सोशल मीडिया की अंधी दौड़ में लोग किस हद तक जा सकते हैं, इसकी बानगी इन दिनों मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में देखने को मिली है। इंटरनेट पर लाइक्स, व्यूज और रातों-रात मशहूर होने की चाहत ने एक बार फिर कानून के पन्ने पलटने पर मजबूर कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए किए गए एक अजीबोगरीब प्रयोग का अंजाम यह हुआ कि वाहन मालिक को न सिर्फ भारी जुर्माना भरना पड़ा, बल्कि पुलिस के सामने अपनी गलती की माफी भी मांगनी पड़ी।
विदेशी ट्रेंड का नशा और चार घंटे की मेहनत
मामला ग्वालियर का है, जहां एक युवक की कार इन दिनों शहरभर में चर्चा का विषय बनी हुई थी। जानकारी के मुताबिक, ग्वालियर के रहने वाले आदित्य सिकरवार की कार पर उनकी गर्लफ्रेंड ने एक विदेशी सोशल मीडिया ट्रेंड से प्रेरित होकर एक अनोखा प्रयोग किया। युवती ने अलग-अलग रंगों की लिपस्टिक का इस्तेमाल करते हुए कार की पूरी बॉडी पर करीब 3400 'किस मार्क्स' (चुंबन के निशान) छाप दिए।
इस डिजाइन को तैयार करने में कोई एक-दो मिनट नहीं, बल्कि पूरे चार घंटे का समय लगा। लिपस्टिक के इन अनगिनत निशानों से सजी कार जब ग्वालियर की सड़कों पर उतरी, तो देखने वालों की आंखें फटी की फटी रह गईं। राहगीरों ने रुक-रुक कर इस अनोखी कार के वीडियो बनाए और तस्वीरें क्लिक कीं।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
आज के डिजिटल दौर में किसी भी अनोखी चीज को वायरल होने में ज्यादा समय नहीं लगता। ठीक वैसा ही इस कार के साथ भी हुआ। सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर इस कार के वीडियो और तस्वीरें आग की तरह फैल गईं। जहां एक तरफ कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे प्यार का इजहार और क्रिएटिविटी का नायाब तरीका बताया, वहीं दूसरी तरफ अधिकांश लोगों ने इसे केवल अटेंशन पाने का ढकोसला करार दिया।
"सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने की होड़ में लोग अक्सर यह भूल जाते हैं कि सार्वजनिक सड़कों पर उनकेACTIONS (कृत्यों) का आम जनता और यातायात व्यवस्था पर क्या असर पड़ता है। मोटर व्हीकल एक्ट सबके लिए एक समान है।" - ट्रैफिक पुलिस अधिकारी
ट्रैफिक पुलिस की रडार पर आई 'किस कार'
वायरल हो रहे वीडियो जब ग्वालियर ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों तक पहुंचे, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। वीडियो में दिख रहे वाहन के नंबर के आधार पर पुलिस ने उसकी तलाश शुरू कर दी। तकनीक और मुखबिर तंत्र की मदद से पुलिस ने जल्द ही वाहन की पहचान कर ली और उसे थाटीपुर इलाके से अपने कब्जे में ले लिया।
पुलिस अधिकारियों का तर्क था कि कार के मूल स्वरूप (Original Appearance) में इस तरह का भारी बदलाव किया गया था, जो मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के खिलाफ है। वाहन के रंग-रूप को इस तरह से बदलना जिससे अन्य चालकों का ध्यान भटके, ट्रैफिक नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
5500 रुपये का जुर्माना और लिपस्टिक के निशान साफ
पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद वाहन मालिक को अपनी गलती का अहसास हुआ। पूछताछ के दौरान उसने स्वीकार किया कि यह सब केवल सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने के लिए किया गया था।
- जुर्माना: ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और वाहन के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ के आरोप में पुलिस ने 5500 रुपये का तगड़ा चालान काटा।
- कार्रवाई: पुलिस की मौजूदगी में कार को पानी से धोकर उसके ऊपर लगे सभी 3400 लिपस्टिक के निशान हटवाए गए।
- चेतावनी: पुलिस ने भविष्य में इस तरह की हरकतें न करने की सख्त हिदायत देकर युवक को छोड़ा।
क्या कहती है यह घटना?
यह पूरा वाकया इस बात का आईना है कि इंटरनेट की वर्चुअल दुनिया और रीयल वर्ल्ड के नियमों के बीच एक बारीक रेखा होती है। वर्चुअल लाइक्स और कमेंट्स की चाहत में लोग अक्सर कानून के दायरे को लांघ जाते हैं। ग्वालियर की इस 'किस कार' ने साबित कर दिया कि सड़क पर कानून से ऊपर कोई नहीं है, चाहे आपका मकसद कितना भी रचनात्मक या रोमांटिक क्यों न हो।