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पूर्वांचल यूनिवर्सिटी: कुलपति ने छात्रों से की सीधी बात, समस्याओं के समाधान के सख्त निर्देश

पूर्वांचल यूनिवर्सिटी: कुलपति ने छात्रों से की सीधी बात, समस्याओं के समाधान के सख्त निर्देश

उच्च शिक्षा संस्थानों में अक्सर यह देखा जाता है कि छात्र अपनी छोटी-छोटी प्रशासनिक और शैक्षणिक समस्याओं को लेकर असमंजस में रहते हैं, और कई बार उनकी बात सही मंच तक नहीं पहुँच पाती है। इसी दूरी को पाटने और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर प्रदेश के जौनपुर स्थित वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय (VBSPU) ने एक अनूठी पहल की है। विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित एक विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान छात्रों को सीधे देश के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों और कुलपति से रूबरू होने का मौका मिला।

संवाद ही है हर मुश्किल का सबसे ठोस हल: कुलपति

विश्वविद्यालय के संगोष्ठी भवन में आयोजित इस बहुप्रतीक्षित संवाद कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रोफेसर राकेश कुमार सिंह ने बहुत ही स्पष्ट और दो टूक शब्दों में कहा कि संवाद ही किसी भी समस्या के समाधान की पहली सीढ़ी होती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में जब शिक्षा का पैमाना लगातार बदल रहा है, यह बेहद जरूरी है कि छात्र और प्रशासन के बीच किसी भी प्रकार की दीवार न हो।

प्रोफेसर सिंह ने कहा, "हमारा विश्वविद्यालय अपने हर एक विद्यार्थी की शैक्षणिक, प्रशासनिक, हॉस्टल, परीक्षा, अनुशासन और अन्य सभी प्रकार की व्यक्तिगत या सामूहिक समस्याओं के समाधान के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। छात्रों को अपनी बात रखने के लिए किसी भी मध्यस्थ या झिझक की कोई आवश्यकता नहीं है। विश्वविद्यालय के दरवाजे हर छात्र के लिए हमेशा खुले हैं।"

छात्रों ने खुलकर रखे अपने सुझाव और परेशानियां

मंगलवार को आयोजित इस ओपन हाउस संवाद कार्यक्रम में विभिन्न संकायों (Faculties) और विभागों से आए सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। छात्रों ने केवल अपनी शिकायतें ही नहीं रखीं, बल्कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को और बेहतर बनाने के लिए कई रचनात्मक सुझाव भी दिए। किसी ने परीक्षा परिणाम समय पर जारी करने की बात कही, तो किसी ने पुस्तकालय (Library) और प्रयोगशाला (Laboratory) के समय को बढ़ाने का अनुरोध किया।

कुलपति ने एक-एक छात्र की बात को बेहद शालीनता, गंभीरता और पूरी संवेदनशीलता के साथ सुना। मौके पर मौजूद संबंधित विभागों के अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को यह निर्देश दिए गए कि वे प्राप्त शिकायतों का एक तय समय सीमा (Time-bound) के भीतर प्रभावी समाधान सुनिश्चित करें। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को लेकर भी कड़े संदेश दिए गए हैं, ताकि भविष्य में छात्रों को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।

खुले संवाद से बनता है सकारात्मक शैक्षणिक माहौल

कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर सिंह ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि प्रशासन और विद्यार्थियों के बीच यदि खुला, पारदर्शी और नियमित संवाद बना रहे, तो कैंपस का पूरा शैक्षणिक वातावरण ही बदल जाता है। इससे न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ता है, बल्कि वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाते हैं।

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा: विश्वविद्यालय का मुख्य ध्येय केवल डिग्री बांटना नहीं, बल्कि उच्च कोटि की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है।
  • सुरक्षित और सहयोगी कैंपस: छात्राओं और छात्रों दोनों के लिए एक सुरक्षित, भयमुक्त और सहयोगी वातावरण का निर्माण करना प्रशासन की प्राथमिकता है।
  • नियमित फीडबैक: इस प्रकार के संवाद सत्र आगे भी आयोजित किए जाएंगे ताकि समय-समय पर छात्रों के फीडबैक मिलते रहें।

छात्र कल्याण योजनाओं की मिली जानकारी

इस संवाद कार्यक्रम के दूसरे चरण में विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण (Dean of Student Welfare) प्रोफेसर प्रमोद कुमार यादव ने मंच से संबोधित किया। उन्होंने छात्र हित में चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, स्कॉलरशिप, वित्तीय सहायता, और मिलने वाली अन्य सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे विश्वविद्यालय की वेबसाइट और नोटिस बोर्ड के जरिए इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

कार्यक्रम के अंत में पूरे सत्र का संचालन कर रहे डॉ. नितेश जायसवाल ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम प्रशासन और छात्रों के बीच की दूरी को मीलों तक कम कर देते हैं।

कैंपस में लौटी उम्मीद की नई लहर

विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस प्रकार की पहल देश के हर विश्वविद्यालय में नियमित रूप से होने लगे, तो छात्र आंदोलनों और तनाव का ग्राफ काफी हद तक गिर सकता है। वीबीएस पूर्वांचल विश्वविद्यालय के इस कदम से न केवल छात्रों में विश्वास जागा है, बल्कि यह भी साबित हो गया है कि यदि नेतृत्व संवेदनशील हो, तो जटिल से जटिल समस्याओं का समाधान टेबल पर बैठकर ही निकाला जा सकता है। विश्वविद्यालय प्रशासन के इस सख्त और सकारात्मक रुख से आने वाले दिनों में व्यवस्था में और अधिक सुधार देखने को मिल सकता है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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