मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा और अनुशासन देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक बड़ा और सख्त प्रशासनिक कदम उठाया है। राज्य शासन ने तकनीकी शिक्षा विभाग के माध्यम से आठ साल पहले बने 'मप्र चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियम 2018' में दूरगामी बदलाव कर दिए हैं। इस संशोधन के बाद अब सूबे में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों और स्पेशलाइजेशन की राह देख रहे डॉक्टरों के लिए नियमों का दायरा काफी कड़ा हो गया है। विशेषकर उन छात्रों के लिए जो बीच में पढ़ाई छोड़ते हैं या फिर सरकारी सेवा के अनुबंध (बॉन्ड) का पालन नहीं करते हैं।
नियमों में कड़ाई: 50 लाख और 30 लाख का भारी-भरकम बॉन्ड
हालिया संशोधनों के अनुसार, नेशनल बोर्ड ऑफ एक्जामिनेशन इन मेडिकल साईंसेस (NBEMS) द्वारा संचालित पोस्ट एमबीबीएस, डीएनबी (डिप्लोमेट ऑफ द नेशनल बोर्ड) और पीजी डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश पाने वाले अभ्यर्थियों के लिए नियमों को बेहद सख्त कर दिया गया है। यदि कोई छात्र प्रवेश मिलने के बाद बीच में ही सीट छोड़ता है या अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़ देता है, तो उसे भारी-भरकम जुर्माना चुकाना होगा।
नए प्रावधानों के तहत:
- सीट लीविंग बॉन्ड: यदि कोई अभ्यर्थी अध्ययन पूर्ण होने से पहले ही पाठ्यक्रम की सीट छोड़ता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से 30 लाख रुपये का 'सीट लीविंग बॉन्ड' भरना होगा।
- पोस्ट एमबीबीएस एवं डीएनबी बॉन्ड: कोर्स पूरा होने के बाद शासन द्वारा निर्दिष्ट (अलॉटेड) सरकारी अस्पताल में 5 साल की अनिवार्य सेवा पूरी न करने की स्थिति में, संबंधित डॉक्टर को 50 लाख रुपये का भुगतान करना होगा।
- पोस्ट एमबीबीएस पीजी डिप्लोमा बॉन्ड: पीजी डिप्लोमा कोर्स पूरा करने के बाद सरकारी अस्पतालों में 3 साल की सेवा पूरी न करने पर 30 लाख रुपये का सेवा बंधपत्र लागू किया गया है।
सरकार का मानना है कि इस कदम से दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों और सरकारी अस्पतालों में स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी किल्लत से निपटने में मदद मिलेगी। अक्सर देखा जाता था कि डॉक्टर पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी सेवा से कतराते थे, लेकिन अब इस कड़े बॉन्ड सिस्टम से उन्हें तय समय तक सरकारी सेवा देनी ही होगी।
निजी और दंत चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए सीटों का नया गणित
इन बदलावों के अलावा, राज्य के निजी चिकित्सा (मेडिकल) और दंत चिकित्सा (डेटा/डेंटल) महाविद्यालयों में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों की सीटों के आवंटन को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, एनएमसी (NMC) और डीसीआई (DCI) द्वारा स्वीकृत समस्त सीटों का वर्गीकरण अब 50-50 के अनुपात में होगा।
वितरण का यह नया स्वरूप कुछ इस प्रकार रहेगा:
- 50 प्रतिशत सीटें: पूरी तरह से गैर संस्थागत (Non-Institutional) श्रेणी के अंतर्गत आएंगी।
- शेष 50 प्रतिशत सीटें: संस्थागत (Institutional) श्रेणी के तहत आरक्षित होंगी।
संस्थागत कोटे के अंतर्गत एनआरआई (NRI) कोटे की सीटें, सेवारत अभ्यर्थियों के कोटे की सीटें और बची हुई अन्य संस्थागत सीटें शामिल की जाएंगी। इस स्पष्टीकरण से एडमिशन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और कालेजों मनमानी पर लगाम लगेगी।
केवल नियमित सेवारत डॉक्टरों को ही मिलेगी पात्रता
राज्य कोटे के तहत आने वाली इन सभी सीटों पर प्रवेश पाने के लिए अब अहर्ताओं को भी बेहद विशिष्ट कर दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत:
- इन सभी पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए केवल नियमित सेवारत डॉक्टर ही पात्र माने जाएंगे।
- संविदा (Contractual) आधार पर नियुक्त डॉक्टर स्टेट कोटे की इन सीटों के लिए आवेदन करने या प्रवेश पाने के पात्र नहीं होंगे।
- स्टेट कोटे की इन तमाम सीटों पर दाखिला पाने के लिए नीट पीजी (NEET PG) परीक्षा उत्तीर्ण (अर्ह) होना अनिवार्य किया गया है।
- इसके साथ ही, आवेदक के पास न्यूनतम 3 वर्ष की निरंतर सेवा पूरी होना भी बेहद जरूरी कर दिया गया है।
- आयु सीमा को लेकर भी स्पष्ट नियम तय किए गए हैं, जिसके तहत पुरुष और महिला दोनों ही अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु नीट परीक्षा वर्ष की 31 दिसंबर को 50 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए।
स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक और कदम
चिकित्सा शिक्षा के जानकारों का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार का यह निर्णय भले ही डॉक्टरों के लिए थोड़ा चुनौतीपूर्ण लग रहा हो, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह राज्य के स्वास्थ्य ढांचे की रीढ़ मजबूत करने का काम करेगा। ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों के पद लंबे समय से खाली पड़े रहते हैं, जिससे आम जनता को बेहतर इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर दौड़ना पड़ता है।
इन नए संशोधनों के लागू होने से न केवल सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित होगी, बल्कि मेडिकल सीटों के आवंटन में चल रही पेचीदगियों और अस्पष्टताओं का भी अंत होगा। प्रशासन और शासन स्तर पर इन बदलावों को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारियां तेजी से शुरू हो चुकी हैं, और आने वाले सत्रों में प्रवेश लेने वाले छात्रों पर ये नए नियम पूरी सख्ती के साथ लागू किए जाएंगे।