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जौनपुर: मिजल्स-रूबेला के टीके से छूटे 7 हजार बच्चों के लिए बड़ा अभियान, जानें तारीख

जौनपुर: मिजल्स-रूबेला के टीके से छूटे 7 हजार बच्चों के लिए बड़ा अभियान, जानें तारीख

क्या आपके बच्चे ने भी मिजल्स और रूबेला (खसरा और रुबेला) से बचाव का टीका नहीं लगवाया है? अगर हाँ, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में स्वास्थ्य विभाग ने उन बच्चों के लिए एक विशेष अभियान का ऐलान किया है जो पिछले टीकाकरण अभियान के दौरान किन्हीं कारणों से इस जीवन-रक्षक टीके से वंचित रह गए थे। प्रशासन की यह पहल न केवल बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित करेगी, बल्कि अभिभावकों की उन चिंताओं को भी दूर करेगी जो अपने बच्चों की सेहत को लेकर हमेशा फिक्रमंद रहते हैं।

67 विद्यालयों के लगभग 7 हजार बच्चों पर फोकस

मिली जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 2,799 विद्यालय संचालित होते हैं। इस साल के शुरुआती दौर में यानी 16 से 27 फरवरी के बीच चलाए गए पहले चरण के वृहद टीकाकरण अभियान में 2,732 विद्यालयों को कवर किया गया था। इस दौरान लगभग 2.15 लाख बच्चों को टीका लगाया गया था। हालांकि, कुछ स्कूल और उनमें पढ़ने वाले बच्चे इस प्रक्रिया से छूट गए थे।

आंकड़ों के मुताबिक, करीब 67 विद्यालयों के लगभग 7,000 बच्चे इस सुरक्षा कवच से वंचित रह गए थे। अब स्वास्थ्य विभाग ने इन सभी बच्चों को सुरक्षित दायरे में लाने के लिए कमर कस ली है। इस विशेष अभियान के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि एक भी बच्चा इस बेहद जरूरी टीके से छूटे नहीं।

कब और कैसे चलेगा यह विशेष अभियान?

स्वास्थ्य विभाग द्वारा तैयार किए गए नए माइक्रोप्लान के तहत, इस विशेष टीकाकरण अभियान की शुरुआत जल्द ही की जाएगी। विभाग ने इसके लिए पुख्ता रणनीति तैयार कर ली है ताकि किसी भी तरह की कोताही न बरती जा सके।

  • कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों पर विशेष ध्यान: जिले में इस कैटेगरी के करीब 2.25 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।
  • विभागों का समन्वय: इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ शिक्षा विभाग, विकास विभाग और अन्य सामाजिक सहयोगी संस्थाओं के बीच बेहतरीन तालमेल बिठाया गया है।
  • विस्तृत दायरा: सरकारी विद्यालयों के साथ-साथ निजी विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य उपकेंद्र भी इस महाअभियान का हिस्सा होंगे।

टीकाकरण के लिए बनाई गईं 487 विशेष टीमें

जमीनी स्तर पर इस अभियान को शत-प्रतिशत सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य प्रशासन ने भारी संख्या में मैनपावर तैनात की है। बच्चों को इन खतरनाक बीमारियों से महफूज रखने के लिए कुल 487 विशेष टीमों का गठन किया गया है।

इन तीन-सदस्यीय टीमों में मुख्य रूप से आशा बहुएं (ASHA), एएनएम (ANM) और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शामिल हैं। ये टीमें घर-घर और स्कूलों में जाकर बच्चों की सूची का मिलान करेंगी और उन्हें सुरक्षित तरीके से टीका लगवाना सुनिश्चित करेंगी।

"बच्चों को मिजल्स और रूबेला जैसी गंभीर बीमारियों से बचाने के लिए यह टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। अभिभावकों को किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। समय पर टीका लगने से बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) बढ़ती है, जिससे वे भविष्य में कई तरह की गंभीर बीमारियों की चपेट में आने से बच जाते हैं।"
— डॉ. मुकेश शुक्ल, बाल रोग विशेषज्ञ

अभिभावकों के लिए क्यों जरूरी है यह टीका?

खसरा (Measles) और रुबेला (Rubella) दोनों ही वायरल संक्रमण हैं जो बच्चों में तेजी से फैलते हैं। खसरा से पीड़ित बच्चों में तेज बुखार, खांसी और शरीर पर लाल चकत्ते जैसी समस्याएं होती हैं, जो कई बार गंभीर रूप ले लेती हैं। वहीं, रुबेला भी बच्चों और आगे चलकर गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि टीकाकरण ही इन बीमारियों से लड़ने का एकमात्र सबसे प्रभावी हथियार है। सरकार द्वारा यह टीका पूरी तरह से मुफ्त या बेहद नाममात्र लागत पर उपलब्ध कराया जाता है, ताकि समाज के हर वर्ग के बच्चे को इसका लाभ मिल सके।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या यह टीका पूरी तरह से सुरक्षित है?

हाँ, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और सरकार के अनुसार मिजल्स-रूबेला का यह टीका पूरी तरह से सुरक्षित और चिकित्सकीय रूप से प्रमाणित है। इसके कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं हैं।

2. यदि बच्चा पहले से बीमार है, क्या उसे टीका लगाया जा सकता है?

सामान्य सर्दी-जुकाम होने पर टीका लगाया जा सकता है, लेकिन यदि बच्चा किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, तो टीकाकरण से पहले मौके पर मौजूद डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी से सलाह अवश्य लें।

3. अगर किसी बच्चे के विद्यालय में यह अभियान नहीं पहुँचता, तो अभिभावक क्या करें?

यदि आपका बच्चा इस अभियान से छूट गया है, तो आप अपने नजदीकी स्वास्थ्य उपकेंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) या जिला अस्पताल से संपर्क करके इस टीके की जानकारी ले सकते हैं।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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