गुलाबी नगरी जयपुर इन दिनों पूरी तरह से भगवान गणेश की भक्ति के रंग में सराबोर है। गणेश चतुर्थी और जन्मोत्सव के पावन अवसर पर सोमवार को शहर के हर कोने से गणपति बप्पा मोरया के जयकारे गूंज उठे। सुबह तड़के से ही शहर के ऐतिहासिक और प्रसिद्ध गणेश मंदिरों में श्रद्धालुओं का ऐसा तांता लगा कि आस्था का सैलाब सड़कों पर आ गया। कहीं भगवान गजानन के दुर्लभ बाल स्वरूप के दर्शन हुए, तो कहीं उनके राजसी और भव्य शृंगार ने भक्तों का मन मोह लिया। सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजामों के बीच लाखों भक्तों ने प्रथम पूज्य के चरणों में हाजिरी लगाई।
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में उमड़ी भारी भीड़, जेएलएन रोड तक पहुंची कतार
जयपुर के सबसे प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के मौके पर अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहाँ भगवान गणेश का विशेष राजसी शृंगार किया गया था। मंदिर के महंत कैलाश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि भगवान को हीरे-जड़े स्वर्ण मुकुट, नौलखा हार और अन्य कीमती आभूषण धारण कराए गए थे। चांदी के सिंहासन पर विराजे गजानन के अलौकिक स्वरूप के दर्शन के लिए सुबह करीब 5 बजे से ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं।
भीड़ इतनी अधिक थी कि भक्तों की कतार मंदिर परिसर से निकलकर सीधे जेएलएन रोड तक जा पहुंची। सुबह 5 बजे मंगला आरती के साथ शुरू हुए दर्शन का सिलसिला रात 11.40 बजे शयन आरती तक अनवरत जारी रहा। इस प्रकार श्रद्धालुओं को कुल 19 घंटे से अधिक समय तक बप्पा के दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
सुरक्षा के मोर्चे पर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। भारी भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए मंदिर परिसर में 72 नए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए जिनकी रिकॉर्डिंग 30 दिनों तक सुरक्षित रखी जाएगी। इसके अलावा, छह डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर और छह हैंड हेल्ड मेटल डिटेक्टर से सुरक्षा जांच की गई। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 100 ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक लो-फ्लोर बसों की विशेष व्यवस्था की गई थी, जबकि लगभग 500 स्वयंसेवकों ने व्यवस्था संभालने में पूरा सहयोग दिया।
सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए राज्य के डीजीपी ने भी मोतीडूंगरी मंदिर का दौरा किया और पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल के साथ मिलकर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने भी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि एवं राजस्थान की निरंतर प्रगति की मंगलकामना की।
गढ़ गणेश मंदिर में हुए दुर्लभ बाल स्वरूप के दर्शन
ब्रह्मपुरी स्थित ऐतिहासिक गढ़ गणेश मंदिर में महंत प्रदीप औदीच्य के सान्निध्य में महा गणपति जन्मोत्सव बेहद खास अंदाज में मनाया गया। इस मंदिर की अपनी एक खास और प्राचीन परंपरा है, जिसके तहत गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश के बिना सूंड और बिना वस्त्र वाले पुरुषाकृति बाल स्वरूप के दर्शन होते हैं। यह दुर्लभ रूप साल में केवल एक बार गणेश जन्मोत्सव के दिन ही भक्तों को देखने को मिलता है।
सुबह 4 बजे पंचामृत अभिषेक के बाद पत्र-पुष्प की मालाओं से बप्पा का शृंगार किया गया। बाल स्वरूप होने के कारण गणेशजी को वस्त्र धारण नहीं कराए जाते हैं। मंगला आरती के बाद सहस्र दुर्वाचन और एक हजार मोदकों का भोग अर्पित किया गया। मंगलवार को पारंपरिक मेले का आयोजन हुआ जिसके तहत भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें हिस्सा लेने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचे।
चांदपोल और बंगाली बाबा मंदिर में भी गूंजे जयकारे
शहर के चांदपोल स्थित प्राचीन परकोटा गणेश मंदिर में मंगला आरती के साथ जन्मोत्सव की शुरुआत हुई। यहाँ पंचामृत अभिषेक के बाद भगवान गणेश का सोने के वर्क से विशेष शृंगार किया गया। महंत अमित शर्मा ने बताया कि छप्पन भोग अर्पित करने के साथ ही शाम को सैकड़ों दीपकों से भव्य महाआरती की गई, जिससे पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा।
वहीं, दिल्ली रोड स्थित बंगाली बाबा गणेश मंदिर में दो दिवसीय गणेश चतुर्थी महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मुख्य संरक्षक रघुवीर शरण अग्रवाल और अध्यक्ष नारायण लाल अग्रवाल के मार्गदर्शन में यहाँ 2500 किलो लड्डुओं की विशाल प्रसादी वितरित की गई। इस महाप्रसादी को तैयार करने में 1000 किलो चीनी, 400 किलो घी और 400 किलो बेसन का इस्तेमाल किया गया, जिसे पाने के लिए भक्तों में खासा उत्साह देखा गया।
अन्य मंदिरों में भी रहे विशेष धार्मिक आयोजन
अतिप्राचीन दाहिनी सूंड़ और दक्षिणमुखी नहर के गणेशजी महाराज मंदिर में भी गणेश चतुर्थी पर भव्य आयोजन हुए। महंत पं. जय शर्मा के सान्निध्य में सुबह भगवान को राजशाही पोशाक और स्वर्ण मंडित मुकुट पहनाया गया। बैंड वादन और आतिशबाजी के बीच भक्तों ने दर्शन किए।
कनक घाटी स्थित ठिकाना मंदिर श्री गोविंद देवजी महाराज के अंतर्गत आने वाले प्राचीन मंदिर श्री सिद्धि विनायक गणेशजी में महंत अंजन कुमार गोस्वामी के सान्निध्य में पंचामृत अभिषेक हुआ। भगवान को पांच प्रकार के मोदक, फल और गुड़ का भोग लगाया गया। इसके साथ ही मुख्य ठिकाना मंदिर में ठाकुर गोविंद देवजी महाराज का भी विशेष अलंकार शृंगार कर केसरिया पोशाक धारण कराई गई।
भव्य शोभायात्रा के साथ होगा समापन
राजधानी जयपुर में चल रहे इस गणेश जन्मोत्सव का समापन 15 सितंबर को मोतीडूंगरी गणेशजी के भव्य नगर भ्रमण और शोभायात्रा के साथ होगा। यह शोभायात्रा मोतीडूंगरी गणेश मंदिर से रवाना होकर एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड से गुजरते हुए गढ़ गणेश मंदिर पहुँचेगी, जहाँ इस दस दिवसीय महाउत्सव का विधिवत समापन संपन्न होगा।