्षी नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल देश की राष्ट्रपति से मिलने का आधिकारिक समय मांगेगा। इस मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति के समक्ष चुनावों से जुड़े तमाम सबूत और कथित अनियमितताओं का कच्चा-चिट्ठा रखा जाएगा, ताकि सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को जमीनी हकीकत से अवगत कराया जा सके।
पांच बड़ी रैलियां और नवंबर की मेगा रैली
जनता के बीच इस मुद्दे को सीधे तौर पर ले जाने के लिए INDIA गठबंधन देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच बड़ी रैलियों का आयोजन करेगा। हालांकि, इन रैलियों की सटीक जगहों और तारीखों का ऐलान आने वाले दिनों में स्थिति के अनुसार किया जाएगा।
इन तमाम आयोजनों का समापन राजधानी दिल्ली में एक ऐतिहासिक शक्ति प्रदर्शन के साथ होगा। खरगे ने ऐलान किया कि आगामी 1 नवंबर को दिल्ली में एक विशाल मेगा रैली का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश भर के विपक्षी दिग्गज एक मंच पर नजर आएंगे। इन रैलियों का मुख्य एजेंडा जनता को यह समझाना होगा कि किस प्रकार कथित तौर पर लोगों के मतदान के लोकतांत्रिक अधिकार को छीना जा रहा है और वोटों में हेराफेरी की जा रही है।
राहुल गांधी और ममता बनर्जी के तीखे तेवर
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने का गंभीर आरोप लगाया। राहुल गांधी ने दो टूक शब्दों में कहा कि जो लोग इस पूरी प्रक्रिया में दोषी पाए गए हैं, उन्हें सजा मिलनी ही चाहिए। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार अपने पद से जाएंगे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुर्सी भी सुरक्षित नहीं बचेगी।
राहुल गांधी लगातार देश के अलग-अलग मंचों से वोट चोरी के इस मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठा रहे हैं। इस पर जोर देते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि शुरुआत में भले ही लोगों को इन आरोपों पर आसानी से यकीन नहीं हुआ हो, लेकिन अब चुनाव आयोग के सामने जो तथ्य और खुलासे सामने आ रहे हैं, उसके बाद कथित वोट चोरी की कड़वी सच्चाई धीरे-धीरे देश की जनता के सामने बेनकाब हो रही है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कड़ा रुख
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने भी इस बैठक में शिरकत की और गठबंधन की एकजुटता का जोरदार संदेश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि INDIA ब्लॉक पूरी तरह से एकजुट है और कंधे से कंधा मिलाकर इस वैचारिक और राजनीतिक लड़ाई को लड़ेगा।
ममता बनर्जी ने हालिया चुनावी परिणामों पर सवाल उठाते हुए इसे 'बहुत बड़ी चोरी' करार दिया। उन्होंने दावा किया कि बिहार, हरियाणा, महाराष्ट्र और उनके अपने गृह राज्य पश्चिम बंगाल में कथित तौर पर वोट चोरी के माध्यम से चुनाव परिणामों को प्रभावित किया गया है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा निशाना साधते हुए ममता बनर्जी ने मांग की कि उन्हें तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष पहले ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुका है, जिससे यह साफ जाहिर होता है कि विपक्षी दल इस मामले को कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर तार्किक अंजाम तक ले जाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
निष्कर्ष
फिलहाल यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अक्टूबर और नवंबर के इन महीनों में होने वाले इन विरोध प्रदर्शनों और रैलियों का देश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है। एक तरफ जहां सत्ता पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन ने इसे अपने अस्तित्व और देश के लोकतंत्र को बचाने की आखिरी लड़ाई बना लिया है। आने वाले दिनों में यह सियासी पारा और अधिक चढ़ने के पूरे आसार हैं।