कैमूर जिले के मोहनिया प्रखंड परिसर में सोमवार को आयोजित बीस सूत्री कार्यक्रम क्रियान्वयन समिति की बैठक हंगामेदार रही। प्रखंड मुख्यालय स्थित बीआरजीएफ भवन में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक में सरकारी महकमों की कार्यशैली और प्रशासनिक सुस्ती पर तीखे सवाल उठाए गए। बैठक की शुरुआत से ही माहौल तल्ख हो गया था, क्योंकि कई प्रमुख विभागों के अधिकारी बिना किसी पूर्व सूचना के बैठक से नदारद थे। जनहित से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा के दौरान जब भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आंकड़े सामने आए, तो सदस्यों का गुस्सा फूट पड़ा।
अधिकारियों की गैरहाजिरी से बढ़ी नाराजगी
लोकतांत्रिक व्यवस्था में जन समस्याओं के समाधान और विकास कार्यों की गति तय करने के लिए बीस सूत्री समितियों का गठन किया जाता है। लेकिन मोहनिया में आयोजित इस ताजा बैठक ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। बैठक में जब विभिन्न विभागों के अधिकारियों की कुर्सियां खाली दिखीं, तो सदस्यों ने कड़ा ऐतराज जताया।
सदस्यों का कहना था कि जब जनप्रतिनिधि और समिति के लोग जनता की आवाज लेकर यहां पहुंचते हैं, तब जिम्मेदार अधिकारी अपनी कुर्सियों से गायब रहते हैं। यह सीधे तौर पर जनता के प्रति उनकी उदासीनता और जवाबदेही से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। पिछली बैठकों में लिए गए निर्णयों और दर्ज की गई कार्यवाहियों पर भी कोई ठोस कदम न उठाए जाने को लेकर सदस्यों में भारी रोष देखा गया।
प्रधानमंत्री आवास योजना में अवैध वसूली का गंभीर आरोप
बैठक के दौरान सबसे बड़ा हंगामा प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर मचा। बीस सूत्री सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रखंड क्षेत्र में आवास योजना के सर्वे के नाम पर लाभुकों का खुला शोषण किया जा रहा है।
- आवास सहायकों पर सर्वे के नाम पर खुलेआम रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया।
- सदस्यों ने बताया कि इस संबंध में पहले भी प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित शिकायत दी जा चुकी है।
- शिकायत के बावजूद भ्रष्ट कर्मियों के खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
- आरोप है कि आरोपी आवास सहायक खुलेआम यह कहते घूमते हैं कि उनकी कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
इस मनमानी ने गरीबों के सिर पर पक्की छत मुहैया कराने की सरकारी मंशा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। जरूरतमंद लोग एक तो पहले से ही आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, ऊपर से इन बिचौलियों और भ्रष्ट कर्मियों को घूस देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
मनरेगा योजना में फर्जीवाड़ा: बिना काम किए निकल रही मजदूरी
ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी देने वाली महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना भी भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी नजर आई। बैठक में सदस्यों ने सनसनीखेज खुलासे करते हुए कहा कि मनरेगा में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा चल रहा है।
सदस्यों के अनुसार, कई इलाकों में जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं होता है, लेकिन कागजों पर मजदूरों की फर्जी तस्वीरें खींचकर उन्हें सिस्टम में अपलोड कर दिया जाता है। इसके बाद उनके बैंक खातों में मजदूरी की राशि भेजकर उसकी अवैध निकासी कर ली जाती है और पैसों का बड़ा हिस्सा कमीशन के रूप में आपस में बांट लिया जाता है। इस पूरे खेल ने ग्रामीण विकास के दावों की हवा निकाल दी है। सदस्यों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है ताकि दोषियों पर सख्त कानूनी शिकंजा कसा जा सके।
सात निश्चय योजना और नल-जल की खुली पोल
बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी 'सात निश्चय योजना' और 'हर घर नल का जल' योजना की जमीनी हकीकत भी इस बैठक में खुलकर सामने आई। बीस सूत्री अध्यक्ष नंदन राय ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रखंड की कई पंचायतों में योजनाएं अधूरी पड़ी हैं और जहां काम पूरे हो चुके हैं, वहां रख-रखाव के अभाव में उनका संचालन ठप है।
अध्यक्ष ने विशेष रूप से नल-जल योजना पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि कई वार्डों में यह योजना अब महज दिखावे की वस्तु बनकर रह गई है। पाइपलाइनें टूटी पड़ी हैं, मोटर खराब हैं और ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं, जबकि कागजों पर इन योजनाओं के रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च दिखाए जा रहे हैं।
अध्यक्ष नंदन राय के तीखे तेवर
बीस सूत्री अध्यक्ष नंदन राय ने बैठक के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनता ने विकास की उम्मीद के साथ जनप्रतिनिधियों को चुना है, लेकिन प्रशासनिक अमले की सुस्ती और भ्रष्टाचार के कारण आम लोग पिस रहे हैं। उन्होंने कहा, "विभिन्न विभागों से जब सवाल पूछे गए, तो अधिकारी संतोषजनक जवाब देने में पूरी तरह असमर्थ रहे। पिछली बैठकों के निर्देशों को ताक पर रख दिया गया है। यदि यही रवैया रहा, तो जनता सड़क पर उतरने को मजबूर होगी।"
बीडीओ की चुप्पी पर उठे सवाल
बैठक में जब इन तमाम गंभीर मुद्दों, घोटालों और अनियमितताओं के सवाल उठे, तो प्रखंड विकास अधिकारी (बीडीओ) महेंद्र कुमार सिंह असहज नजर आए। सदस्यों द्वारा उठाए गए तीखे सवालों और आरोपों के संबंध में जब मीडियाकर्मियों ने उनसे प्रतिक्रिया लेनी चाही, तो उन्होंने किसी भी तरह का बयान देने से साफ इनकार कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बीडीओ मीडिया के सवालों से बचते हुए अचानक बैठक छोड़कर अपने कार्यालय कक्ष में चले गए। जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी का इस तरह से सवालों से मुंह मोड़ना और जवाब न देना कई तरह के संशय पैदा करता है। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक स्तर पर इन गड़बड़ियों को संरक्षण मिल रहा है।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
मोहनिया की इस बीस सूत्री बैठक के बाद पूरे इलाके का सियासी और प्रशासनिक पारा चढ़ गया है। ग्रामीण अब इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि क्या इन लापरवाह अधिकारियों और भ्रष्ट कर्मियों पर कोई गाज गिरेगी या मामला फाइलों में ही दबा दिया जाएगा। सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही आवास योजना और मनरेगा के घोटालों की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई नहीं की गई, तो इस मुद्दे को जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक उठाया जाएगा।