मध्य प्रदेश में इस साल मानसून का मिजाज कुछ अलग ही रंग दिखा रहा है। बादलों की आवाजाही और रुक-रुक कर हो रही बारिश के बावजूद राज्य का ओवरऑल मानसून कोटा अभी भी अपनी पूरी क्षमता से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में सीजन का कुल कोटे का आंकड़ा अब भी लगभग 6 प्रतिशत कम बना हुआ है। इस स्थिति ने कृषि क्षेत्र और जल संसाधनों से जुड़े लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
37 जिलों में बारिश का ग्राफ नीचे
राज्य के मौसम विज्ञान केंद्र से मिली जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश के कुल जिलों में से एक बड़े हिस्से यानी 37 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। इन जिलों के किसानों और आम नागरिकों को झमाझम मानसूनी बौछारों का जितना इंतजार था, उतनी राहत इस बार बादलों ने नहीं दी है। हालांकि कुछ इलाकों में अच्छी बारिश जरूर हुई है, लेकिन राज्य का औसत संतुलन अभी भी नकारात्मक दिशा में झुका हुआ है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के शुरुआती हफ्तों में जो ठहराव देखने को मिला था, वही इस कमी का मुख्य कारण है। कई संभागों में कम दबाव का क्षेत्र (Low Pressure Area) सक्रिय तो हुआ, लेकिन वह अपेक्षित नमी और पानी बरसाने में पूरी तरह कामयाब नहीं हो पाया।
कृषि और फसलों पर क्या पड़ेगा असर?
मध्य प्रदेश को देश का एक प्रमुख कृषि प्रधान राज्य माना जाता है, जहां की बड़ी आबादी खरीफ की फसलों पर निर्भर करती है। धान, सोयाबीन, मक्का और दलहन जैसी प्रमुख फसलों को इस समय पर्याप्त मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में 37 जिलों में बारिश की यह कमी किसानों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
- सोयाबीन की फसल: सोयाबीन बेल्ट के नाम से मशहूर कई जिलों में नमी की कमी देखी जा रही है।
- सिंचाई के साधन: जिन इलाकों में बारिश कम हुई है, वहां के किसानों को अब ट्यूबवेल और नहरों के पानी पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है।
- भूजल स्तर: मानसून के दौरान अच्छी बारिश न होने से भूजल स्तर (Groundwater Level) में भी सुधार की गति धीमी पड़ गई है।
जल स्रोतों और बांधों का मौजूदा हाल
बारिश के इस असंतुलन का असर राज्य के प्रमुख जलाशयों और बांधों के जलस्तर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। हालांकि कई बड़े बांध अपनी क्षमता के करीब पहुंच चुके हैं, लेकिन मध्यम और छोटे आकार के कई तालाब और नदियां अभी भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। जल संसाधन विभाग लगातार इन सभी водоёмов (जल स्रोतों) पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि आने वाले महीनों में पेयजल और सिंचाई के लिए पानी का प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सके।
क्या आने वाले दिनों में सुधरेगा मौसम का हाल?
सितंबर के इस महीने में भी मौसम विभाग ने कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई है। बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाले नए वेदर सिस्टम यदि मजबूत होते हैं, तो मध्य प्रदेश के उन 37 जिलों को राहत मिल सकती है जहां अब तक बारिश का कोटा पूरा नहीं हो पाया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की विदाई से पहले यदि कुछ तेज दौर की बारिश हो जाती है, तो इस 6 प्रतिशत की कमी को काफी हद तक पाटा जा सकता है।
फिलहाल, किसानों और आम जनता की निगाहें आसमान की तरफ टिकी हुई हैं। हर कोई यही उम्मीद कर रहा है कि आने वाले कुछ दिनों में बादलों की सक्रियता बढ़ेगी और मध्य प्रदेश के हर कोने में पानी की यह कमी पूरी हो सकेगी। राज्य प्रशासन भी स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है ताकि जरूरत पड़ने पर कृषि और जल प्रबंधन से जुड़े उचित कदम उठाए जा सकें।