उत्तर प्रदेश की सिविल सेवा परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) की प्रतिष्ठित प्रांतीय सिविल सेवा यानी PCS-2025 और सहायक अभियोजन अधिकारी यानी APO-2025 भर्ती परीक्षाओं को लेकर एक बड़ा और कड़ा अंतरिम आदेश पारित किया है। इस आदेश के बाद से प्रशासनिक गलियारों और छात्रों के बीच हलचल तेज हो गई है।
हाईकोर्ट का अंतरिम आदेश: क्या है ताजा स्थिति?
न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की एकलपीठ ने हाल ही में कई महत्वपूर्ण याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। अदालत ने अपने इस अहम फैसले में साफ कर दिया है कि जब तक इन याचिकाओं का पूरी तरह से निस्तारण (Disposal) नहीं हो जाता, तब तक आयोग PCS-2025 का अंतिम परिणाम (Final Result) जारी नहीं कर सकेगा। ठीक इसी तरह, APO-2025 की मुख्य परीक्षा का परिणाम भी अगली सुनवाई और अदालती फैसले तक सुरक्षित रख लिया गया है।
हालांकि, राहत की बात यह है कि PCS-2025 के तहत चल रही साक्षात्कार (Interview) प्रक्रिया पर किसी तरह की रोक नहीं लगाई गई है। यानी इंटरव्यू का दौर अपने तय शेड्यूल के मुताबिक जारी रहेगा, लेकिन सफल उम्मीदवारों की फाइनल मेरिट लिस्ट और चयन सूची पर अदालत की तलवार लटकी रहेगी।
आखिर क्या है पूरा विवाद? एमआरसी (MRC) समायोजन का पेंच
इस पूरे कानूनी विवाद की जड़ मेधावी आरक्षित वर्ग यानी 'Meritorious Reserved Category' (MRC) के अभ्यर्थियों के समायोजन से जुड़ी हुई है। विवाद की शुरुआत तब हुई जब याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रारंभिक परीक्षा (Preliminary Exam) के परिणामों में नियमों की अनदेखी की गई है।
याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने अदालत को बताया कि आरक्षित श्रेणियों (जैसे OBC और EWS) के कई ऐसे मेधावी छात्र थे, जिन्होंने सामान्य वर्ग (Unreserved Category) की कटऑफ से कहीं अधिक अंक प्राप्त किए थे। इसके बावजूद, उन्हें जनरल कैटेगरी की मेरिट लिस्ट में जगह नहीं दी गई, जो कि सीधे तौर पर नियमों के खिलाफ है।
किन नियमों को दी गई है चुनौती?
मुकदमे के दौरान याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के 9 जनवरी 2020 के उस कार्यालय ज्ञापन और विज्ञापन संख्या-19 की व्यवस्था को सीधे तौर पर चुनौती दी है, जिसके तहत ओबीसी और ईडब्ल्यूएस के एमआरसी अभ्यर्थियों को अनारक्षित श्रेणी में नहीं गिना जा रहा है।
कानूनी पक्षों का तर्क है कि यदि कोई आरक्षित वर्ग का अभ्यर्थी बिना किसी विशेष छूट या रिलैक्सेशन के सामान्य वर्ग के कटऑफ अंक से ज्यादा अंक हासिल करता है, तो उसे ओपन मेरिट (खुली प्रतिस्पर्धा) में शामिल किया जाना चाहिए। ऐसा न करना उत्तर प्रदेश लोक सेवा आरक्षण अधिनियम-1994 की धारा 3(6) के साथ-साथ संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के मूल अधिकार का भी खुला उल्लंघन है।
अदालत ने आयोग से मांगा अंकों का पूरा रिकॉर्ड
मामلت की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) से कड़ा रुख अपनाते हुए जवाब तलब किया है। अदालत ने आयोग को निर्देश दिया है कि वह उन सभी आरक्षित अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों और सभी श्रेणियों की कटऑफ का आधिकारिक रिकॉर्ड कोर्ट के सामने पेश करे, जिन्होंने सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों से ज्यादा अंक हासिल किए हैं।
इसके साथ ही, अदालत ने सभी संबंधित पक्षों को एक सप्ताह के भीतर अपनी लिखित बहस (Written Submission) दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है ताकि इस मामले में आगे की दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।
कौन-कौन सी याचिकाएं हैं शामिल?
इस कानूनी लड़ाई में केवल PCS-2025 ही नहीं, बल्कि अन्य जुड़ी हुई परीक्षाएं भी शामिल हैं:
- PCS-2025 मामला: यह मुख्य याचिका संजय कुमार और तीन अन्य उम्मीदवारों द्वारा दाखिल की गई है।
- APO-2025 मामला: सहायक अभियोजन अधिकारी की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 30 अप्रैल को घोषित किया गया था, जिसे पंकज वर्मा व दो अन्य ने चुनौती दी है।
- PCS-2024 मामला: इस पुरानी भर्ती से जुड़ी याचिका आशीष कुमार मौर्य और चार अन्य ने दायर की थी, जिसे भी इस सुनवाई के दायरे में रखा गया है।
खास बात यह है कि इस मामले में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पहले से चयनित कुछ अभ्यर्थियों को भी पक्षकार बनाया गया है ताकि सभी पक्षों की दलीलों को समान अवसर मिल सके।
दिग्गज वकीलों ने रखी अपनी बात
इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में वकीलों की बड़ी फौज नजर आई। PCS-2024 के मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे और सिद्धार्थ खरे ने अपनी दलीलें रखीं। वहीं, PCS-2025 की तरफ से अधिवक्ता दुर्गा शंकर शुक्ला और अभिषेक शुक्ला ने पक्ष रखा। APO मामले की पैरवी अधिवक्ता अनुराग त्रिपाठी ने की।
दूसरी ओर, राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल और गौरव सिंह अदालत में मौजूद रहे। चयनित अभ्यर्थियों की ओर से प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता अमित सक्सेना ने पैरवी करते हुए अपना पक्ष मजबूती से रखा।
छात्रों के लिए इसका क्या मतलब है?
जो अभ्यर्थी इस साल UPPSC PCS-2025 की परीक्षा में शामिल हुए हैं और इंटरव्यू की तैयारी कर रहे हैं, उनके लिए यह मिला-जुला समय है। हालांकि साक्षात्कार प्रक्रिया पर रोक नहीं है, जिससे प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, लेकिन अंतिम परिणाम के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जब तक हाईकोर्ट इन याचिकाओं पर अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देता, तब तक चयनित होने वाले अधिकारियों के नाम सामने नहीं आएंगे।
यह मामला एक बार फिर से आरक्षित वर्गों के समायोजन और कटऑफ नीति जैसे संवेदनशील विषयों को केंद्र में ले आया है। आने वाले दिनों में अदालत के रुख पर पूरे प्रदेश के लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी रहेंगी।