मदीना के पावर स्टेशन पर ड्रोन हमला
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना में स्थित एक मुख्य पावर स्टेशन पर हाउती विद्रोहियों द्वारा ड्रोन से हमला किए जाने की पुष्टि हुई है। यह पावर स्टेशन किसी सामान्य औद्योगिक इकाई का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर दुनिया भर के मुसलमानों के लिए अत्यंत पवित्र माने जाने वाली 'पैगंबर की मस्जिद' (अल-मस्जिद अन-नबवी) को बिजली और ऊर्जा आपूर्ति करता है। इस दुस्साहसिक हमले के बाद से पूरे क्षेत्र में कूटनीतिक और सैन्य हलचल तेज हो गई है।
सऊदी के नेतृत्व वाले गठबंधन (Saudi-led Coalition) ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि इस तरह के कृत्य सीधे तौर पर नागरिक बुनियादी ढांचे और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की घृणित साजिश हैं। हालांकि, रक्षा प्रणालियों और त्वरित कार्रवाई के चलते बड़े पैमाने पर होने वाली तबाही को टाल दिया गया, लेकिन पावर स्टेशन के कुछ हिस्सों को इस हमले में नुकसान पहुंचा है।
सऊदी गठबंधन की यमन में ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक
इस हमले के तुरंत बाद सऊदी गठबंधन ने आक्रामक रुख अपनाते हुए यमन में हाउती ठिकानों के खिलाफ जोरदार जवाबी एयरस्ट्राइक शुरू कर दी हैं। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन की राजधानी सना और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर एडेन में तीव्र हवाई हमले किए गए हैं। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य हाउती विद्रोहियों की ड्रोन लॉन्च पैड्स, कमांड सेंटर्स और सैन्य क्षमताओं को नेस्तनाबूद करना है।
क्षेत्रीय सुरक्षा पर गहराते संकट के बादल
- धार्मिक स्थलों को खतरा: मदीना और मक्का जैसे पवित्र शहरों के पास इस तरह की सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा बन गई हैं।
- ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर वार: ऊर्जा आपूर्ति केंद्रों को निशाना बनाने से वैश्विक स्तर पर तेल और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता का खतरा पैदा हो जाता है।
- आम नागरिकों की मुश्किलें: यमन में चल रहे इन संघर्षों और एयरस्ट्राइक के कारण आम नागरिकों का जीवन बेहद दयनीय हो गया है, जिन्हें मानवीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
कूटनीतिक हल की तलाश और अंतरराष्ट्रीय चिंता
इस ताजा घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नींद उड़ा दी है। संयुक्त राष्ट्र और कई प्रमुख देशों ने इस बात पर गहरी चिंता जताई है कि यदि यह संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा, तो शांति स्थापना के सभी प्रयास धरे के धरे रह जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत के रास्ते बंद होने से आने वाले दिनों में यह संकट और अधिक विकराल रूप धारण कर सकता है।
फिलहाल, मदीना के प्रभावित पावर स्टेशन की मरम्मत का काम तेजी से किया जा रहा है ताकि पैगंबर की मस्जिद और आसपास के इलाकों में बिजली की सुचारू आपूर्ति बनी रहे। वहीं, सऊदी सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।