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लालबागचा राजा की नीलामी में टूटे सारे रिकॉर्ड, एक किलो सोने की ईंट बिकी इतने करोड़ में

लालबागचा राजा की नीलामी में टूटे सारे रिकॉर्ड, एक किलो सोने की ईंट बिकी इतने करोड़ में

मुंबई की फिजाओं में अभी भी उत्सव का खुमार कायम है, और इस बार की रौनक कुछ ऐसी रही जिसने इतिहास के पन्नों में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। बात हो रही है दुनिया भर में अपनी अनूठी आस्था और भव्यता के लिए विख्यात गणेशोत्सव के प्रमुख केंद्र 'लालबागचा राजा' की। हर साल गणेश विसर्जन के बाद बप्पा के दरबार में भक्तों द्वारा अर्पित की गई सोने-चांदी कीमती वस्तुएं और नकदी मंडल के लिए किसी अमूल्य धरोहर से कम नहीं होतीं। इस बार लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल द्वारा आयोजित वार्षिक आधिकारिक नीलामी में आस्था और भक्ति का ऐसा सैलाब उमड़ा कि पिछले सारे वित्तीय रिकॉर्ड धरे के धरे रह गए। नीलामी के दौरान एक किलोग्राम सोने की ईंट ने जो कीमत हासिल की, उसने हर किसी को चौंका दिया।

भक्तों की अटूट आस्था: 1.55 करोड़ रुपये में बिकी एक किलो सोने की ईंट

लालबागचा राजा के चरणों में शीश नवाने वाले भक्त केवल आम लोग ही नहीं, बल्कि देश-विदेश के दिग्गज उद्योगपति, व्यापारी और उद्योग जगत के बड़े चेहरे भी शामिल होते हैं। इस बार की नीलामी का मुख्य आकर्षण वह एक किलोग्राम वजन की शुद्ध सोने की ईंट रही, जिसे किसी अज्ञात भक्त ने बप्पा के प्रसाद के रूप में स्वीकार करने के लिए भारी-भरकम बोली लगाकर अपने नाम किया। मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस एक किलो सोने की ईंट की बोली 1.55 करोड़ रुपये पर आकर रुकी।

यह आंकड़ा अपने आप में इस बात का गवाह है कि बप्पा के प्रति लोगों की श्रद्धा किस असीम स्तर पर है। नीलामी हॉल में जैसे ही इस ईंट के लिए अंतिम बोली की घोषणा हुई, वहां मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ इस पल का स्वागत किया। जानकारों का कहना है कि वर्तमान बाजार भाव और बाजार की स्थिति को देखते हुए यह सौदा मंडल के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी नीलामी प्रक्रियों में दर्ज हो चुका है।

सिर्फ सोना ही नहीं, चांदी और अन्य बेशकीमती वस्तुओं पर भी लगी रिकॉर्ड बोलियां

सोने की ईंट के अलावा भी बप्पा के दरबार में अर्पित की गई अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की नीलामी में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। मंडल के अधिकारियों के मुताबिक, इस नीलामी में विभिन्न प्रकार के आभूषण, चांदी के मुकुट, हार, मोदक और पारंपरिक कलाकृतियां शामिल थीं।

  • चांदी के बर्तन और आभूषण: भक्तों ने चांदी से बने सिंदूर के डिब्बे, छोटे छत्र और विशेष कलाकृतियों को खरीदने के लिए बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
  • पारंपरिक हार और मालाएं: सोने और हीरों से जड़े कई हारों की नीलामी ने भी लाखों के आंकड़े को पार किया।
  • भक्तों का उत्साह: नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए महाराष्ट्र के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों से भी भक्त मुंबई पहुंचे थे।

पारदर्शिता और सामाजिक सरोकार: नीलामी के पैसों का होता है बड़ा उपयोग

लालबागचा राजा सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल सिर्फ अपनी भव्यता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने सामाजिक कार्यों और परोपकारी गतिविधियों के लिए भी देश भर में एक मिसाल पेश करता है। हर साल नीलामी और दान के रूप में मिलने वाली इस अपार धनराशि का एक बड़ा हिस्सा समाज कल्याण के कार्यों में लगाया जाता है।

मंडल के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "बप्पा के चरणों में जो कुछ भी अर्पित किया जाता है, वह सीधे तौर पर समाज के जरूरतमंदों की भलाई से जुड़ा होता है। इस राशि का उपयोग शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, प्राकृतिक आपदा पीड़ितों की मदद और गरीब कन्याओं के विवाह जैसे पवित्र कार्यों के लिए किया जाता है। भक्तों द्वारा दिया गया हर एक ग्राम सोना और हर एक रुपया किसी की जिंदगी में रोशनी लाने का काम करता है।"

डिजिटल युग में भी नहीं कम हुआ पारंपरिक नीलामी का क्रेज

आज के इस आधुनिक दौर में जहां सब कुछ ऑनलाइन और डिजिटल हो चुका है, वहीं लालबागचा राजा की इस पारंपरिक नीलामी में ऑफलाइन बोली लगाने का रोमांच आज भी वैसा ही बना हुआ है। नीलामी स्थल पर मौजूद हर व्यक्ति की नजरें उस पल पर टिकी थीं जब एक के बाद एक लॉट की बोलियां लगाई जा रही थीं। बोलीदाताओं के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जहां हर कोई बप्पा के प्रसाद को अपने घर या प्रतिष्ठान में ले जाने के लिए उत्सुक था।

निष्कर्ष: आस्था का एक अनूठा संगम

वर्ष 2026 का यह गणेशोत्सव और उसके बाद संपन्न हुई यह ऐतिहासिक नीलामी एक बार फिर यह साबित कर गई है कि भारतीय संस्कृति और आस्था में यदि समर्पण हो, तो उसकी कोई कीमत नहीं आंकी जा सकती। 1.55 करोड़ रुपये में बिकी सोने की ईंट और अन्य बेशकीमती सामानों की नीलामी ने न सिर्फ एक नया रिकॉर्ड बनाया है, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि लालबागचा राजा के प्रति भक्तों का प्रेम हर साल और अधिक प्रगाढ़ होता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह राशि किस प्रकार सामाजिक कार्यों में उपयोग की जाएगी, इसकी विस्तृत रूपरेखा भी मंडल द्वारा जल्द ही साझा की जाएगी।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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