भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक ऐतिहासिक बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। स्मार्टफोन यूजर्स लंबे समय से जिस बात का इंतजार कर रहे थे, अब वह सच होने जा रहा है। देश में 5जी तकनीक की रफ्तार को और अधिक पंख लगाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। आने वाले दिनों में मोबाइल नेटवर्क से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने वाला है, जिससे इंटरनेट की दुनिया पूरी तरह बदल जाएगी।
क्या है सरकार का नया प्लान और कैसे बढ़ेगी रफ्तार?
दूरसंचार क्षेत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, सरकार देश में 5जी की डेटा स्पीड और नेटवर्क कवरेज को विस्तार देने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (EMF) रेडिएशन की लिमिट को दोगुना करने की योजना पर काम कर रही है। वर्तमान मानकों के मुताबिक, टेलिकॉम टावर्स और उपकरणों के लिए रेडिएशन की एक तय सीमा निर्धारित है। लेकिन जैसे-जैसे 5जी का दायरा बढ़ रहा है, वैसे-वैसे डेटा ट्रैफिक और हाई-स्पीड इंटरनेट की मांग भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही है।
इसी मांग को संतुलित करने और नेटवर्क कंजेशन को खत्म करने के लिए नियमों को लचीला बनाया जा रहा है। रेडिएशन की सीमा बढ़ने से टेलीकॉम कंपनियों को अपने टावर्स की ट्रांसमिशन पावर को बेहतर करने का मौका मिलेगा, जिसका सीधा फायदा अंतिम उपभोक्ता को मिलेगा।
अगले महीने से लागू हो सकते हैं नए नियम
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस बदलाव से जुड़े नए और संशोधित नियम अगले महीने से ही देश भर में लागू किए जा सकते हैं। डिपार्ट्मेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (DoT) और अन्य संबंधित नियामक संस्थाएं इस पर अंतिम मुहर लगाने की प्रक्रिया में हैं। जैसे ही यह निर्देश आधिकारिक तौर पर जारी होंगे, सभी बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर्स अपनी नेटवर्क सेटिंग्स और इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना शुरू कर देंगे।
यूजर्स को क्या मिलेगा फायदा?
- सुपरफास्ट डाउनलोडिंग और अपलोडिंग: भारी-भरकम फाइलें और 4K वीडियो अब पलक झपकते डाउनलोड हो सकेंगे।
- बेहतर इंडोर कवरेज: जिन इलाकों में अक्सर सिग्नल गायब होने की समस्या रहती है, वहां भी नेटवर्क मजबूत होगा।
- लैग-फ्री गेमिंग और स्ट्रीमिंग: ऑनलाइन गेमिंग के शौकीनों और हाई-डेफिनिशन वीडियो स्ट्रीम करने वालों को बेहतरीन अनुभव मिलेगा।
- स्मार्ट सिटी और आईओटी (IoT) को बढ़ावा: ट्रैफिक मैनेजमेंट, स्मार्ट ग्रिड और ऑटोमैटेड व्हीकल्स जैसी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को निर्बाध डेटा मिलेगा।
क्या सेहत पर पड़ेगा कोई असर?
जब भी रेडिएशन की सीमा बढ़ाने की बात आती है, तो आम जनता के मन में स्वास्थ्य को लेकर चिंताएं पैदा होना स्वाभाविक है। हालांकि, विशेषज्ञों का साफ तौर पर कहना है कि ये बदलाव वैश्विक मानकों (ICNIRP गाइडलाइंस) के दायरे में ही किए जा रहे हैं। भारत में पहले से ही दुनिया के सबसे कड़े रेडिएशन नॉर्म्स लागू हैं। इन नियमों में संशोधन के बाद भी तय की गई सीमाएं मानव स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह से सुरक्षित स्तर पर ही रखी जाएंगी।
टेलीकॉम सेक्टर के लिए गेम-चेंजर
जानकारों का मानना है कि यह कदम भारतीय टेलीकॉम बाजार के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। पिछले कुछ वर्षों में भारत दुनिया के सबसे तेजी से 5जी अपनाने वाले देशों में शुमार हो चुका है। ऐसे में नेटवर्क की क्षमता को बढ़ाना समय की सबसे बड़ी मांग थी। आगामी महीनों में इस बदलाव के बाद न केवल इंटरनेट की स्पीड सुधरेगी, बल्कि डिजिटल इकॉनमी को भी एक नई रफ्तार मिलेगी।
अब सभी की निगाहें अगले महीने आने वाले आधिकारिक नोटिफिकेशन पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि भारत का डिजिटल भविष्य कितनी तेजी से आगे बढ़ने वाला है।
