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JSSC CGL 2026: झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नियुक्ति रद्द करने पर लगी रोक

JSSC CGL 2026: झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, नियुक्ति रद्द करने पर लगी रोक

झारखंड की प्रशासनिक और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर सामने आ रही है। झारखंड हाईकोर्ट ने जेएसएससी-सीजीएल (JSSC CGL 2026) के तहत हुई नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर फिलहाल कड़ा और स्पष्ट स्टे लगा दिया है। अदालत के इस फैसले से उन हजारों प्रभावित कर्मचारियों को तात्कालिक राहत मिली है जिनकी नौकरियां खतरे में पड़ गई थीं। अब ये कर्मचारी फिलहाल अपने पदों पर बने रहेंगे और अपने दायित्वों का निर्वहन जारी रख सकेंगे।

अदालत का अंतरिम आदेश और जस्टिस दीपक रोशन की बेंच

झारखंड हाईकोर्ट के माननीय न्यायमूर्ति जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में इस महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई हुई। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी की गई उस अधिसूचना के क्रियान्वयन और अनुपालन पर रोक लगाई है, जिसके जरिए इन नियुक्तियों को अचानक रद्द करने का निर्णय लिया गया था। यह पूरा मामला कई दिनों से राज्य के प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ था और प्रभावित युवा लगातार न्याय की गुहार लगा रहे थे।

अदालत ने कुल तीन अलग-अलग रिट याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह बड़ा कदम उठाया। याचिका दायर करने वाले प्रमुख मामलों में शालिनी सुंडी व अन्य, रोजलिन श्वेता तिग्गा व अन्य, तथा ऋषिकेश सज्जन व अन्य के मुकदमे शामिल थे। इन सभी याचिकाओं की गहराई से समीक्षा करने के बाद अदालत ने यह अंतरिम राहत प्रदान की है।

महाधिवक्ता को निर्देश और समान स्थिति वाले कर्मचारियों को सुरक्षा

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए राज्य के महाधिवक्ता को संबंधित प्रशासनिक विभागों को आवश्यक और त्वरित निर्देश देने के लिए कहा है। हाईकोर्ट के इस आदेश की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसका दायरा केवल याचिका दायर करने वाले चुनिंदा उम्मीदवारों तक ही सीमित नहीं रखा गया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि इस सरकारी अधिसूचना से प्रभावित होने वाले वे तमाम अन्य कर्मचारी भी इस रोक के दायरे में आएंगे जिनकी स्थिति याचिकाकर्ताओं जैसी ही है। यानी समान परिस्थिति वाले सभी कर्मियों को फिलहाल अपनी नौकरी पर काम जारी रखने की अनुमति दे दी गई है।

अपराधिक मामलों के अंतिम फैसले से जुड़ी होगी भविष्य की स्थिति

हालाँकि यह राहत पूरी तरह से बिना शर्तों के नहीं है। हाईकोर्ट ने एक अहम कानूनी शर्त भी जोड़ी है। अदालत ने सभी याचिकाकर्ताओं को यह निर्देश दिया है कि वे एक औपचारिक शपथपत्र (Affidavit) दाखिल करें। इस शपथपत्र के माध्यम से उन्हें यह स्वीकार करना होगा कि संबंधित आपराधिक मामले में निचली अदालत (Trial Court) जो भी अंतिम फैसला सुनाएगी, वह उन पर पूरी तरह से बाध्यकारी (Binding) होगा।

अदालत ने अपनी टिप्पणी में यह भी साफ कर दिया है कि निचली अदालत का अंतिम आदेश आने के बाद राज्य सरकार के पास कानून सम्मत तरीके से आगे की कार्रवाई करने का पूरा अधिकार सुरक्षित रहेगा। इसका मतलब यह है कि हाईकोर्ट द्वारा दी गई यह मौजूदा रोक कोई अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि मामले के कानूनी परीक्षण तक का एक अंतरिम संरक्षण है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 सितंबर 2026 को निर्धारित की गई है।

सीडीपीओ (CDPO) नियुक्ति मामले में भी सरकार को झटका

सिर्फ जेएसएससी-सीजीएल ही नहीं, बल्कि इसी दिन झारखंड हाईकोर्ट ने एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में भी राज्य सरकार के आदेश पर ब्रेक लगा दिया है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सीडीपीओ (CDPO) नियुक्ति को रद्द करने से जुड़े सरकारी आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर भी सुनवाई की। यह याचिका राधिका कुमार की तरफ से दाखिल की गई थी।

इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार को कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह सीआईडी (CID) जांच के दौरान सामने आए सभी तथ्यों और दस्तावेजों को अदालत के समक्ष पेश करे। सीडीपीओ नियुक्ति मामले की अगली सुनवाई भी 15 सितंबर 2026 को ही होगी, जिस पर राज्य के तमाम प्रशासनिक जानकारों की निगाहें टिकी रहेंगी।

अब आगे क्या? सरकार के जवाब और 15 सितंबर की तारीख पर टिकी नजरें

JSSC-CGL नियुक्तियों को लेकर आए इस अदालती घटनाक्रम के बाद फिलहाल कर्मचारियों की सांस में सांस आई है। वे अपनी नौकरी पर बने हुए हैं, लेकिन उनके भविष्य की अनिश्चितता अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हुई है। सब कुछ इस बात पर निर्भर करेगा कि आगामी 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में राज्य सरकार अदालत के सामने अपना क्या पक्ष रखती है और कौन-से दस्तावेज पेश करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में और अधिक कानूनी मोड़ ले सकता है, क्योंकि इसमें आपराधिक मामलों की अंतिम सुनवाई और सीआईडी जांच के निष्कर्षों की भी अहम भूमिका है। फिलहाल, प्रभावित युवाओं के लिए यह राहत किसी बड़ी ऑक्सीजन से कम नहीं है, जिन्हें अब अगली तारीख यानी 15 सितंबर का बेसब्री से इंतजार है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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