महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में आ चुका है। राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता और पारदर्शिता पर उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब आयोग की गोपनीय आंतरिक जानकारी कथित तौर पर सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर लीक होने का मामला सामने आया। इस ताजा घटनाक्रम ने न केवल लाखों उम्मीदवारों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है, बल्कि राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया है। दूसरी ओर, मुंबई क्राइम ब्रांच ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा पेपर लीक केस में चार और लोगों को गिरफ्तार कर लिया है, जिससे इस बड़े रैकेट की परतें धीरे-धीरे उधड़ रही हैं।
कथित व्हॉट्सएप चैट ने उड़ाई नींद
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर एक कथित व्हॉट्सएप चैट तेजी से वायरल होने लगी। दावा किया जा रहा है कि यह चैट MPSC के सहसचिव दिलीप वाघे के नाम से जुड़ी हुई है। इस चैट में आगामी पुलिस भर्ती परीक्षाओं की तारीखों और संभावित परीक्षा केंद्रों जैसी बेहद संवेदनशील और गोपनीय जानकारियों को आधिकारिक घोषणा से पहले ही साझा किए जाने का गंभीर आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन वायरल स्क्रीनशॉट्स और चैट की किसी भी स्वतंत्र एजेंसी या तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं की गई है, लेकिन इसने प्रशासनिक हलकों में खलबली जरूर मचा दी है।
जैसे ही यह चैट सार्वजनिक हुई, महाराष्ट्र के लाखों उम्मीदवारों और उनके अभिभावकों में भारी आक्रोश देखने को मिला। कई छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। छात्रों का कहना है कि अगर इस तरह से गोपनीय जानकारियां पहले ही लीक होने लगेंगी, तो आम और मेहनती छात्रों के लिए पारदर्शी तरीके से चयन पाना लगभग असंभव हो जाएगा।
राजनीतिक पारा चढ़ा: इस्तीफे और जांच की मांग
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद महाराष्ट्र की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लेते हुए सरकार और आयोग के उच्च अधिकारियों को घेरना शुरू कर दिया है।
- महेबुब शेख की मांग: शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के युवा प्रदेशाध्यक्ष महेबुब शेख ने सोशल मीडिया पर इस कथित चैट को सार्वजनिक करते हुए पूरे मामले की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
- रोहित पवार का आक्रामक रुख: राज्य के प्रमुख युवा विधायक रोहित पवार ने इस मामले में और कड़ा रुख अपनाते हुए सीधे तौर पर MPSC के अध्यक्ष के इस्तीफे की मांग कर डाली है। उनका तर्क है कि जब तक शीर्ष पद पर बैठे लोग नैतिक जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।
इन राजनीतिक बयानों और दावों के बीच प्रशासनिक गलियारों में भी आंतरिक बैठकों का दौर तेज हो गया है, हालांकि आयोग की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है।
ड्रग इंस्पेक्टर पेपर लीक: क्राइम ब्रांच का शिकंजा
एक तरफ जहां व्हॉट्सएप चैट लीक को लेकर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ड्रग इंस्पेक्टर स्क्रीनिंग परीक्षा पेपर लीक मामले में ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी रखी है। ताजा घटनाक्रम में क्राइम ब्रांच ने चार और नए आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिसमें परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवार और बिचौलिए (Brokers) शामिल हैं।
इन नई गिरफ्तारियों के बाद इस पूरे रैकेट में अब तक पकड़े गए कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 11 हो गई है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह एक संगठित गिरोह था जो पैसों के लालच में उम्मीदवारों को परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र उपलब्ध करवा रहा था।
कौन-कौन हुए गिरफ्तार?
मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा की गई ताजा गिरफ्तारियों में शामिल संदिग्धों की पहचान निम्नलिखित रूप में की गई है:
- साजिद संदे: सांगली का रहने वाला यह संदिग्ध इस परीक्षा में बतौर उम्मीदवार (Candidate) बैठा था। आरोप है कि इसने गैरकानूनी तरीकों से प्रश्नपत्र हासिल किया था।
- विजय किंगर: बुलढाणा निवासी विजय भी परीक्षा में उम्मीदवार था, जिस पर गोपनीय प्रश्नपत्र अवैध रूप से प्राप्त करने का पुख्ता संदेह है।
- संदीप खलाटे: नवी मुंबई का रहने वाला यह शख्स कथित तौर पर इस पूरे खेल में एक सक्रिय बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था।
- भैरवनाथ कदम: नवी मुंबई से ही ताल्लुक रखने वाले भैरवनाथ को भी पुलिस ने बिचौलिए के तौर पर दबोचा है, जो उम्मीदवारों और लीक कराने वाले मुख्य चेहरों के बीच की कड़ी था।
22 मार्च 2026 को आयोजित हुई थी परीक्षा
आपको बता दें कि महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) ने गत 22 मार्च 2026 को राज्य के कुल छह प्रमुख केंद्रों पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग के तहत 'ड्रग इंस्पेक्टर, ग्रुप-बी' के कुल 154 पदों को भरने के लिए स्क्रीनिंग परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा संपन्न होने के कुछ समय बाद ही प्रश्नपत्र की गोपनीयता भंग होने (Breach of Confidentiality) की भनक जांच एजेंसियों को लग गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत शुरुआती जांच शुरू की, जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। इस मामले में पहले भी आयोग से जुड़े कुछ निचले स्तर के कर्मचारियों, बाहरी बिचौलियों और एक परीक्षार्थी को गिरफ्तार किया जा चुका है। कड़ियों को जोड़ते हुए अब यह दायरा बढ़कर 11 आरोपियों तक पहुंच चुका है।
भर्ती प्रक्रिया रद्द, दोबारा होगी परीक्षा
छात्रों के बढ़ते आक्रोश और अपनी साख बचाने के लिए MPSC ने कड़ा कदम उठाते हुए इस विवादित भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह से रद्द करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। आयोग का कहना है कि इस परीक्षा को अब नए सिरे से पारदर्शी तरीके से दोबारा आयोजित किया जाएगा, ताकि किसी भी ईमानदार छात्र के साथ अन्याय न हो।
फिलहाल, मुंबई क्राइम ब्रांच इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि यह प्रश्नपत्र मूल रूप से कहां से लीक हुआ था और इस षड्यंत्र में आयोग के भीतर का कौन-कौन व्यक्ति शामिल हो सकता है। जांच एजेंसियां आरोपियों के कॉल डिटेल्स, बैंक ट्रांजैक्शन और डिजिटल फुटप्रिंट्स को खंगाल रही हैं ताकि इस रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।