मध्य प्रदेश में प्रकृति और वनों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाने वाले जनजातीय समुदायों और तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार ने वनोपज से जुड़े परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए उनके खातों में बोनस और लाभांश की बड़ी राशि अंतरित की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि प्रकृति पूजक जनजातीय समुदाय हमारी अमूल्य धरोहर है और इनके हितों की पूर्ण सुरक्षा करना सरकार का मुख्य संकल्प है।
तेंदूपत्ता संग्राहकों के खातों में बरसे पैसे, 36 करोड़ से अधिक का बोनस जारी
मण्डला जिले में आयोजित एक भव्य प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों के प्रशिक्षण-सह-जागरूकता कार्यक्रम और तेंदूपत्ता बोनस वितरण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य के 8 वन मंडलों के 9 लाख से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों को साल 2024 के बोनस के रूप में कुल 36 करोड़ 17 लाख 37 हजार 518 रुपये की राशि सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की।
इस योजना के तहत मंडला, सिवनी, बालाघाट, डिण्डोरी और जबलपुर वन मंडलों के संग्राहकों को सीधा लाभ मिला है। राज्य सरकार की इस योजना का दायरा काफी बड़ा है, जिसके तहत आने वाले समय में प्रदेशभर के 21 लाख से अधिक तेंदूपत्ता संग्राहकों के बीच लगभग 139 करोड़ रुपये से ज्यादा की बोनस राशि का वितरण किया जाएगा।
काष्ठ लाभांश के रूप में 26 करोड़ से अधिक की राशि वितरित
वनों की रक्षा और उनके संवर्धन में दिन-रात एक करने वाली वन समितियों के सदस्यों को भी इस अवसर पर बड़ा तोहफा मिला। मुख्यमंत्री ने मंडला के जंगलों की रक्षा में वन विभाग का सहयोग देने वाली 84 वन समितियों के लगभग 40 हजार सदस्यों को 26 करोड़ 56 लाख 53 हजार 929 रुपये की काष्ठ लाभांश राशि वितरित की। कार्यक्रम की शुरुआत कन्या पूजन, वीरांगना रानी दुर्गावती और अमर शहीद राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह के चित्रों पर माल्यार्पण के साथ की गई।
मंडला जिले को 460 करोड़ रुपये की विकास सौगात
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंडला जिले के विकास को एक नई गति देते हुए लगभग 460 करोड़ रुपये की लागत वाले 74 विकास कार्यों का लोकार्पण और भूमिपूजन किया। इसमें 263 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 47 विकास कार्यों का भूमिपूजन और 197 करोड़ रुपये से अधिक लागत के 27 विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है।
मंडला के लिए मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं:
- शिक्षा का विस्तार: मंडला जिले के मोहगांव और घुघरी में नए शासकीय महाविद्यालय खोले जाएंगे।
- प्रोसेसिंग यूनिट: लघु वनोपज के बहुतायत संग्रहण को देखते हुए एमएसएमई विभाग के अधीन एक विशेष प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की जाएगी।
- टाइगर सफारी जू: देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को वन्य जीवों के दीदार की स्थानीय सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मंडला में टाइगर सफारी जू बनाया जाएगा।
- पान की खेती की वापसी: स्थानीय लोगों की आमदनी के पारंपरिक जरिए को पुनर्जीवित करते हुए मंडला में एक बार फिर से पान की खेती शुरू की जाएगी।
- दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा: प्रदेश में दूध उत्पादन को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत तक ले जाने के लक्ष्य के तहत मंडला में भी आवश्यकतानुसार दुग्ध सहकारी समितियां बनाई जाएंगी।
मेधावी विद्यार्थियों को मिली स्कूटी
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 'किसान कल्याण वर्ष' पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया और मुख्यमंत्री स्कूटी योजना के तहत जिले के मेधावी विद्यार्थियों को अपने हाथों से स्कूटी की चाबी सौंपी तथा उन्हें हेलमेट पहनाकर आगे की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। सरकार की यह पहल युवाओं में शिक्षा के प्रति उत्साह को और अधिक बढ़ा रही है।
जनजातीय नायकों का सम्मान और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार जनजातीय नायकों के शौर्य और पराक्रम को सहेजने के लिए लगातार काम कर रही है। रानी दुर्गावती के सम्मान में पहले जबलपुर और फिर उनकी ऐतिहासिक राजधानी सिंग्रामपुर में कैबिनेट की बैठक आयोजित की गई। इसके अलावा राजा भभूत सिंह एवं अन्य जनजातीय वीरों के स्थलों पर भी कैबिनेट बैठकें कर सरकार ने अपनी कृतज्ञता व्यक्त की है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव
मंडला जिले की बदलती तस्वीर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यह जिला विकास की दौड़ में पीछे नहीं है। यहां जल्द ही नया मेडिकल कॉलेज बनने जा रहा है, और नर्सिंग कॉलेज का भूमिपूजन भी संपन्न हो चुका है। इसके साथ ही, सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए मंडला को नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है।
सांदीपनि विद्यालयों के निर्माण से प्रदेश में ड्रॉपआउट रेट घटकर शून्य प्रतिशत पर आ गया है। बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप और स्कूलों में टॉप करने वाले मेधावी छात्रों को स्कूटी प्रदान की जा रही है, जो राज्य में सुधरती शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
