हिमाचल प्रदेश की राजनीति में इन दिनों करों और शुल्कों को लेकर सियासी पारा सातवें आसमान पर है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मौजूदा सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक कड़े बयान में आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार प्रदेश की जनता को राहत देने के बजाय केवल 'शुल्क' वसूलने का काम कर रही है।
'सुख' के नाम पर 'शुल्क' का खेल: जयराम ठाकुर
जयराम ठाकुर ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि जब से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार सत्ता में आई है, तब से आम जनता की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सरकार आए दिन नए-नए कर और सेस थोप रही है, जिससे हर वर्ग का जीना मुहाल हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिस सरकार को 'सुख की सरकार' कहा जा रहा था, वह असल में 'शुल्क की सरकार' बनकर रह गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार को जनता की परेशानियों से कोई सरोकार नहीं है। बिना किसी दूरदर्शिता और पर्याप्त विचार-विमर्श के जनता पर लगातार आर्थिक बोझ लादा जा रहा है। यही वजह है कि राज्य के आम नागरिक से लेकर उद्योगपति तक त्रस्त हैं।
हाईकोर्ट की फटकार का भी दिया हवाला
अपने आरोपों को पुख्ता करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने न्यायपालिका की टिप्पणियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि:
- सरकार द्वारा उद्योगों पर लगाए गए मनमाने करों को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया है।
- हाईकोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कराधान (Taxation) के मामलों में संवेदनशीलता और विवेक का इस्तेमाल करने की सख्त सलाह दी है।
- न्यायपालिका की यह टिप्पणी इस बात का प्रमाण है कि सरकार के फैसले जनहित में नहीं हैं।
पेट्रोल और डीजल पर सेस को लेकर सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
जयराम ठाकुर ने ईंधन के दामों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सुक्खू सरकार अपने कार्यकाल में पहले ही दो बार डीजल पर वैट बढ़ा चुकी है। अब ताजा आदेशों के तहत पेट्रोल और डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का अतिरिक्त सेस लगा दिया गया है।
उन्होंने सदन के भीतर के वाकये को याद दिलाते हुए बड़ा आरोप लगाया, "जब विधानसभा में इस प्रावधान पर चर्चा हो रही थी, तब मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया था कि यह केवल एक वैधानिक प्रावधान है और इसे तुरंत लागू नहीं किया जाएगा। लेकिन सरकार ने अपने वादे से मुकरते हुए इसे लागू कर दिया, जो जनता के साथ सीधा धोखा है।"
पहाड़ी राज्य में परिवहन और महंगाई पर पड़ेगा गहरा असर
हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक स्थिति का हवाला देते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि यह एक पहाड़ी राज्य है, जहां की पूरी आपूर्ति और परिवहन व्यवस्था मुख्य रूप से सड़क मार्गों पर टिकी हुई है। ऐसे में पेट्रोल और डीजल पर कर बढ़ने का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (परिवहन लागत) पर पड़ेगा।
जब ढुलाई महंगी होगी, तो बाजार में रोजमर्रा की हर जरूरत की चीजें स्वतः महंगी हो जाएंगी। पहले से ही महंगाई की मार झेल रही आम जनता के लिए यह फैसला किसी बड़े झटके से कम नहीं है।
अनाथ एवं विधवा सेस पर भी उठाए सवाल
सरकार द्वारा वसूले जा रहे विभिन्न सेस पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि 'अनाथ एवं विधवा सेस' के नाम पर भी जनता की जेब पर अतिरिक्त डाका डाला जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य केवल और केवल राजस्व (Revenue) जुटाना रह गया है, चाहे इसके लिए आम आदमी की कमर ही क्यों न टूट जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से पुरजोर आग्रह किया कि जनता पर लगातार आर्थिक बोझ डालने वाली इस दमनकारी नीति को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए, ताकि प्रदेश के लोगों को थोड़ी राहत मिल सके।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: जयराम ठाकुर ने मौजूदा हिमाचल सरकार पर क्या मुख्य आरोप लगाया है?
Ans: नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया है कि सुक्खू सरकार 'सुख' देने के बजाय जनता पर लगातार नए कर और शुल्क थोप रही है, जिससे आम जीवन कठिन हो गया है।
Q2: पेट्रोल और डीजल पर कितना सेस बढ़ाया गया है?
Ans: सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर 60 पैसे प्रति लीटर का अतिरिक्त सेस लागू किया है, जिसका सीधा असर परिवहन लागत और महंगाई पर पड़ेगा।
Q3: अदालतों का इस मामले में क्या रुख रहा है?
Ans: हाईकोर्ट ने उद्योगों पर लगाए गए कुछ मनमाने करों को लेकर सरकार को फटकार लगाई है और कराधान में विवेक तथा संवेदनशीलता बरतने की सलाह दी है।