छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक बेहद मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। यहां रोजी-रोटी की तलाश में निकले एक मजदूर दंपती को उस वक्त अपनी जान के लाले पड़ गए, जब वे अनजाने में लापरवाही का शिकार हो गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक खेत या कार्यस्थल के पास से गुजर रही 11 हजार वोल्ट (11 केवी) की हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में यह दंपती आ गया। इस भीषण हादसे में पति की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से झुलस गई है, जिसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कैसे हुआ यह भयानक हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों से मिली शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, यह घटना जिले के एक ग्रामीण इलाके की है जहाँ पीड़ित दंपती रोजाना की तरह अपनी मजदूरी करने गया था। काम के दौरान ही उनका ध्यान अचानक ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन पर नहीं गया या फिर कोई तार टूटकर नीचे लटका हुआ था जिसकी चपेट में वे आ गए। 11 केवी जैसी उच्च क्षमता वाली लाइन का करंट इतना खतरनाक होता है कि जरा सी चूक भी जानलेवा साबित हो जाती है।
जैसे ही करंट का झटका दंपती को लगा, वहां चीख-पुकार मच गई। आसपास मौजूद अन्य मजदूरों और ग्रामीणों ने तुरंत अपनी सूझबूझ दिखाते हुए बिजली आपूर्ति बंद करवाने का प्रयास किया और किसी तरह दोनों को करंट की चपेट से अलग किया। तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पति की मौके पर ही मौत, पत्नी की हालत नाजुक
हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि पति ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसके शरीर के कई हिस्से बुरी तरह झुलस गए हैं। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने पति को मृत घोषित कर दिया। घायल पत्नी का इलाज फिलहाल गहन चिकित्सा कक्ष (ICU) में जारी है और डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
प्रशासन और बिजली विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
इस दुखद घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि खेतों और रिहायशी इलाकों के पास से गुजरने वाली हाईटेंशन बिजली लाइनों का रखरखाव ठीक से नहीं किया जाता है। कई बार विभाग को लटके हुए तारों या नीचे झूलती लाइनों की शिकायत भी की जाती है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
- सुरक्षा मानकों की अनदेखी: ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली के तारों का जमीन से बहुत कम ऊंचाई पर होना हमेशा से बड़े हादसों को न्योता देता रहा है।
- विभाग की लापरवाही: स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते बिजली विभाग ने ढीले तारों को ठीक कर लिया होता, तो शायद आज यह कीमती जान नहीं जाती।
- दंपती की आर्थिक स्थिति: पीड़ित परिवार बेहद गरीब तबके से ताल्लुक रखता है, जो रोजाना की मजदूरी पर अपने परिवार का पेट पालता था। इस हादसे ने परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ कर रख दी है।
पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने मृतक के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मर्ग कायम कर लिया गया है और इस पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस लापरवाही के लिए असल में कौन जिम्मेदार है। क्या यह कोई तकनीकी फॉल्ट था या फिर किसी की व्यक्तिगत लापरवाही, इन तमाम पहलुओं पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जांच कर रहे हैं।
गरीब परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
दिहाड़ी मजدूरी करके दो जून की रोटी कमाने वाले इस परिवार के लिए यह आपदा किसी वज्रपात से कम नहीं है। परिवार के मुख्य कमाने वाले सदस्य की इस तरह अचानक हुई मौत ने बच्चों के सिर से पिता का साया छीन लिया है। वहीं, गंभीर रूप से घायल पत्नी अभी तक इस बात से अनजान है कि उसके पति अब इस दुनिया में नहीं रहे, क्योंकि उसकी खुद की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।
सुरक्षा के प्रति जरूरी उपाय
इस तरह के हादसे हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि काम करने वाली जगहों पर सुरक्षा के इंतजाम कितने पुख्ता होने चाहिए। खासकर मजदूरों को काम के दौरान अपने आस-पास के वातावरण को लेकर कितना सतर्क रहना चाहिए। प्रशासन से भी यह उम्मीद की जाती है कि वह इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाए और पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा प्रदान करे ताकि वे इस मुश्किल वक्त से उबर सकें।