सरकारी योजनाओं के नाम पर गरीबों की जेब काटने वाले बिचौलियों और स्थानीय नेताओं की कारगुजारियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां गरीबों के कल्याण के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी योजना में ही भ्रष्टाचार का ग्रहण लग गया है। मुरादाबाद के मूढापांडे ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत मदनापुर में उस वक्त भारी हंगामा मच गया, जब एक ग्रामीण ने सरेआम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बूथ अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगा दिए। आरोप है कि मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत मिलने वाले अनुदान और लाभ के लिए फार्म भरवाने के एवज में गरीब जनता से अवैध वसूली की जा रही है।
ग्राम चौपाल के दौरान हुआ बड़ा खुलासा
घटना की शुरुआत तब हुई जब मदनापुर गांव में एक प्रशासनिक ग्राम चौपाल का आयोजन किया गया था। इस चौपाल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों की समस्याओं को सुनना और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की जमीनी हकीकत का जायजा लेना था। चौपाल में तमाम अधिकारी और स्थानीय राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इसी दौरान गांव के रहने वाले मोहम्मद रफी और होराम सिंह नामक ग्रामीणों ने अपनी बात रखते हुए ऐसा बम फोड़ा जिससे वहां मौजूद सभी अधिकारियों और नेताओं के होश उड़ गए।
शिकायतकर्ता मोहम्मद रफी ने सीधे तौर पर भाजपा के स्थानीय मदनापुर बूथ अध्यक्ष पर निशाना साधा। रफी का आरोप था कि बूथ अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना का फॉर्म भरवाने के नाम पर उनसे 1500 रुपये की अवैध रिश्वत ली है। ग्रामीण का कहना था कि उनसे यह कहकर पैसे वसूले गए कि यदि वे यह रकम देंगे तभी उनका नाम इस सरकारी योजना की लाभार्थी सूची में आ सकेगा और उन्हें विवाह के लिए अनुदान मिल पाएगा।
अधिकारियों और नेताओं के सामने हुआ जमकर हंगामा
जैसे ही ग्राम चौपाल में रिश्वतखोरी का यह मामला उठा, वहां मौजूद माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। ग्रामीणों और वहां उपस्थित नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। स्थिति को संभालते हुए कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं ने मामले को दबाने और बीच-बचाव करने की कोशिश की। नेताओं ने शिकायतकर्ता को समझाने का प्रयास किया कि वे इस तरह खुले में सार्वजनिक मंच पर पार्टी या संगठन की छवि खराब न करें।
लेकिन शिकायतकर्ता मोहम्मद रफी अपनी बात पर पूरी तरह अड़े रहे। उन्होंने नेताओं के समझाने के बावजूद दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें समझाइश नहीं चाहिए, बल्कि उनके द्वारा दिए गए पैसे उन्हें वापस दिलाए जाएं। रफी का कहना था कि गरीब आदमी मजदूरी करके पैसे कमाता है और अगर सरकारी योजनाओं का लाभ पाने के लिए भी उसे रिश्वत देनी पड़े, तो फिर सरकार की इन योजनाओं का क्या मतलब रह जाता है। इस तीखी नोकझोंक और हंगामे के कारण चौपाल में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
संगठन ने साधी चुप्पी, जिलाध्यक्ष बोले- होगी जांच
इस पूरे प्रकरण के तूल पकड़ने के बाद मीडिया और उच्चाधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित हुआ है। जब इस मामले को लेकर मुरादाबाद के भाजपा जिलाध्यक्ष आकाश पाल से संपर्क किया गया और उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने इस तरह के किसी भी मामले की जानकारी होने से साफ इनकार कर दिया।
जिलाध्यक्ष आकाश पाल ने अपने बयान में कहा कि यह पूरा प्रकरण अभी तक उनकी जानकारी में नहीं आया है। जब तक आरोपों की सत्यता पूरी तरह प्रमाणित नहीं हो जाती, तब तक वे इस विषय पर कुछ भी आधिकारिक रूप से कहने से बचेंगे। हालांकि, उन्होंने यह जरूर आश्वासन दिया कि वे इस बात की पूरी जानकारी लेंगे कि आखिर असलियत क्या है और मदनापुर में वास्तव में क्या घटनाक्रम हुआ है। पूरी तथ्यात्मक जानकारी मिलने के बाद ही वे इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया देंगे।
योजनाओं की पारदर्शिता पर उठ रहे बड़े सवाल
उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना गरीब परिवारों की बेटियों की शादी के लिए आर्थिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक बेहद लोकप्रिय और सराहनीय पहल है। इस योजना के तहत सरकार की ओर से कन्या के खाते में और विवाह की व्यवस्थाओं के लिए एकमुश्त धनराशि भेजी जाती है। लेकिन जमीनी स्तर पर इस तरह के मामले इस बात की पोल खोलते हैं कि कैसे कुछ भ्रष्ट लोग और स्थानीय स्तर के दलाल गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाने से बाज नहीं आते हैं।
ग्रामीण इलाकों में इस प्रकार की उगाही न केवल सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता को प्रभावित करती है, बल्कि शासन की मंशा पर भी सवालिया निशान लगाती है। स्थानीय स्तर पर राजनीतिक पदों पर बैठे लोगों द्वारा इस तरह के कृत्यों में नाम आना संगठन के लिए भी चिंता का विषय बनता जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है एक्शन?
ग्राम चौपाल में हुए इस हंगामे के बाद अब प्रशासन और स्थानीय पुलिस पर भी दबाव बढ़ गया है कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच करें। यदि मोहम्मद रफी और होराम सिंह द्वारा लगाए गए आरोप सच साबित होते हैं, तो आरोपी बूथ अध्यक्ष के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई और पार्टी स्तर पर अनुशासनात्मक कदम उठाए जा सकते हैं। वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि अगर उन्हें उनके पैसे वापस नहीं मिले और दोषी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस मामले को जिला मुख्यालय तक ले जाएंगे। फिलहाल, मदनापुर गांव में यह पूरा घटनाक्रम चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है और हर किसी की नजर इस बात पर टिकी है कि जिला प्रशासन इस भ्रष्टाचार के आरोप पर क्या रुख अपनाता है।