मुंबई का नाम लेते ही जेहन में सबसे पहली तस्वीर गणेश उत्सव की भव्यता और उमड़ती भीड़ की आती है। ढोल-ताशों की गड़गड़ाहट और 'गणपति बाप्पा मोरया' के जयकारों के बीच शहर का हर कोना भक्ति के रंग में रंगा होता है। लेकिन, इस बीच उत्सव की खुशियों को मातम में बदल देने वाली एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के सबसे प्रतिष्ठित और दुनिया भर में मशहूर गणेशोत्सव मंडल 'लालबाग के राजा' के आसपास के इलाके में एक भीषण हादसा हो गया है, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है।
पेयजल स्टॉल पर पसरा मातम, करंट की चपेट में आए लोग
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लालबाग इलाके में गणपति पंडाल के पास एक अस्थायी पेयजल (ड्रिंकिंग वाटर) स्टॉल लगाया गया था। इस स्टॉल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ थी जो दर्शन के लिए जा रहे थे। इसी दौरान अचानक इस अस्थायी स्टॉल में हाई-वोल्टेज करंट उतर आया। करंट इतनी तेजी से फैला कि वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।
इस अप्रत्याशित हादसे में एक 8 साल की मासूम बच्ची समेत दो लोगों की कीमती जान चली गई है। वहीं, इस दुर्घटना में चार अन्य लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज जारी है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल
इस दुखद घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का सवाल है कि गणेश उत्सव जैसे बड़े आयोजनों में, जहां लाखों की संख्या में भीड़ जुटती है, वहां बिजली के अस्थायी कनेक्शन और वाटर स्टॉल जैसी बुनियादी जगहों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों की जाती है? क्या आयोजकों या संबंधित प्रशासनिक विभागों ने सुरक्षा का पूरा जायजा नहीं लिया था?
- सुरक्षा चूक: अस्थायी स्टॉल में करंट कैसे उतरा, इसकी तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है।
- प्रशासनिक एक्शन: घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और बीएमसी (BMC) के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे।
- घायलों की स्थिति: अस्पताल में भर्ती चारों घायलों की हालत पर डॉक्टर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
त्योहारों के बीच सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
सितंबर 2026 के इन दिनों में जब पूरा महाराष्ट्र गणेशोत्सव के रंग में सराबोर है, इस प्रकार की दुर्घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हैं। गणेश पंडालों और उसके आसपास सुरक्षा के व्यापक दावे तो हर साल किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर लापरवाही की वजह से अक्सर ऐसी अनहोनी सामने आ जाती है। एक छोटी सी लापरवाही ने एक मासूम बच्ची की जिंदगी छीन ली और एक हंसता-खेलता परिवार हमेशा के लिए बिखर गया।
घटनास्थल पर मौजूद चश्मदीदों के मुताबिक, अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया था। जैसे ही लोगों को करंट लगने का अहसास हुआ, चीख-पुकार मच गई। गनीमत यह रही कि समय रहते मुख्य सप्लाई काट दी गई, वरना यह हादसा और भी ज्यादा भयानक रूप ले सकता था।
आगे की कार्रवाई और जांच जारी
मुंबई पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन जांच के आदेश दे दिए हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि वाटर स्टॉल लगाने की अनुमति किसने दी थी और वहां बिजली के तारों की फिटिंग में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई थी। पुलिस उन तमाम जिम्मेदार लोगों की तलाश कर रही है जिनकी इस लापरवाही के कारण दो मासूम जिंदगियां असमय काल के गाल में समा गईं।
इस हादसे ने एक बार फिर से यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान जन-सुरक्षा को सर्वोपरि रखना कितना जरूरी है। प्रशासन और पंडाल समितियों को अब और अधिक सतर्क होने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी हृदयविदारक घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।