छत्रपति संभाजीनगर और आसपास के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में मंजूर लेआउट की खुली जगहों, सुविधा क्षेत्रों और आंतरिक सड़कों से जुड़ी जमीनों की अवैध बिक्री पर शिकंजा कसने के लिए जिला प्रशासन ने एक सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। इस नई व्यवस्था के तहत अब निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और जरूरी पत्रक तैयार किए बिना सातबारा (7/12) अभिलेखों में किसी भी प्रकार का बदलाव या अपडेशन नहीं किया जा सकेगा।
छत्रपति संभाजीनगर शहर तथा जिले के अन्य हिस्सों में टाउन प्लानिंग या संबंधित प्राधिकरण द्वारा मंजूर लेआउट में आरक्षित खुली जगहों (ओपन स्पेस), एमिनिटी स्पेसेस (सुविधा क्षेत्रों) और आंतरिक सड़कों की जमीनों को अवैध रूप से प्लॉट में बांटकर बेचने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन गड़बड़ियों पर लगाम लगाने और भूमि अभिलेखों में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जिलाधिकारी विनय गौड़ा जीसी की पहल पर यह कार्यप्रणाली तय की गई है, जिससे जमीन खरीदने वाले आम नागरिकों को संभावित धोखाधड़ी से बचाया जा सके।
लेआउट रिकॉर्ड में विसंगतियों और गड़बड़ी पर रोक
प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, मंजूर लेआउट में भूखंडों, खुली जगहों, सुविधा क्षेत्रों और आंतरिक सड़कों के लिए आरक्षित भूमि का सटीक विवरण राजस्व अभिलेखों में दर्ज होना अनिवार्य है। पूर्व में कई ऐसे मामले सामने आए थे जहां लेआउट के उपविभाजन (सब-डिवीजन) के बाद सातबारा रिकॉर्ड में मनमाने तरीके से बदलाव किए गए, जिससे भूमि अभिलेख विभाग के दस्तावेजों में भारी विसंगतियां पैदा हो गईं।
ऐसी खामियों का फायदा उठाकर कई बार खुली जगहों पर अवैध रूप से नए आवासीय भूखंड तैयार कर लिए जाते हैं, सुविधा क्षेत्रों की गैरकानूनी बिक्री कर दी जाती है और आंतरिक सड़कों के तयशुदा उपयोग में फेरबदल कर दिया जाता है। नई एसओपी के लागू होने से इन सभी स्तरों पर प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित हो सकेगा।
भूमि अभिलेख से लेकर ग्राम स्तर तक तय हुई जिम्मेदारी
नई एसओपी के तहत भूमि अभिलेख विभाग, तहसीलदार और ग्राम राजस्व अधिकारी के बीच समन्वय और चरणबद्ध प्रक्रिया तय की गई है:
- अंतिम विकास अनुमति (फाइनल डेवलपमेंट परमिशन) मिलने के बाद संबंधित भूमि अभिलेख उपाधीक्षक को आवश्यक पत्रक तैयार करना होगा और उसे तहसीलदार के पास प्रस्तुत करना होगा।
- इसके बाद तहसीलदार द्वारा तहसील नमूना क्रमांक 1 में विधिवत प्रविष्टि दर्ज की जाएगी और मामले को आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित ग्राम राजस्व अधिकारी के पास भेजा जाएगा।
- अगले चरण में गांव नमूना क्रमांक 2 में जरूरी प्रविष्टि दर्ज की जाएगी।
- इन सभी चरणों की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही निर्धारित नियमानुसार सातबारा अभिलेख को अपडेट किया जाएगा।
जिलाधिकारी विनय गौड़ा जीसी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले के सभी संबंधित अधिकारी और कर्मचारी इसी तय प्रक्रिया का सख्ती से पालन करें।
नियमों का उल्लंघन करने पर होगी सख्त कार्रवाई
जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी स्तर पर निर्धारित प्रक्रिया की अनदेखी की गई या नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
यह संयुक्त आदेश प्रशासनिक अधिकारियों के उच्च स्तर पर जारी किया गया है, जिस पर विभागीय आयुक्त एवं महानगर विकास प्राधिकरण के आयुक्त जी. श्रीकांत, महानगरपालिका आयुक्त अमोल बेड़गे और भूमि अभिलेख विभाग के जिला अधीक्षक संग्राम जोगदंड के हस्ताक्षर हैं। प्रशासन का मानना है कि इस सख्त एसओपी के अमल में आने से भू-माफियाओं और अवैध प्लॉटिंग करने वालों की गतिविधियों पर रोक लगेगी और जमीन के रिकॉर्ड अधिक पारदर्शी बनेंगे।