मध्य प्रदेश का संस्कारधानी शहर जबलपुर इन दिनों राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी का केंद्र बन गया है। उच्च शिक्षा संस्थानों में लागू होने वाले यूजीसी (University Grants Commission) के नए इक्विटी रेगुलेशंस और देश की मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ करणी सेना का आक्रोश खुलकर सड़कों पर आ गया है। इस विरोध प्रदर्शन ने न केवल स्थानीय प्रशासनिक अमले को सतर्क कर दिया है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चल रही इस बहस को एक बार फिर से तूल दे दिया है। स्थिति तब और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के जबलपुर दौरे के दौरान उनसे मिलने जा रहे करणी सेना के प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बीच रास्ते में ही रोककर एक होटल में नजरबंद कर दिया।
यूजीसी रोल बैक और आरक्षण पर तकरार
गुरुवार को जबलपुर की सड़कों पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब बड़ी संख्या में करणी सेना के कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए बाहर निकल आए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग यूजीसी के नए नियमों को तुरंत प्रभाव से 'रोल बैक' (वापस) लेने की है। संगठन का कड़ा विरोध इस बात को लेकर है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और भेदभाव को दूर करने के नाम पर जो नियम लाए जा रहे हैं, वे देश के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित कर सकते हैं।
करणी सेना के मंच से साफ शब्दों में यह मांग उठाई गई कि आरक्षण व्यवस्था का आधार जाति की बजाय पूरी तरह से आर्थिक स्थिति (Economic Status) होना चाहिए। कार्यकर्ताओं का तर्क है कि देश के किसी भी कोने में रहने वाला जो भी व्यक्ति वास्तव में जरूरतमंद है, उसे उसकी आर्थिक तंगी के आधार पर सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए, न कि केवल जातिगत पहचान के आधार पर।
'नियम लागू करने से पहले सरकार करे पुनर्विचार'
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे नेताओं का कहना है कि सरकार को किसी भी बड़े बदलाव से पहले समाज के सभी वर्गों के साथ व्यापक चर्चा करनी चाहिए। उनका आरोप है कि यूजीसी के इन विवादित इक्विटी रेगुलेशंस को लेकर सवर्ण समाज और अन्य वर्गों में गहरा असंतोष सुलग रहा है। यदि इन नियमों को बिना किसी संशोधन के लागू कर दिया गया, तो इसके परिणाम समाज के लिए ठीक नहीं होंगे।
गौरतलब है कि यूजीसी के इन प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह से समाप्त करना और कैंपस को सभी छात्रों के लिए सुरक्षित बनाना है। हालांकि, इन नियमों के कुछ विशिष्ट प्रावधानों और परिभाषाओं को लेकर पिछले कुछ महीनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध के स्वर लगातार उठ रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है विवाद
यह पूरा मामला केवल सड़कों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक भी अपनी पहुंच बना चुका है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों के कुछ पहलुओं पर गंभीर रुख अपनाते हुए रोक लगाई थी। इसके बाद, बीती 20 अगस्त को केंद्र सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दिया गया था कि इन नियमों के प्रावधानों पर दोबारा विचार किया जा रहा है।
इस कानूनी प्रक्रिया और नीतिगत सुगबुगाहट के बीच देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर भी एक विशाल प्रदर्शन आयोजित किया जा चुका है। उस प्रदर्शन में भी देश भर के कई सामाजिक संगठनों ने शिरकत की थी और जाति आधारित आरक्षण की समीक्षा की पुरजोर मांग उठाई थी। अब इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के जबलपुर में भी इस आंदोलन की गूंज सुनाई दी है, जिससे यह साफ हो गया है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के दौरे के बीच हाई-वोल्टेज ड्रामा
जबलपुर में गुरुवार का दिन प्रशासनिक और सुरक्षा एजेंसियों के लिए परीक्षा की घड़ी साबित हुआ, क्योंकि देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह एक दिवसीय दौरे पर शहर में मौजूद थे। एक तरफ जहाँ देश के रक्षा मंत्री का वीवीआईपी दौरा चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ करणी सेना के कार्यकर्ता अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने और अपनी बात सीधे देश के वरिष्ठ मंत्री तक पहुँचाने के लिए बेताब थे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वी रसल चौक पर जोरदार प्रदर्शन करने के बाद करणी सेना के तमाम कार्यकर्ता और पदाधिकारी सीधे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिलने के लिए उनके रूट की ओर बढ़ रहे थे। स्थिति की नज़ाकत को भांपते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने तुरंत मोर्चा संभाला। भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच कार्यकर्ताओं को आगे बढ़ने से रोक दिया गया और एहतियात के तौर पर उन्हें एक स्थानीय होटल में ले जाकर नजरबंद कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की।
सोशल मीडिया बयान पर भी जताई गहरी आपत्ति
नजरबंदी के दौरान करणी सेना के नेताओं ने न केवल यूजीसी नियमों का विरोध किया, बल्कि आरक्षण के मुद्दे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कथित तौर पर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक बयान पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार को इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी नीति बिल्कुल स्पष्ट रखनी चाहिए। उनका मानना है कि जब तक समाज के हर वर्ग को समान अवसर नहीं मिलेंगे और आर्थिक रूप से पिछड़ों की सुध नहीं ली जाएगी, तब तक देश में सामाजिक समरसता की बात अधूरी है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल
रक्षा मंत्री के हाई-प्रोफाइल दौरे के ठीक बीचों-बीच करणी सेना का यह विरोध प्रदर्शन अब मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा चर्चा का विषय बन गया है। विपक्षी दलों से लेकर विभिन्न सामाजिक संगठनों की इस पर पैनी नजर टिकी हुई है। जानकारों का मानना है कि आरक्षण और यूजीसी के इन नए प्रावधानों को लेकर उपजा यह असंतोष आने वाले समय में अन्य जिलों और राज्यों में भी असर दिखा सकता है।
फिलहाल, निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र सरकार और यूजीसी की ओर से इन प्रदर्शनकारियों की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है। क्या सरकार इन नियमों में कोई संशोधन करने पर विचार करती है या फिर विरोध के यह स्वर आने वाले दिनों में और अधिक तीव्र रूप धारण करेंगे? इस सवाल का जवाब आने वाला वक्त ही देगा, लेकिन इतना तय है कि जबलपुर की इस घटना ने एक बार फिर देश की मुख्यधारा की राजनीति में आरक्षण और यूजीसी रेगुलेशंस के पन्ने को खोल कर रख दिया है।
