उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जिले जौनपुर में शुक्रवार को भारतीय राजनीति के प्रखर विचारक और अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 110वीं जयंती अत्यंत श्रद्धा और विचारपूर्ण माहौल में मनाई गई। इस अवसर पर नगर के एक प्रतिष्ठित होटल में एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें राजनीतिक हस्तियों, विचारकों और बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य उनके द्वारा दिखाए गए राष्ट्रसेवा और समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान के मार्ग पर गहराई से मंथन करना था।
अंत्योदय और एकात्म मानववाद: आज के संदर्भ में प्रासंगिकता
कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) खेल एवं युवा कल्याण विभाग, गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का संपूर्ण जीवन राष्ट्रसेवा और अंत्योदय के लिए समर्पित रहा। उन्होंने समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के विकास को अपनी राजनीति और दर्शन का केंद्रबिंदु बनाया।
मंत्री गिरीश चंद्र यादव ने आगे कहा, 'पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित 'एकात्म मानववाद' का सिद्धांत भारतीय संस्कृति, दर्शन और समाज के समग्र विकास की एक अचूक और अनूठी दृष्टि प्रस्तुत करता है। उनके विचार आज के आधुनिक दौर में भी उतने ही प्रासंगिकता रखते हैं, जितने उस समय हुआ करते थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि किस प्रकार सादगी और उच्च विचारों के साथ जन कल्याण किया जा सकता है।'
राजनीतिक आदर्श और वर्तमान परिदृश्य
संगोष्ठी में वक्ताओं ने केवल उनके दर्शन पर ही चर्चा नहीं की, बल्कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर भी खुलकर अपने विचार रखे। इस कड़ी में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जैसे महान नेताओं ने भारतीय राजनीति में ऐसे उच्च आदर्श स्थापित किए हैं जो आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा मार्गदर्शक का काम करेंगे।
उन्होंने वर्तमान राजनीतिक माहौल पर चिंता जताते हुए कहा कि आज की राजनीति में जहां एक ओर विभाजनकारी प्रवृत्तियां और संकीर्णताएं बढ़ती जा रही हैं, वहीं पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जीवन हमें यह सिखाता है कि राजनीतिक जीवन का अंतिम लक्ष्य केवल और केवल राष्ट्र और समाज की निष्पक्ष सेवा होना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि आज के युवाओं और नेताओं को उनके जीवन चरित्र से प्रेरणा लेनी चाहिए।
संगोष्ठी के मुख्य बिंदु और निष्कर्ष
- समाज के अंतिम व्यक्ति का विकास: संगोष्ठी में इस बात पर जोर दिया गया कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के सबसे गरीब और पिछड़े व्यक्ति तक पहुंचना ही पंडित दीनदयाल के सपनों का भारत है।
- सादगी और समर्पण: वक्ताओं ने उनके व्यक्तिगत जीवन की सादगी और राष्ट्र के प्रति अगाध प्रेम को याद किया।
- युवाओं के लिए प्रेरणा: युवा कल्याण मंत्री की मौजूदगी के चलते कार्यक्रम में विशेष रूप से युवाओं से अपील की गई कि वे वैचारिक दृढ़ता और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में आगे आएं।

इस अवसर पर स्थानीय स्तर के कई गणमान्य नागरिक, पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। सभी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी और उनके बताए गए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रहित और जनहित के कार्यों में निरंतर सक्रिय रहने की प्रतिज्ञा के साथ हुआ।