राजस्थान की राजधानी जयपुर में सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को उजागर करने पहुंची 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की टीम पर हुआ कथित हमला अब राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। इस घटना के बाद से सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। इस विवाद ने केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। एक तरफ जहां कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भजनलाल सरकार पर तीखे हमले किए हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी ने CJP के तौर-तरीकों और उनकी मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
रामपुरा कंवरपुरा स्कूल की घटना से भड़की सियासत
यह पूरा विवाद जयपुर के रामपुरा कंवरपुरा स्थित एक सरकारी स्कूल से शुरू हुआ। CJP के कार्यकर्ता और वॉलंटियर्स सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत, जर्जर इमारतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी का जायजा लेने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां कुछ लोगों के साथ उनकी तीखी झड़प हुई और कथित तौर पर हमला किया गया। आरोप है कि इस दौरान कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई, उनके कपड़े फाड़े गए और उनकी गाड़ियों के शीशे तक तोड़ दिए गए। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद से ही सूबे की सियासत गरमाई हुई है।
सचिन पायलट का तीखा हमला: 'सच्चाई छिपा रही है सरकार'
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधायक सचिन पायलट ने इस पूरी घटना की कड़ी निंदा की है। उन्होंने राज्य सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए तानाशाही रवैया अपना रही है।
"लोगों, युवाओं और छात्रों में गुस्सा है, लेकिन राजस्थान सरकार इसे दबाने की कोशिश कर रही है। सरकार ने अब एक नया आदेश जारी किया है, जिसके तहत पत्रकार या अन्य कोई शख्स बिना इजाजत के स्कूलों में नहीं जा सकते, तस्वीरें नहीं ले सकते या रिपोर्ट नहीं छाप सकते। वे अपनी नाकामियों को छिपाकर रखना चाहते हैं। सरकारी स्कूलों की खराब हालत, बिगड़ता इंफ्रास्ट्रक्चर और जर्जर इमारतों की सच्चाई सरकार छिपाना चाहती है।" - सचिन पायलट, कांग्रेस नेता
पायलट का इशारा सरकार द्वारा हाल ही में स्कूलों में बिना अनुमति के प्रवेश और वीडियोग्राफी पर रोक लगाने वाले कथित आदेश की तरफ था। उनका कहना है कि इस तरह के आदेश लोकतंत्र की आवाज का गला घोंटने के समान हैं।
मंत्री अविनाश गहलोत का पलटवार: 'अवस्था फैलाना CJP का काम'
विपक्ष के इन तमाम आरोपों पर पलटवार करते हुए राजस्थान सरकार के मंत्री अविनाश गहलोत ने CJP की कार्यशैली पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार राज्य में किसी भी तरह की अराजकता को बर्दाश्त नहीं करेगी।
मंत्री अविनाश गहलोत ने कहा, "देखिए, किसी भी स्कूल के कामकाज में बेवजह रुकावट डालना सही नहीं है। आप लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख सकते हैं, लेकिन अगर आप स्कूल में घुसकर कामकाज में बाधा डालेंगे, तो जनता क्या करेगी? जनता ही इस राज्य और देश की असली मालिक है। लेकिन CJP का काम ही अव्यवस्था फैलाना है। CJP के कुछ लोग राजस्थान में अशांति फैलाने की कोशिश भी कर रहे हैं। हम राजस्थान में किसी भी तरह की अव्यवस्था नहीं फैलने देंगे।"
अरुणाचल से लेकर दिल्ली तक गूंज: अरविंद केजरीवाल का एक्स पोस्ट
इस पूरे मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी कूद पड़े हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए बीजेपी पर सीधा निशाना साधा है।
केजरीवाल ने अपने पोस्ट में लिखा कि CJP के कार्यकर्ताओं के साथ यह हिंसा इसलिए की गई ताकि वे बच्चों की शिक्षा और स्कूलों की बदहाली के खिलाफ आवाज न उठा सकें। उन्होंने सवाल किया कि आखिर देश में यह सब क्या हो रहा है? 'आप' संयोजक ने तंज कसते हुए कहा कि अगर राज्य के बच्चे पढ़-लिख जाएंगे, तो इससे बीजेपी को क्या परेशानी है और पार्टी क्यों चाहती है कि बच्चे अनपढ़ रहें?
शिक्षा व्यवस्था बनाम राजनीति: आगे क्या?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर से इस गंभीर सवाल को जन्म दे दिया है कि क्या सरकारी स्कूलों की बदहाली को सुधारने के बजाय उस पर राजनीति करना ज्यादा आसान हो गया है? एक तरफ जहां जर्जर इमारतों और शिक्षकों की कमी जैसी बुनियादी समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दल एक-दूसरे को घेरने में व्यस्त हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के विवादों से बच्चों की पढ़ाई और स्कूलों का माहौल बुरी तरह प्रभावित होता है। सरकार को जहां एक तरफ सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत है, वहीं विपक्ष का यह दायित्व है कि वह रचनात्मक सुझाव दे। हालांकि, इस ताजा विवाद ने राजस्थान की राजनीति का पारा लंबे समय के लिए बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा के पटल पर भी जोर-शोर से उठने के पूरे आसार हैं।