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भारत-कनाडा संबंधों में ऐतिहासिक मोड़: जयशंकर और अनीता आनंद की न्यूयॉर्क में बड़ी बैठक

भारत-कनाडा संबंधों में ऐतिहासिक मोड़: जयशंकर और अनीता आनंद की न्यूयॉर्क में बड़ी बैठक

कूटनीतिक गलियारों से इस वक्त एक बेहद अहम और बड़ी खबर सामने आ रही है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के बीच एक उच्चस्तरीय मुलाकात हुई है। इस बैठक ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि दोनों देश अपने आपसी संबंधों को एक बिल्कुल नए और ऊंचे पायदान पर ले जाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। हाल के महीनों में जिस प्रकार से दोनों देशों के बीच राजनैतिक और आर्थिक दूरियां कम हुई हैं, उसके बाद इस मुलाकात को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सोशल मीडिया पर साझा की गई मुलाकात की झलकियां

बैठक के तुरंत बाद, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) के जरिए इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मिलकर उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई और दोनों के बीच क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर काफी सार्थक एवं सकारात्मक बातचीत हुई। जयशंकर ने अपने पोस्ट में साफ तौर पर यह रेखांकित किया कि अब समय आ गया है जब भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों को एक नए स्तर पर पहुंचाया जाए। इस पोस्ट के साथ उन्होंने कुछ तस्वीरें और एक संक्षिप्त वीडियो भी साझा किया, जिसने कूटनीतिक जानकारों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

यद्यपि दोनों ही पक्षों की ओर से बैठक के तुरंत बाद किसी नए आधिकारिक समझौते की विस्तृत सूची जारी नहीं की गई है, लेकिन कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संवाद आने वाले दिनों में कई बड़े फैसलों की नींव साबित होगा। हाल ही में दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्कों में तेजी आई है, जिसे व्यापार, ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, रक्षा सुरक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में ठोस समझौतों में बदलने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

बदलते समीकरण और रिश्तों में आया नया दौर

पिछले एक साल के भीतर भारत और कनाडा के रिश्तों की तस्वीर में एक क्रांतिकारी बदलाव आया है। एक समय जो रिश्ते तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे थे, वे अब संवाद और सहयोग की मजबूत पटरी पर लौट आए हैं। दोनों देशों ने कूटनीतिक स्तर पर संवाद के उन दरवाजों को फिर से खोल दिया है, जो लंबे समय से बंद या सीमित थे। आर्थिक और रणनीतिक मोर्चे पर आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं तैयार की गई हैं, जिससे दोनों देशों के व्यापारिक समुदायों में भी एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है।

अगर बीते घटनाक्रम पर नजर डालें तो अक्टूबर 2025 में कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद की भारत यात्रा के दौरान ही दोनों देशों ने एक साझा रोडमैप की रूपरेखा तैयार कर ली थी। उस यात्रा ने दोनों मुल्कों के बीच आपसी भरोसे को बहाल करने में एक उत्प्रेरक (catalyst) का काम किया था। इसके बाद, इस साल की शुरुआत में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत का दौरा किया, जहां उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऐतिहासिक और दूरगामी बैठकें हुईं।

व्यापार और रणनीतिक साझेदारी का बड़ा एजेंडा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच हुई उस उच्चस्तरीय बैठक में दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को भविष्य के लिए तैयार करने का एक बड़ा एजेंडा तय किया था। इस एजेंडे का मुख्य केंद्र सुरक्षा, रक्षा सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नए आयाम देना था। दोनों नेताओं ने वर्ष 2026 के अंत तक कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर चल रही वार्ताओं को हर हाल में पूरा करने की अपनी दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति दोहराई है।

2030 तक 70 अरब डॉलर व्यापार का महत्वाकांक्षी लक्ष्य

कनाडा सरकार की ओर से लगातार यह बात कही जा रही है कि इस प्रस्तावित व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) का मूल उद्देश्य वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 70 अरब डॉलर के जादुई आंकड़े तक पहुंचाना है। इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दोनों ही देशों की सरकारें अपनी नीतियों को व्यापार-अनुकूल बना रही हैं।

  • पारंपरिक और डिजिटल व्यापार: वस्तुओं के साथ-साथ सेवाओं के आदान-प्रदान और डिजिटल इकॉनमी पर विशेष जोर।
  • कृषि और खाद्य प्रसंस्करण: कृषि उत्पादों की सप्लाई चेन को मजबूत करना और बाजार तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना।
  • मानव संसाधन और आवाजाही: स्किल्ड प्रोफेशनल्स और छात्रों के लिए वीजा नियमों और गतिशीलता (mobility) को सरल बनाना।
  • टिकाऊ विकास: पर्यावरण के अनुकूल और सतत विकास (sustainable development) के मॉडल पर मिलकर काम करना।

रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी और यूरेनियम समझौता

इस पूरे आर्थिक और कूटनीतिक ताने-बाने में ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) का मुद्दा सबसे ऊपर है। भारत और कनाडा ने हाल ही में एक व्यापक रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी की भी घोषणा की है। इसके तहत लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG), एलपीजी (LPG), सौर ऊर्जा, हाइड्रोजन और महत्वपूर्ण खनिजों के व्यापार को बढ़ाने पर सहमति बनी है।

इस ऊर्जा साझेदारी के तहत सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि लगभग 2.6 अरब डॉलर का वह भारी-भरकम सौदा है, जिसके जरिए कनाडा की प्रतिष्ठित कंपनी 'कैमेको' (Cameco) वर्ष 2027 से 2035 के बीच भारत को परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए करीब 2.2 करोड़ पाउंड यूरेनियम की निर्बाध सप्लाई करेगी। यह समझौता न केवल भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होगा, बल्कि दोनों देशों के बीच तकनीकी और वैज्ञानिक विश्वास की पराकाष्ठा को भी दर्शाता है।

भविष्य की संभावनाएं और ग्लोबल कूटनीति

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की न्यूयॉर्क में हुई यह मुलाकात इस बात का प्रमाण है कि भारत अपनी विदेश नीति में आर्थिक हितों और रणनीतिक स्वायत्तता को सर्वोपरि रखते हुए आगे बढ़ रहा है। कनाडा के साथ मजबूत होते ये रिश्ते न केवल उत्तर अमेरिकी महाद्वीप में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करेंगे, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) को भी स्थिरता प्रदान करेंगे।

आने वाले महीनों में जब दोनों देशों के अधिकारी CEPA समझौते के अंतिम प्रारूप को तैयार करने के लिए बैठेंगे, तो पूरी दुनिया की निगाहें नई दिल्ली और ओटावा पर टिकी होंगी। फिलहाल, यूएनजीए के मंच से जो संकेत मिले हैं, वे यह बताने के लिए काफी हैं कि भारत और कनाडा के बीच कूटनीति का यह नया अध्याय मील का पत्थर साबित होने वाला है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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