वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक बार फिर भूचाल आ गया है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार करते हुए साफ कर दिया है कि जब तक वाशिंगटन उसकी शर्तों को नहीं मानता, तब तक रणनीतिक रूप से बेहद अहम 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को दोबारा नहीं खोला जाएगा। इसके साथ ही, अमेरिका के साथ पुरानी शर्तों या फ्रेमवर्क के तहत किसी भी तरह की बातचीत में लौटने से भी साफ इनकार कर दिया गया है। ईरान के इस आक्रामक रुख से पूरी दुनिया की निगाहें एक बार फिर इस संवेदनशील जलमार्ग और दोनों देशों के बीच चल रहे महासंग्राम पर टिक गई हैं।
संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबफ का दो टूक बयान
ईरान की संसद (मजलिस) के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबफ ने देश के रुख को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए कहा है कि तेहरान ने अपने स्पष्ट संदेश और मांगें मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचा दी हैं। जब तक इन मांगों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जाता, तेहरान अपने रुख से एक इंच भी पीछे हटने को तैयार नहीं है।
गालिबफ ने देश की मीडिया को दिए गए अपने बयान में जोर देकर कहा, "जब तक ये शर्तें पूरी नहीं हो जातीं, ईरानी राष्ट्र के वैध अधिकारों को मान्यता नहीं मिलती और अमेरिकियों द्वारा किए गए वादों व प्रतिबद्धताओं को लागू नहीं किया जाता, तब तक पुरानी शर्तों पर बातचीत में लौटने या होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।" यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर के बड़े नेता संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क में जमा हो रहे हैं।
तेहरान की तीन मुख्य शर्तें: युद्ध विराम, फंड की रिहाई और नाकाबंदी की समाप्ति
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रजाई ने कतर के रास्ते अमेरिका को अपनी शर्तें पहले ही भेज दी थीं। तेहरान ने स्पष्ट किया है कि संकट को सुलझाने और संघर्ष को समाप्त करने के लिए तीन बुनियादी शर्तों का पूरा होना अनिवार्य है:
- सभी मोर्चों पर युद्ध का पूर्ण अंत: ईरान चाहता है कि किसी भी प्रकार की सैन्य आक्रामकता और संघर्ष तुरंत प्रभाव से बंद हो।
- फ्रोजन फंड (Frozen Funds) की वापसी: विदेशों में रोके गए ईरान के वित्तीय फंड और संपत्तियों को पूरी तरह से मुक्त किया जाए।
- नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) की समाप्ति: ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी सेना द्वारा लगाई गई समुद्री नाकाबंदी को पूरी तरह से हटाया जाए।
इन तीन सूत्रीय मांगों को ही ईरान ने अपनी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा की प्राथमिक धुरी बना लिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर जंग का साया
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यहाँ से गुजरने वाले कच्चे तेल के जहाजों पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं। ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल अबोलफजल शेकार्ची ने दावा किया है कि इस रणनीतिक जलमार्ग की कमान और पहल पूरी तरह से ईरानी सशस्त्र बलों के हाथों में है। इसके साथ ही, उन्होंने अमेरिकी बयानों को केवल एक 'मनोवैज्ञानिक युद्ध' (Psychological Operation) करार देते हुए खारिज कर दिया है।
अमेरिकी सैन्य कार्रवाई पर ईरान की सीधी चेतावनी
ईरान के खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर (Khatam al-Anbiya Central Headquarters) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य दुस्साहस या हमले की गलती की, तो क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों और हितों को लगातार, प्रभावी और बेहद दर्दनाक हमलों का सामना करना पड़ेगा।
इतना ही नहीं, ईरानी सैन्य कमान ने क्षेत्रीय देशों को भी सख्त संदेश देते हुए आगाह किया है कि जो भी देश तेहरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों में मदद या समर्थन करेगा, उसे भी इस कार्रवाई में साझीदार माना जाएगा और तदनुसार परिणाम भुगतने होंगे।
अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और CENTCOM का एक्शन
दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने अपनी रणनीति पर सख्ती से अमल करना शुरू कर दिया है। वाशिंगटन की नाकाबंदी नीति को सख्ती से लागू करने के लिए अमेरिकी बलों ने अब तक 109 कमर्शियल (व्यापारी) जहाजों का मार्ग बदल दिया है। CENTCOM के अनुसार, यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि ईरान आने-जाने वाले समुद्री यातायात पर पूरी तरह नकेल कसी जा सके। अमेरिका ने इसी साल 14 जुलाई से ईरानी बंदरगाहों पर आने-जाने वाले ट्रैफिक के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकाबंदी की कार्रवाई को दोबारा शुरू किया था।
संयुक्त राष्ट्र महासभा और कूटनीतिक हलचल
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान अपने रुख में बदलाव नहीं करता है, तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि यदि उचित माहौल बनता है, तो वे न्यूयॉर्क में चल रही संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के साथ बातचीत के रास्ते पर भी विचार कर सकते हैं।
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच पर अमेरिका-ईरान का यह टकराव और पश्चिम एशिया का व्यापक संकट एक बार फिर दुनिया भर के कूटनीतिक गलियारों में मुख्य चर्चा का विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि जल्द ही दोनों पक्षों के बीच कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।