कमोडिटी मार्केट (MCX) पर इस समय सोने की चमक ने निवेशकों की नींद उड़ा रखी है, लेकिन इस बार यह चमक खुशी की वजह से है। बाजार के आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त के महीने में सोने की कीमतों में 13.5 प्रतिशत से अधिक का एक ऐतिहासिक और बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। भारतीय रुपये के हिसाब से देखें तो यह बढ़त करीब 20 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम तक बैठती है। जिन निवेशकों ने बाजार में मंदी के दौर में या सामान्य दिनों में सोना खरीदा था, वे अब अपनी इस संपत्ति में हुई ताबड़तोड़ बढ़ोतरी से हैरान भी हैं और खुश भी।
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, कमोडिटी एक्सचेंज ऑफ इंडिया पर सोने के भाव में महज कुछ ही दिनों के भीतर जबरदस्त तेजी देखी गई है। बीते सिर्फ 10 दिनों की बात करें तो सोना करीब 4.63 फीसदी यानी लगभग 7,103 रुपये प्रति 10 ग्राम तक महंगा हो चुका है। इस अचानक आई तेजी ने उन लोगों के चेहरे पर मुस्कान बिखेर दी है जिन्होंने सही समय पर बाजार में एंट्री ली थी। हालांकि, बाजार के कुछ हिस्सों में उन निवेशकों की चिंता भी बरकरार है जिन्होंने इस साल के शुरुआती महीनों में यानी जनवरी के आस-पास, बाजार के बिल्कुल चरम और रिकॉर्ड स्तर पर खरीदारी की थी। वे अब भी अपनी मूल लागत को पार करने का इंतजार कर रहे हैं।
हाल के महीनों में उतार-चढ़ाव का सफर
सोने के बाजार को समझने के लिए इसके पिछले कुछ महीनों के सफर पर गौर करना बेहद जरूरी है। अगर हम मई महीने के आखिरी हफ्तों की बात करें, तो इंडियन बुलियंस ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) की रिपोर्ट्स बताती हैं कि 29 मई को 24 कैरेट गोल्ड का रेट 1,57,043 रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊंचे स्तर पर ट्रेड कर रहा था। इसके बाद जून के महीने में बाजार में थोड़ी नरमी या सुस्ती देखने को मिली थी।
उदाहरण के लिए, 12 जून की शाम को बाजार में विभिन्नों श्रेणियों के सोने के भाव इस प्रकार दर्ज किए गए थे:
- 23 कैरेट गोल्ड: 1,47,208 रुपये प्रति 10 ग्राम
- 22 कैरेट गोल्ड: 1,35,385 रुपये प्रति 10 ग्राम
- 18 कैरेट गोल्ड: 1,10,850 रुपये प्रति 10 ग्राम
- 14 कैरेट गोल्ड: 86,463 रुपये प्रति 10 ग्राम
उस एक महीने के दौरान सोने के भाव में औसतन 9,434 रुपये प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई थी, जिसने निवेशकों को थोड़ाशंका में डाल दिया था। लेकिन अगस्त की इस ताजा छलांग ने पिछले तमाम नुकसानों को पीछे छोड़ते हुए कीमतों को नए आसमान पर पहुंचा दिया है।
क्या कहती है मार्केट एक्सपर्ट्स की राय?
कीमतों के इस तरह अचानक आसमान छूने के बाद से ही आम निवेशकों के मन में एक ही सवाल सबसे प्रमुख है कि 'अब आगे क्या?' क्या हमें अपना सोना बेचकर मुनाफा निकाल लेना चाहिए या फिर और ज्यादा सोना खरीदने का यह सही वक्त है? देश के जाने-माने कमोडिटी बाजार विशेषज्ञों और विश्लेषकों ने निवेशकों की अलग-अलग श्रेणियों के हिसाब से बेहद अहम रणनीतियां साझा की हैं।
1. जिन्होंने ऊंचे स्तरों पर की थी खरीदारी
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अध्यक्ष और रिद्धि-सिद्धि बुलियंस के प्रबंध निदेशक पृथ्वीराज कोठारी का साफ तौर पर यह मानना है कि निवेशकों को बिल्कुल भी घबराहट (Panic) में नहीं आना चाहिए। यदि आपने ऊंचे दामों पर सोना खरीदा है और अब बाजार में किसी तरह का उतार-चढ़ाव दिखता है, तो नुकसान में अपना सोना बिल्कुल न बेचें। सोना हमेशा से एक लंबी अवधि (Long Term) का एसेट माना जाता है। कोठारी सलाह देते हैं कि यदि आपका वित्तीय बजट इसकी इजाजत देता है, तो जब भी बाजार में हल्की गिरावट आए, छोटी-छोटी किस्तों में खरीदारी करके अपनी औसत लागत (Average Cost) को घटाने की कोशिश करें।
2. जिन्हें हालिया तेजी से मिला है शानदार मुनाफा
आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स की कमोडिटी रिसर्च एनालिस्ट दिव्या मांडलिया का नजरिया थोड़ा अलग और संतुलित है। उनके मुताबिक, मौजूदा समय में जब कीमतें पहले से ही काफी ऊंचे स्तर पर हैं, तो आक्रामक होकर और अधिक सोना खरीदने से बचना समझदारी होगी। हालांकि, इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप कीमतों में गिरावट के डर से अपनी सारी होल्डिंग बेचकर बाहर निकल जाएं। वैश्विक स्तर पर बढ़ता कर्ज, दुनिया भर में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों (Central Banks) द्वारा लगातार सोने की भारी खरीदारी ऐसे ठोस कारण हैं जो सोने की कीमतों को मजबूत आधार दे रहे हैं। इसलिए, निवेशकों को कम से कम 3 से 5 साल का लंबा नजरिया रखकर ही चलना चाहिए।
3. लंबी अवधि (10+ साल) के पुराने निवेशक
कोटक गोल्ड ईटीएफ जैसे लोकप्रिय फंड्स ने पिछले एक दशक में अपने निवेशकों को बेहद शानदार और भरोसेमंद रिटर्न दिए हैं। वित्तीय विशेषज्ञों का यह सुझाव है कि यदि आपके कुल निवेश पोर्टफोलियो में सोने की हिस्सेदारी बढ़कर 10 से 15 प्रतिशत से अधिक हो गई है, तो आपको आंशिक रूप से मुनाफावसूली (Partial Profit Booking) कर लेनी चाहिए। इस तरह से मिलने वाले मुनाफे को अन्य परिसंपत्तियों (Assets) में रीबैलेंस किया जा सकता है। हालांकि, पोर्टफोलियो को महंगाई (Inflation) के जोखिम से बचाने के लिए सोने की एक बुनियादी होल्डिंग हमेशा अपने पास जरूर बनाए रखें।
निष्कर्ष: निवेशकों के लिए अंतिम सीख
सोने बाजार का यह रिकॉर्ड उछाल निश्चित तौर पर उत्साहजनक है, लेकिन किसी भी प्रकार के वित्तीय निर्णय लेने से पहले अपनी व्यक्तिगत वित्तीय स्थिति, जोखिम उठाने की क्षमता (Risk Appetite) और अपने निवेश के लक्ष्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय एक अनुशासित रणनीति अपनाना ही शेयर और कमोडिटी बाजार में सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।
