Breaking
► तमिलनाडु में विजय की TVK सरकार के 100 दिन पूरे, सीएम ने दिया कामकाज का हिसाब ► तारापीठ मंदिर के पास बड़ा हादसा: होटल में भीषण आग, 7 तीर्थयात्रियों की जिंदा जलकर मौत ► चंदौली में बदल गई संपूर्ण समाधान दिवस की तारीख, अब इस दिन सुनी जाएंगी समस्याएं ► बर्थडे केक में निकली मरी छिपकली! खुशी का जश्न बदला मातम में, 11 लोग अस्पताल में भर्ती ► यूपी में आईपीएस की 95 वर्षीय मां की संदिग्ध मौत, पहले हार्ट अटैक बताया फिर उठी हत्या की आशंका ► नागपुर में बदला मौसम का मिजाज, रात की बारिश ने गिराया पारा; जानिए 22 अगस्त तक का हाल ► सावन में भूलकर भी शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये 5 चीजें, रुष्ट हो सकते हैं महादेव! ► Sawan 2026: सावन में जलाभिषेक करते समय चुपचाप जप लें ये 3 शक्तिशाली मंत्र, चमक जाएगी किस्मत ► गाजा पर बेन-ग्विर का विवादित बयान, बोले- हर रात मारे जाएं 30 से 40 लोग ► स्वतंत्रता दिवस पर 'वंतारा' की अनूठी पहल, कच्छ के खुले जंगलों में दौड़े 20 काले हिरण ► तमिलनाडु में विजय की TVK सरकार के 100 दिन पूरे, सीएम ने दिया कामकाज का हिसाब ► तारापीठ मंदिर के पास बड़ा हादसा: होटल में भीषण आग, 7 तीर्थयात्रियों की जिंदा जलकर मौत ► चंदौली में बदल गई संपूर्ण समाधान दिवस की तारीख, अब इस दिन सुनी जाएंगी समस्याएं ► बर्थडे केक में निकली मरी छिपकली! खुशी का जश्न बदला मातम में, 11 लोग अस्पताल में भर्ती ► यूपी में आईपीएस की 95 वर्षीय मां की संदिग्ध मौत, पहले हार्ट अटैक बताया फिर उठी हत्या की आशंका ► नागपुर में बदला मौसम का मिजाज, रात की बारिश ने गिराया पारा; जानिए 22 अगस्त तक का हाल ► सावन में भूलकर भी शिवलिंग पर न चढ़ाएं ये 5 चीजें, रुष्ट हो सकते हैं महादेव! ► Sawan 2026: सावन में जलाभिषेक करते समय चुपचाप जप लें ये 3 शक्तिशाली मंत्र, चमक जाएगी किस्मत ► गाजा पर बेन-ग्विर का विवादित बयान, बोले- हर रात मारे जाएं 30 से 40 लोग ► स्वतंत्रता दिवस पर 'वंतारा' की अनूठी पहल, कच्छ के खुले जंगलों में दौड़े 20 काले हिरण

मिर्ज़ापुर का तिलिस्मी किला: जानिए चुनार किले और बाबा शाह क़ासिम सुलेमानी की मज़ार का रहस्यमय इतिहास!

मिर्ज़ापुर का तिलिस्मी किला: जानिए चुनार किले और बाबा शाह क़ासिम सुलेमानी की मज़ार का रहस्यमय इतिहास!



उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर ज़िले में गंगा नदी के तट पर विंध्य पर्वतमाला की ऊंची चट्टान पर स्थित चुनार किला (Chunar Fort) और उससे जुड़ी शाह क़ासिम सुलेमानी की मज़ार इतिहास, आध्यात्मिकता और किंवदंतियों का एक अद्भुत संगम हैं।


👉1. चुनार किला: इतिहास और रहस्य का संगम

पौराणिक एवं प्राचीन नाम chunar.in


  • चरणाद्रि (Charanadri): मान्यता है कि भगवान विष्णु के वामन अवतार ने राजा बलि से तीन पग भूमि मांगते समय अपना पहला कदम इसी पहाड़ी पर रखा था, जिससे इस स्थान का नाम 'चरणाद्रि' पड़ा जो कालांतर में 'चुनार' बन गया।
  • राजा भर्तृहरि की तपोभूमि: उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के बड़े भाई राजा भर्तृहरि ने संन्यास लेने के बाद इसी किले में कठोर तपस्या की थी। किले के भीतर आज भी उनकी समाधि/स्थान मौजूद है, जहाँ एक काला पत्थर है।


🏯'चंद्रकांता' और तिलिस्मी किला

बाबू देवकीनंदन खत्री के मशहूर उपन्यास 'चंद्रकांता' और 'चंद्रकांता संतति' में वर्णित "चुनारगढ़ का किला" यही है। उपन्यास की कई तिलिस्मी और अयारी की कहानियों का केंद्र यह किला रहा है, जिसकी वजह से इसे आम जनमानस में 'तिलिस्मी किला' भी कहा जाता है।

ऐतिहासिक महत्ता chunar.in

चुनार किले पर जिसका अधिकार रहा, माना जाता था कि उसका नियंत्रण गंगा मार्ग और पूर्वी भारत के व्यापार पर रहता था:


  • शेरशाह सूरी और हुमायूँ: 1532 ई. में शेरशाह सूरी ने विवाह कूटनीति से इस किले पर अधिकार किया। हुमायूँ ने महीनों तक इस किले का घेराव किया था।


  • सम्राट अकबर और हेमु: 1556 में हेमु ने इसी किले से अभियान चलाकर दिल्ली पर अधिकार किया था। बाद में 1575 में अकबर ने इसे मुग़ल साम्राज्य में मिला लिया।


  • ब्रिटिश काल व रानी जिंद कौर: वारेन हेस्टिंग्स (ब्रिटिश गवर्नर-जनरल) ने चेत सिंह के विद्रोह के समय यहाँ शरण ली थी। सिख महाराजा रणजीत सिंह की पत्नी रानी जिंद कौर को अंग्रेजों ने इसी किले में कैद करके रखा था, जहाँ से वे एक दासी का वेश बनाकर रात में भाग निकली थीं।


👉2. हज़रत शाह क़ासिम सुलेमानी की मज़ार (चुनार दरगाह) Chunar Fort

किले के पास ही गंगा तट के समीप हज़रत बाबा शाह क़ासिम सुलेमानी (रहा.) की मज़ार स्थित है, जो कौमी एकता और सूफी परंपरा का प्रतीक है।


आध्यात्मिक इतिहास और चमत्कार Chunar Fort

  • पेशावर से आगमन: बाबा शाह क़ासिम सुलेमानी मूल रूप से पेशावर के रहने वाले एक महान सूफी संत थे, जो मुग़ल काल में भारत आए थे।


  • जहाँगीर द्वारा कैद और करामात: जब इनकी रूहानी ताकत और अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी, तो मुग़ल बादशाह जहाँगीर ने इन्हें चुनार किले के भीतर कैद करने का आदेश दिया।


  • जनश्रुति के अनुसार, कैद में रहते हुए भी कई लोगों ने बाबा को एक ही समय में गंगा किनारे और आसपास के जंगलों में नमाज़ अदा करते देखा। जब यह बात जहाँगीर तक पहुँची, तो उसने स्वयं आकर इस चमत्कार को देखा और आदरपूर्वक उन्हें रिहा कर दिया।


  • 1015 हिजरी में उनके इंतकाल के बाद इसी स्थान पर उनकी मज़ार बनाई गई।


स्थापत्य कला की विशिष्टता

  • बलुआ पत्थर की नक्काशी: मज़ार परिसर मुग़लकालीन वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है। इसमें चुनार के प्रसिद्ध बलुआ पत्थरों (Red Sandstone) पर बनाई गई जालीदार नक्काशी देखने योग्य है।


⚰️पुत्र वासिल शाह का मक़बरा: मुख्य दरगाह परिसर के भीतर ही शाह क़ासिम सुलेमानी के पुत्र वासिल शाह का डोम-शैली वाला मक़बरा भी स्थित है।

  • सालाना उर्स: हर वर्ष इस्लामी महीने रजब में यहाँ सालाना उर्स का आयोजन होता है, जिसमें सभी धर्मों और आस्थाओं के हज़ारों श्रद्धालु मन्नत मांगने आते हैं।


👉3. किले के भीतर देखने योग्य मुख्य स्थल

स्थानविवरणसोनवा मंडप28 नक्काशीदार खंभों वाला मंडप, जो पौराणिक राजा आल्हा-ऊदल की कहानियों और राजकुमारी सोनवा से जुड़ा है।सूर्य घड़ी (Sundial)अंग्रेजों द्वारा स्थापित 18वीं शताब्दी की प्राचीन धूप घड़ी, जो सूर्य की किरणों से सही समय दर्शाती थी।गहरा कुआँ (Step-well)किले के भीतर एक अति-गहरा कुआँ और गुप्त गुप्तचर मार्ग बने हुए हैं।वारेन हेस्टिंग्स का बंगला18वीं सदी की औपनिवेशिक इमारत।

🚗यात्रा संबंधी जानकारी: चुनार, वाराणसी से लगभग 40 किमी और मिर्ज़ापुर शहर से लगभग 34 किमी दूर है। ट्रेन (चुनार जंक्शन) या वाराणसी/मिर्ज़ापुर से सड़क मार्ग द्वारा यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है।


✍️

रिपोर्टर: admin

यह खबर हमारी एडिटोरियल टीम द्वारा पूरी रिसर्च और प्रामाणिकता के साथ पब्लिश की गई है। हम आप तक सबसे सटीक और विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।