उत्तर प्रदेश के करोड़ों नागरिकों के लिए राजस्व संबंधी कार्यों को अब बेहद आसान और पारदर्शी बना दिया गया है। तकनीक के जरिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राज्य सरकार ने कई महत्वपूर्ण डिजिटल पहलों की शुरुआत की है। अब आम जनता को छोटे-छोटे प्रमाण पत्रों और भूमि से जुड़े दस्तावेजों के लिए तहसीलों के अंतहीन चक्कर काटने से मुक्ति मिलने जा रही है। राजस्व परिषद द्वारा शुरू की गई इन नई डिजिटल व्यवस्थाओं से न केवल समय की बचत होगी, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी। आइए जानते हैं कि इन नई डिजिटल सुविधाओं से आम नागरिकों को क्या-क्या लाभ मिलने वाले हैं।
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के लिए अब ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के नागरिकों के लिए आय और संपत्ति का यह प्रमाणपत्र बनवाना अक्सर एक लंबी और थकाऊ प्रक्रिया माना जाता था। अक्सर लोगों को तहसील और दफ्तरों के कई चक्कर लगाने पड़ते थे। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हुए राजस्व परिषद ने एक समर्पित ईडब्ल्यूएस पोर्टल का शुभारंभ किया है। इस पोर्टल के माध्यम से अब कोई भी पात्र नागरिक घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकता है।
इस नई डिजिटल व्यवस्था के तहत आवेदन सीधे ऑनलाइन माध्यम से संबंधित लेखपाल और फिर तहसीलदार स्तर तक पहुंचता है और वहीं से इसका निस्तारण भी किया जाता है। आवेदक घर बैठे अपने मोबाइल या कंप्यूटर के जरिए यह ट्रैक कर सकता है कि उसका आवेदन वर्तमान में किस अधिकारी के पास लंबित है और उसकी स्थिति क्या है। डिजिटल ट्रैकिंग होने के कारण पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही तय हुई है और अनावश्यक देरी पर भी रोक लगी है।
सरलीकृत खतौनी से भूमि अभिलेखों को समझना हुआ आसान
भूमि रिकॉर्ड और खतौनी को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर विवाद और असमंजस की स्थिति बनी रहती है। आम आदमी के लिए राजस्व दस्तावेजों की भाषा और उनकी पेचीदगियों को समझना कठिन होता है। इस बाधा को दूर करने के लिए सरकार ने 'सरलीकृत खतौनी' की अवधारणा को जमीन पर उतारा है। इसके तहत भूमि अभिलेखों को अत्यधिक स्पष्ट, सहज और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है।
सरलीकृत खतौनी की मुख्य विशेषताओं में भूमि के क्षेत्रफल को छह दशमलव स्थानों तक प्रदर्शित करना शामिल है, जिससे जमीन के माप में जरा भी संदेह की गुंजाइश नहीं बचती। इसके अलावा, अभिलेखागार से जुड़े पुराने आदेशों और पुराने बंधक (Mortgage) आदेशों की जानकारी को भी अब व्यवस्थित रूप से डिजिटल रिकॉर्ड में जोड़ा गया है। इससे न केवल आम नागरिकों को अपनी जमीन का इतिहास समझने में आसानी होगी, बल्कि राजस्व अधिकारियों को भी पुराने दस्तावेजों की खोजबीन करने में भारी सहूलियत मिलेगी।
धारा 116 के तहत भूमि विभाजन की प्रक्रिया अब पूरी तरह डिजिटल
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के अंतर्गत सह-खातेदारों द्वारा भूमि के विभाजन के लिए वाद दायर किए जाते हैं। इन मामलों में अक्सर सालों लग जाते थे और अदालतों व तहसीलों के चक्कर काटने पड़ते थे। अब इस पूरी प्रक्रिया को भी तकनीक के दायरे में लाते हुए एक नया अत्याधुनिक पोर्टल शुरू किया गया है।
इस पोर्टल के जरिए नागरिक भूमि विभाजन के लिए ऑनलाइन वाद या आवेदन दर्ज करा सकते हैं। इसके बाद नोटिस जारी करने और उद्घोषणा की प्रक्रिया भी डिजिटल माध्यम से ही संचालित और मॉनिटर की जाती है। मामले से जुड़े संबंधित लेखपाल की रिपोर्ट सीधे पोर्टल पर अपलोड की जाती है। सबसे खास बात यह है कि भूमि की वास्तविक भौगोलिक स्थिति और सीमा तय करने के लिए मानचित्र की सुविधा भी जोड़ी गई है, जिससे मौके की स्थिति और न्यायिक कार्यवाही के बीच बेहतरीन तालमेल बैठता है। इससे भूमि विवाद और विभाजन के मामलों का निपटारा बेहद कम समय में और पूरी पारदर्शिता के साथ हो सकेगा।
प्रशासनिक व्यवस्था में संवेदनशीलता और तकनीक का अनूठा मेल
राजस्व परिषद की उच्चाधिकारियों की बैठकों और वार्ताओं में इस बात पर विशेष बल दिया गया है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल डिजिटलाइजेशन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका मूल उद्देश्य आम आदमी के जीवन को सुगम बनाना होना चाहिए। राजस्व प्रशासन का सीधा नाता आम जनता की जमीन और उनके अधिकारों से जुड़ा होता है, इसलिए अधिकारियों को संवेदनशीलता, निष्पक्षता और जनसेवा की भावना के साथ काम करने की हिदायत दी गई है।
प्रशासनिक तंत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए युवा और नए अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों से रूबरू कराया जा रहा है। रोवर तकनीक जैसी आधुनिक प्रणालियों के जरिए सटीक भूमि मापन और मैपिंग का प्रदर्शन किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में भूमि विवादों की जड़ को ही समाप्त किया जा सके। उत्तर प्रदेश सरकार की ये डिजिटल पहलें भ्रष्टाचार पर लगाम कसने और नागरिकों को सशक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रही हैं।
