उल्हासनगर कैंप एक और दो के श्मशान घाट में व्याप्त बुनियादी सुविधाओं के अभाव और कुप्रबंधन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता दीपक बलेचा ने नगर निगम प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा है कि यदि श्मशान भूमि की स्थिति में शीघ्र सुधार नहीं किया गया, तो वे मृतक के परिवारों के हक के लिए परिसर के भीतर ही आमरण अनशन पर बैठने को बाध्य होंगे।
दीपक बलेचा पिछले कई दशकों से अपने स्वयं के खर्चे पर लावारिस शवों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं और उनकी अस्थियों को नासिक में गोदावरी नदी में विसर्जित करते हैं। इस सामाजिक और परोपकारी कार्य के कारण क्षेत्र में उनकी गहरी सक्रियता रही है। श्मशान भूमि की व्यवस्थाओं से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाते हुए उन्होंने प्रशासन और इसे संचालित करने वाले ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
श्मशान भूमि में बदहाली और बुनियादी सुविधाओं का भारी अभाव
उल्हासनगर कैंप 1 और 2 के लिए बनी इस श्मशान भूमि का संचालन एक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। दीपक बलेचा का आरोप है कि ट्रस्ट कागजों पर और नाम के लिए है, जो इस पर मोटी रकम वसूलता है लेकिन अंतिम संस्कार के लिए आने वाले मृतकों और उनके शोकाकुल परिजनों के हित में कोई ठोस कार्य नहीं किया जाता है।
मौजूदा स्थिति यह है कि श्मशान घाट में बिजली आपूर्ति बाधित होने पर लोगों को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में शव जलाने पड़ते हैं। लकड़ी के गोडाउन में लीकेज होने के कारण मानसून के दौरान लकड़ियां भीग जाती हैं, जिससे परिजनों को दाह संस्कार के वक्त भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, परिसर में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, महिला और पुरुषों के लिए शौचालय नदारद हैं, जगह-जगह टाइल्स उखड़ी हुई हैं और जर्जर छतों से पानी टपकता है।
सुरक्षा व्यवस्था की कमी और असामाजिक तत्वों का आतंक
श्मशान भूमि की सुरक्षा और प्रशासनिक देखरेख की स्थिति बेहद दयनीय है। परिसर में स्थित दीवारों की हालत खराब है और चोरों ने काली देवी की मूर्ति के सामने रखी दानपेटी का ताला तोड़कर नगदी चुरा ली है। इसके अलावा, श्मशान के भीतर बने दो कार्यालयों तथा गेट के बाहर रखी ठाणे मनपा की बहुउद्देशीय केबिन के गेट तोड़ दिए गए हैं। असामाजिक तत्व दीवार फांदकर अंदर घुसते हैं और कर्मचारियों को धमकाते हैं।
परिसर की सुरक्षा के लिए उल्हासनगर पुलिस स्टेशन के अंतर्गत एक पुलिस चौकी भी बनाई गई है, जो ज्यादातर समय बंद रहती है। छोटे बच्चों को दफनाने वाली जगह के आसपास बड़ी मात्रा में जंगल उगा हुआ है, जहां सांप और बिच्छू जैसे विषैले जीव घूमते रहते हैं। अंधेरा होने पर यहां परिजनों के लिए बच्चों को दफनाना खतरनाक साबित हो रहा है।
ट्रस्ट में सुधार और लंबित मरम्मत कार्यों की मांग
दीपक बलेचा का कहना है कि श्मशान भूमि का संचालन कर रहे ट्रस्ट के कई पदाधिकारी निष्क्रिय हो चुके हैं, इसलिए नए पदाधिकारियों के चुनाव की सख्त आवश्यकता है। साथ ही ट्रस्टियों और मनपा कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि श्मशान भूमि की मरम्मत के लिए नगर निगम के किसी ठेकेदार ने कई साल पहले वर्क ऑर्डर ले रखा है, लेकिन काम अभी तक पूरा नहीं हुआ है। मांग की गई है कि या तो उसी ठेकेदार से तत्काल काम कराया जाए या फिर वर्क ऑर्डर रद्द कर किसी अन्य सक्षम ठेकेदार को सौंपा जाए ताकि जर्जर दीवारों, प्रकाश व्यवस्था (सोलर लाइट) और साफ-सफाई के कार्यों को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके।