उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी चित्रकूट से एक बेहद डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। यहां पिछले कई दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के चलते तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। मां मंदाकिनी नदी ने अपने उग्र रूप से पिछले 23 सालों का पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार करते हुए शहर के रिहायशी इलाकों और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों तक पहुंच गया है। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि प्रसिद्ध रामघाट से लेकर तमाम मंदिर और मठ जलमग्न हो चुके हैं, जिससे स्थानीय लोगों और दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।
सड़कों पर चल रही हैं नावें, जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त
जलस्तर में अचानक हुई भारी वृद्धि के कारण चित्रकूट के मुख्य मार्गों का संपर्क टूट गया है। जो सड़कें कुछ घंटों पहले तक वाहनों की आवाजाही से गुलजार रहती थीं, वहां अब प्रशासनिक और स्थानीय लोगों द्वारा नावें चलाई जा रही हैं। पानी का बहाव इतना तेज है कि कई इलाकों में कच्चे मकान धराशायी हो गए हैं और पक्के मकानों की निचली मंजिलों में पानी घुस गया है। स्थानीय प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है और निचले इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
हालात का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नदी पर बना एक महत्वपूर्ण पुल पानी के तेज बहाव में तिनके की तरह बह गया। इस पुल के बहने से कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह कट गया है। आवागमन के साधन ठप होने से राहत सामग्री पहुंचाने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को मौके पर तैनात किया गया है, जो लगातार राहत और बचाव कार्यों में जुटी हुई हैं।
प्रशासन की अपील: घरों से बाहर न निकलें
जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक आपातकालीन चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अत्यधिक आवश्यकता पड़ने पर ही अपने घरों से बाहर निकलें और पूरी तरह से सतर्क रहें। विशेष तौर पर मंदाकिनी नदी के तटवर्ती इलाकों और रामघाट के आसपास रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों या बनाए गए राहत शिविरों में शिफ्ट होने के निर्देश दिए गए हैं।
- रामघाट की स्थिति: प्रसिद्ध रामघाट पूरी तरह डूब चुका है, और पानी मंदिर के शिखरों को छूने लगा है।
- परिवहन ठप: कई ग्रामीण मार्ग और पुल बह जाने के कारण संपर्क पूरी तरह टूट गया है।
- राहत कार्य: आपदा प्रबंधन टीमें और स्थानीय पुलिस लगातार फंसे हुए लोगों को निकालने में जुटी हैं।
- सुरक्षा चेतावनी: लोगों से नदी के पास न जाने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सख्त अपील की गई है।
मौसम विभाग का अनुमान और आगे की चुनौतियां
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले कुछ और घंटों तक बारिश का यह सिलसिला रुक-रुक कर जारी रह सकता है, जिससे स्थिति के और अधिक गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है। जल संसाधन विभाग लगातार मंदाकिनी नदी के जलस्तर पर पैनी नजर बनाए हुए है। प्रशासन का मुख्य फोकस इस समय जनहानि को रोकना और प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी व दवाइयां जैसी बुनियादी जरूरतें पहुंचाना है।
चित्रकूट में आई इस प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर जल निकासी प्रणालियों और नदी के किनारों पर होने वाले अनियोजित निर्माण कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल, पूरा जिला प्रशासन इस संकट से उबरने और जनजीवन को सामान्य पटरी पर लाने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा है।
