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साबरमती जेल से कड़ी सुरक्षा में चंडीगढ़ लाया गया लॉरेन्स बिश्नोई, 13 साल पुराने मामले में टली गवाही

साबरमती जेल से कड़ी सुरक्षा में चंडीगढ़ लाया गया लॉरेन्स बिश्नोई, 13 साल पुराने मामले में टली गवाही

गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई की चंडीगढ़ कोर्ट में पेशी, सुरक्षा के थे कड़े इंतजाम

देश के सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल गैंगस्टर्स में शुमार लॉरेंस बिश्नोई को एक पुराने मामले में गुजरात की साबरमती सेंट्रल जेल से भारी सुरक्षा के बीच चंडीगढ़ लाया गया। मामला तेरह साल पुराने एक गोलीकांड से जुड़ा हुआ है, जिसकी सुनवाई के लिए चंडीगढ़ की अदालत में विशेष इंतजाम किए गए थे। हालांकि, तमाम प्रशासनिक और सुरक्षा तैयारियों के बावजूद इस मामले में एक बार फिर नया मोड़ आ गया जब मुख्य गवाह अदालत में पेश नहीं हुआ।

अदालत की कार्यवाही के दौरान यह उम्मीद जताई जा रही थी कि इतने सालों बाद इस मामले में कोई ठोस प्रगति देखने को मिलेगी, लेकिन गवाह के गैर-हाजिर रहने के कारण सुनवाई को आगे बढ़ाना पड़ा। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान कोर्ट परिसर और उसके आसपास का इलाका किसी छावनी में तब्दील नजर आया। स्थानीय पुलिस के अलावा सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती भी चप्पे-चप्पे पर की गई थी ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

क्या है 13 साल पुराना गोलीकांड मामला?

यह पूरा मामला लगभग एक दशक से अधिक पुराना है, जब लॉरेंस बिश्नोई अपने शुरुआती आपराधिक दिनों में था या छात्र राजनीति के दौरान विभिन्न विवादों से जुड़ा हुआ था। उस समय दर्ज किए गए गोलीकांड के इस मामले में पुलिस ने कई धाराओं के तहत कार्रवाई की थी। इस मामले की फाइलें पिछले कई सालों से अदालत में धूल फांक रही हैं, और विभिन्न कानूनी दांव-पेंच तथा आरोपियों की पेशी में हो रही देरी के कारण मामला लगातार खिंचता जा रहा है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि ऐसे पुराने मामलों में स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) न हो पाना न्याय व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती बन जाता है। इस मामले में भी बार-बार समन जारी होने के बावजूद गवाहों का अदालत में पेश न होना বিচার प्रक्रिया में देरी का एक मुख्य कारण बनता जा रहा है।

साबरमती जेल से चंडीगढ़ तक का सफर और सुरक्षा चक्र

लॉरेंस बिश्नोई इस समय गुजरात की अति-सुरक्षित साबरमती जेल में बंद है। वहां से उसे सड़क और अन्य सुरक्षा माध्यमों का इस्तेमाल करते हुए भारी पुलिस बल के साथ चंडीगढ़ लाया गया। इस मूवमेंट को बेहद गोपनीय रखा गया था ताकि किसी भी तरह के खतरे को टाला जा सके। पंजाब और हरियाणा के साथ-साथ अन्य राज्यों की पुलिस भी लॉरेंस बिश्नोई की पेशी के दौरान पूरी तरह सतर्क नजर आई।

  • हाई-सिक्योरिटी अरेंजमेंट्स: अदालत परिसर के अंदर और बाहर पुलिस के कमांडो तैनात किए गए थे।
  • आधुनिक तकनीक की मदद: सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे इलाके की निगरानी की जा रही थी।
  • मीडिया और आम जनता की आवाजाही पर रोक: सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम के आसपास सुरक्षा घेरा बेहद कड़ा कर दिया गया था।

गवाह के नहीं आने से टली सुनवाई, अगली तारीख का इंतजार

चंडीगढ़ कोर्ट में जब लॉरेंस बिश्नोई को पेश किया गया, तो अदालत की निगाहें गवाह की मौजूदगी पर टिकी थीं। लेकिन जब यह स्पष्ट हुआ कि गवाह सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हो सका है, तो अदालत ने अगली तारीख मुकर्रर कर दी। इस स्थिति के चलते वकीलों और पुलिस प्रशासन को एक बार फिर मायूसी हाथ लगी।

पुराने आपराधिक मामलों में गवाहों का मुकर जाना या अदालत में समय पर पेश न होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब मामला इतने हाई-प्रोफाइल गैंगस्टर से जुड़ा हो, तो हर एक पेशी पर मीडिया और आम जनता की नजरें टिकी रहती हैं।

आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी निगाहें

इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब अगली तारीख पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं कि क्या उस दिन गवाह कोर्ट में पेश होगा या नहीं। अदालत की तरफ से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि इस पुराने मामले का जल्द से जल्द निपटारा किया जाए। वहीं, लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में दर्जनों मामले लंबित हैं, जिनकी अलग-अलग अदालतों में सुनवाई चल रही है। सुरक्षा कारणों से उसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या इस तरह की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच ही पेश किया जाता है।

इस मामले से जुड़ी हर छोटी-बड़ी अपडेट के लिए हमारे साथ बने रहें। हम आपको इस केस के हर नए कानूनी पहलू से अवगत कराते रहेंगे।

About the Author

अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer (देश खबरें)

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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