दिवाली के पटाखों के धुएं और बढ़ते प्रदूषण से बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए प्रभावी और व्यावहारिक स्वास्थ्य उपाय जानें।
दिवाली के नजदीक आते ही विभिन्न शहरों और आवासीय कॉलोनियों में पटाखों का धुआं हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करने लगा है। ऐसे में बच्चों को जहरीले धुएं और वायु प्रदूषण से सुरक्षित रखना अभिभावकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है। छोटे बच्चों और पहले से ही श्वसन संबंधी एलर्जी से पीड़ित बच्चों पर प्रदूषण का सबसे बुरा असर पड़ता है। हर घर में महंगा एयर प्यूरीफायर होना संभव नहीं है, लेकिन कुछ आसान और प्रभावी सावधानियां अपनाकर बच्चों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकता है।
बच्चों को आउटडोर गतिविधियों से दूर रखें
यदि आपके आस-पास पटाखे जलाए जा रहे हैं या वायुमंडल में धुआं स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, तो बच्चों को बालकनी, छत या खुले पार्कों में खेलने के लिए बिल्कुल न भेजें। शारीरिक रूप से दौड़ने या खेलने के दौरान सांस लेने की गति तेज हो जाती है, जिससे हवा में मौजूद हानिकारक प्रदूषक कण और अधिक मात्रा में फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। इस स्थिति में बच्चों को घर के अंदर ही रखना सुरक्षित होता है। उनकी व्यस्तता के लिए इंडोर गतिविधियां जैसे पजल, कैरम बोर्ड या ड्राइंग जैसी चीजें कराई जा सकती हैं।
घर की वेंटिलेशन प्रणाली का सही प्रबंधन
जब भी बाहर पटाखों का धुआं आपके घर की दिशा में आ रहा हो, तो उस तरफ खुलने वाली खिड़कियां और दरवाजे पूरी तरह बंद रखें। हालांकि, पूरे दिन घर को पूरी तरह बंद रखना भी स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं है। दिन के समय जब बाहर धुआं कम हो और हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार दिखे, तब कुछ देर के लिए खिड़कियां खोलकर घर के भीतर ताजी हवा का आवागमन सुनिश्चित करें।
सफाई के दौरान सूखी झाड़ू से बचें
दिवाली के दिनों में घर की सफाई का काम बढ़ जाता है। इस दौरान सूखी झाड़ू लगाने से जमीन पर जमी सूक्ष्म धूल और प्रदूषण के कण उड़कर हवा में मिल जाते हैं, जो बच्चों की सेहत बिगाड़ सकते हैं। इसके बजाय फर्श पर नियमित रूप से गीला पोछा लगाएं और घर की अन्य सतहों को नम कपड़े से पोंछें। इसके अतिरिक्त, बच्चों को उड़ने वाली धूल और तेज खुशबू वाले केमिकल स्प्रे या रूम फ्रेशनर से भी दूर रखें।
बिना एयर प्यूरीफायर के indoor air quality सुधारें
यदि घर में एयर प्यूरीफायर उपलब्ध नहीं है, तो सबसे पहले घर के अंदर धुआं आने के संभावित रास्तों को बंद करें। इसके साथ ही यह भी ध्यान रखें कि घर के अंदर किसी भी प्रकार का अन्य धुआं न फैले। बच्चों के आसपास अगरबत्ती, धूपबत्ती, मच्छर भगाने वाली कॉइल और सिगरेट के धुएं का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित करें, क्योंकि यह इनडोर पॉल्यूशन को और अधिक खतरनाक बना देता है।
मास्क के इस्तेमाल में सावधानी
यदि बड़े बच्चों को खराब हवा के बीच घर से बाहर भेजना अनिवार्य हो जाए, तो उन्हें N95 मास्क पहनाएं। यह मास्क हवा में मौजूद हानिकारक डस्ट पार्टिकल्स को श्वसन तंत्र में जाने से रोकने में सहायक होते हैं। हालांकि, मास्क तभी प्रभावी है जब वह बच्चे के चेहरे पर ठीक से फिट हो। दो साल से कम उम्र के छोटे बच्चों को मास्क बिल्कुल न पहनाएं, क्योंकि इससे उनकी सांस लेने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। छोटे बच्चों के मामले में घर से बाहर जाने को पूरी तरह टाल देना ही बेहतर विकल्प है।
बाहर भेजने से पहले AQI की जांच करें
बच्चों को किसी सामाजिक कार्यक्रम, स्कूल फंक्शन या बाहर खेलने भेजने से पहले अपने स्थानीय क्षेत्र का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) अवश्य जांच लें। वायु गुणवत्ता की सटीक जानकारी के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आधिकारिक AQI डैशबोर्ड या सरकार के 'SAMEER' ऐप का उपयोग किया जा सकता है। यदि हवा की श्रेणी खराब या गंभीर पाई जाती है, तो सभी प्रकार की बाहरी गतिविधियों को तुरंत रद्द कर दें।
लक्षणों को नजरअंदाज न करें
प्रदूषण के प्रभाव से यदि बच्चे को लगातार खांसी, गले में खराश, छाती में घरघराहट या सांस लेने में किसी भी प्रकार की असुविधा महसूस हो, तो इन लक्षणों को बिल्कुल हल्के में न लें। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी बाल रोग विशेषज्ञ या चिकित्सक से संपर्क करें।