चिकित्सा जगत में कई बार ऐसे मामले सामने आते हैं, जिन पर आसानी से विश्वास नहीं होता। मुंबई के सरकारी सेंट जॉर्ज अस्पताल में कुछ ऐसा ही हैरान कर देने वाला और अविश्वासी मामला सामने आया है, जहां डॉक्टरों की टीम ने एक ऐसी सर्जरी को अंजाम दिया जिसने हर किसी को अचंभित कर दिया। सातारा जिले की रहने वाली एक महिला के पेट में तीन विशालकाय तरबूजों के आकार जितना बड़ा ट्यूमर पल रहा था। इस जानलेवा खतरे से जूझ रही महिला को आखिरकार मुंबई के अनुभवी चिकित्सकों ने सफल सर्जरी के जरिए नया जीवनदान दे दिया है।
सातारा से मुंबई तक का संघर्ष और वह भयानक दर्द
महाराष्ट्र के सातारा जिले की रहने वाली दीपाली (बदला हुआ नाम/मूल नाम दीपाली) पिछले कुछ महीनों से लगातार शारीरिक कष्ट से गुजर रही थीं। उनके पेट का आकार असामान्य रूप से तेजी से बढ़ रहा था, जिसे शुरुआती दौर में स्थानीय लोगों और परिजनों ने साधारण मोटापा या गैस की समस्या समझ लिया था। हालांकि, समय बीतने के साथ यह समस्या इतनी गंभीर हो गई कि उनका चलना-फिरना, सांस लेना और सोना तक दूभर हो गया।
जब स्थानीय स्तर पर स्थिति संभल नहीं पाई और दर्द असहनीय हो गया, तब परिजनों ने उन्हें मुंबई का रुख करने का फैसला किया। मुंबई आने के बाद जब उन्हें सेंट जॉर्ज अस्पताल में भर्ती कराया गया, तब डॉक्टरों की टीम ने विभिन्न मेडिकल जांच (जैसे सीटी स्कैन और एमआरआई) कीं। जांच की रिपोर्ट देखकर खुद चिकित्सक भी हैरान रह गए। महिला के पेट में जो गांठ यानी ट्यूमर विकसित हो चुका था, उसका आकार किसी एक या दो नहीं बल्कि तीन बड़े तरबूजों के बराबर था।
डॉ. राजश्री कटके के नेतृत्व में उतरी डॉक्टरों की टीम
इस अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाले मामले की कमान संभाली प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ और सेंट जॉर्ज अस्पताल की डीन डॉ. राजश्री कटके ने। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एक विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया, जिसमें सीनियर सर्जन, एनेस्थेटिस्ट और क्रिटिकल केयर एक्सपर्ट्स को शामिल किया गया।
डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि ट्यूमर का आकार बहुत ज्यादा बड़ा था और उसने पेट के अन्य महत्वपूर्ण अंगों जैसे आंतों, नसों और रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को पूरी तरह से जकड़ लिया था। जरा सी चूक मरीज की जान पर भारी पड़ सकती थी। अत्यधिक वजन और रक्तस्राव (Hemorrhage) का खतरा भी बना हुआ था, जिसके चलते सर्जरी से पहले की तैयारियां बेहद कड़ी थीं।
3 घंटे तक चला महाअभियान: ऑपरेशन थिएटर के अंदर की कहानी
तमाम जोखिमों का आकलन करने के बाद डॉक्टरों ने सर्जरी का फैसला किया। सेंट जॉर्ज अस्पताल के ऑपरेशन थिएटर में यह जटिल प्रक्रिया लगभग 3 घंटे तक बिना रुके चली। डॉ. राजश्री कटके और उनकी सर्जिकल टीम ने बेहद सूझबूझ और बारीकी के साथ ट्यूमर को आसपास के नाजुक अंगों से अलग करना शुरू किया।
- अत्यंत जोखिम भरा माहौल: ट्यूमर का वजन और आकार इतना ज्यादा था कि उसे निकालते वक्त ब्लड प्रेशर अचानक गिरने का खतरा था।
- बारीक dissection: रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाए बिना ट्यूमर के एक-एक हिस्से को काटना सबसे बड़ी कला थी, जिसे डॉक्टरों ने बखूबी निभाया।
- सफल निष्कासन: करीब तीन घंटे के कड़े संघर्ष के बाद आखिरकार डॉक्टरों ने उस विशालकाय ट्यूमर को महिला के शरीर से पूरी तरह बाहर निकालने में सफलता हासिल की।
अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों की बड़ी उपलब्धि
सफलतापूर्वक सर्जरी संपन्न होने के बाद मेडिकल टीम ने राहत की सांस ली। होश में आने के बाद मरीज दीपाली ने महसूस किया कि उनके शरीर से मानो कोई भारी पहाड़ हट गया हो। डॉक्टरों के अनुसार, यदि यह सर्जरी कुछ और दिन टल जाती, तो ट्यूमर के फटने या अंदरूनी अंगों के फेल होने से महिला की जान भी जा सकती थी।
वर्तमान में दीपाली की हालत पूरी तरह से स्थिर है और उन्हें डॉक्टरों की देखरेख में पोस्ट-ऑपरेटिव वॉर्ड में रखा गया है। वह तेजी से रिकवर कर रही हैं और जल्द ही उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर उनके घर सातारा भेज दिया जाएगा।
आम जनता के लिए एक बड़ी सीख
चिकित्सकों ने इस घटना के माध्यम से आम नागरिकों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। अक्सर लोग शरीर में होने वाले सामान्य दर्द या पेट के आकार में बदलाव को नजरअंदाज कर देते हैं, जो बाद में जानलेवा साबित हो सकता है। यदि शरीर में किसी भी प्रकार की असामान्य गांठ या दर्द महसूस हो, तो तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए और समय पर अल्ट्रासाउंड या सीटी स्कैन कराना चाहिए।
मुंबई के सेंट जॉर्ज अस्पताल के इस कारनामे ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की क्षमता और वहां के डॉक्टरों की दक्षता को साबित कर दिया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए यह अस्पताल किसी वरदान से कम नहीं साबित हुआ है, जहां अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीक के सहारे एक गंभीर रूप से बीमार महिला को नया जीवन मिल सका।