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जमुई जमीन घोटाला: जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी और पति पर FIR, CO समेत 3 गिरफ्तार

जमुई जमीन घोटाला: जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी और पति पर FIR, CO समेत 3 गिरफ्तार

बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में उस وقت सनसनी फैल गई जब एक बड़े भूमि घोटाले का पर्दाफाश हुआ। मामला राज्य के जमुई जिले के सिकंदरा इलाके का है, जहां सरकारी कृषि फार्म की लगभग 10 एकड़ बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा करने और उसकी फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराने का गंभीर मामला सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी और उनके पति सह भू-माफिया गुड्डु यादव समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इस कार्रवाई से इलाके के भू-माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

EOU की जांच में हुआ बड़ा खुलासा, 14 फर्जी दस्तावेज बरामद

आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की शुरुआती और गहरी छानबीन में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। जांच के दौरान यह पता चला कि मुख्य आरोपी गुड्डु यादव और जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी के सगे-सम्बन्धियों तथा उनके गिरोह के अन्य गुर्गों के नाम पर कुल 14 निबंधित दस्तावेज (Registered Documents) तैयार किए गए थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल करके सरकारी जमीन को निजी संपत्ति के रूप में दिखाने की घिनौनी साजिश रची गई थी।

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि इन 14 दस्तावेजों में से तीन दस्तावेजों के जरिए अकेले दुलारी देवी के नाम पर ही करीब 7 एकड़ जमीन की खरीद दिखाई गई है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस जमीन की यह खरीद उस समय के तय सरकारी मूल्य से भी काफी कम कीमत पर दिखाई गई थी, जिससे साफ पता चलता है कि किस तरह सुनियोजित तरीके से सरकारी संपत्ति को चूना लगाया जा रहा था।

अधिकारियों की मिलीभगत से रची गई साजिश

किसी भी बड़े सरकारी जमीन घोटाले में बिना अंदरूनी मदद के खेल होना नामुमकिन होता है। इस मामले में भी सिकंदरा अंचल कार्यालय के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता पूरी तरह उजागर हुई है। EOU की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे फर्जीवाड़े को अंजाम देने में सिकंदरा अंचल के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी छोटेलाल यादव, तत्कालीन अंचलाधिकारी (CO) विनोद कुमार चौधरी, तत्कालीन राजस्व पदाधिकारी निभा कुमारी और मुकेश कुमार वर्णवाल ने मुख्य आरोपियों की पूरी मदद की थी।

इन भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत का ही नतीजा था कि 8 जनवरी 2019 को इस जमीन के खेसरा संख्या 154 और 156 का अवैध तरीके से दाखिल-खारिज (Mutation) भी करवा लिया गया। हालांकि, स्थानीय जागरूक लोगों ने जब इस धांधली का विरोध किया और कड़ी आपत्ति दर्ज कराई, तो बाकी बचे दस्तावेजों के आधार पर होने वाले म्यूटेशन को तमाम स्तरों पर अस्वीकृत कर दिया गया, जिससे एक बड़ा हिस्सा अवैध होने से बच गया.

सैकड़ों साल पुराने फर्जी कागजात किए गए तैयार

जांच में यह भी पता चला कि कृषि विभाग ने साल 1959 में इस कृषि फार्म की जमीन को अपने नाम अधिग्रहित किया था। कानूनी रूप से यह पुख्ता तौर पर सरकार की संपत्ति थी। बावजूद इसके, आरोपियों ने जमीन पर अपना मालिकाना हक जताने के लिए ब्रिटिश काल के दस्तावेजों का सहारा लिया। आरोप है कि गिरोह ने अंचल कार्यालय के भ्रष्ट कर्मियों के साथ मिलकर साल 1924 और 1927 के जाली कागजात तैयार किए।

इन फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी भूमि को अपने और अपने सहयोगियों के नाम पर खरीद कर उसका म्यूटेशन तक करा लिया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंगेर के अवर निबंधक और सिकंदरा के अंचलाधिकारी की ओर से भी विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसमें स्पष्ट रूप से यह पुष्टि की गई कि 1924 और 1927 के नाम पर पेश किए गए सभी कागजात पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत हैं।

छापेमारी के बाद ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां

तथ्यों के पुख्ता होने के बाद आर्थिक अपराध इकाई ने कड़ा कदम उठाया है। मंगलवार को EOU थाने में गुड्डु यादव, उनकी पत्नी दुलारी देवी, गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ-साथ तत्कालीन अंचल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज किया गया। इसके तुरंत बाद पुलिस टीमों ने कई ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी।

इस कार्रवाई के दौरान प्राथमिक अभियुक्त और सिकंदरा के तत्कालीन राजस्वकर्मी छोटेलाल यादव के साथ-साथ सिकंदरा क्षेत्र के ही रहने वाले प्रदीप चौधरी और जवाहर प्रसाद यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में शामिल अन्य सरकारी पदाधिकारियों और दलालों की भूमिका की भी बारिकी से जांच की जा रही है। साक्ष्य मिलने पर उनके खिलाफ भी शिकंजा कसा जाएगा।

कमजोर और असहाय लोगों की जमीन हड़पने का पुराना है पैंतरा

सूत्रों और EOU की जांच से यह भी बात सामने आई है कि गुड्डु यादव और दुलारी देवी का यह पूरा गिरोह सिर्फ सरकारी जमीन तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इनका नेटवर्क काफी फैला हुआ था। इसी साल जुलाई महीने में भी इस गिरोह के ठिकानों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें जमीन की अवैध खरीद-बिक्री के कई बड़े राज खुले थे। इस संबंध में 27 जुलाई को आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 14/26 दर्ज कर पहले से ही कानूनी प्रक्रिया चल रही है।

जांच में यह बात भी उजागर हुई कि यह गिरोह समाज के कमजोर और असहाय वर्ग के लोगों को निशाना बनाता था। किसी साधारण व्यक्ति की जमीन पर तीसरे व्यक्ति को खड़ा करके उसे कानूनी विवादों में उलझा दिया जाता था। जब जमीन विवादित हो जाती थी, तो आरोपी उसे बहुत ही कम दामों में खरीद लेते थे और बाद में उसी जमीन को ऊंचे दामों पर बेचकर अवैध रूप से अकूत संपत्ति बनाते थे।

प्रशासन का कड़ा रुख

बिहार सरकार और आर्थिक अपराध इकाई की इस सख्त कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार और सरकारी संपत्तियों पर अवैध कब्जा करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। चाहे कोई राजनीतिक रसूख वाला व्यक्ति हो या फिर पद का दुरुपयोग करने वाला कोई सरकारी अधिकारी, कानून का शिकंजा सभी पर कसना तय है। जमुई के इस बहुचर्चित जमीन घोटाले में आगे और भी कई बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है, क्योंकि पुलिस और EOU की टीमें लगातार इस सिंडिकेट की जड़ों को खंगालने में जुटी हुई हैं।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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