देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आवागमन करने वाले वाहन चालकों और ट्रांसपोर्टर्स के लिए एक बड़ी और झटका देने वाली खबर सामने आई है। मुंबई के पांचों प्रमुख प्रवेश द्वारों पर भारी और व्यावसायिक वाहनों के लिए टोल टैक्स की दरों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। नई दरें आज से आधिकारिक तौर पर लागू हो चुकी हैं, जिसके बाद से शहर में आने-जाने वाले कमर्शियल व्हीकल ऑपरेटर्स की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।
मिली जानकारी के मुताबिक, इस संशोधन के तहत भारी वाहनों को अब प्रत्येक फेरे पर 15 रुपये से लेकर 35 रुपये तक अधिक भुगतान करना होगा। इस फैसले का असर सीधे तौर पर माल ढुलाई (Freight) और लॉजिस्टिक्स सेक्टर पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, जिसका दूरगामी असर आम जनता की रसोई तक पहुंचने वाले सामानों की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
इन पांच प्रमुख नाकों पर लागू हुई नई दरें
मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में प्रवेश करने वाले वे पांच मुख्य द्वार, जो महानगर की लाइफलाइन कहे जाते हैं, वहां अब से बढ़ी हुई दरों की वसूली शुरू हो चुकी है। इन नाकों पर हर रोज हजारों की संख्या में ट्रक, ट्रेलर और अन्य कमर्शियल वाहन गुजरते हैं। प्रशासन और संबंधित टोल ऑपरेटरों द्वारा सुरक्षा और रखरखाव के नाम पर इस बढ़ोतरी को जरूरी बताया गया है, लेकिन इसका विरोध भी उतनी ही तेजी से शुरू हो गया है।
- वाशी टोल नाका (पुणे-मुंबई मार्ग)
- ऐरोली टोल नाका
- मुलुंड (पश्चिमिक एक्सप्रेस हाईवे)
- मुलुंड (लबीएस मार्ग)
- दहिसर टोल नाका
इन सभी पॉइंट्स पर भारी वाहनों की आवाजाही सबसे अधिक होती है। ऐसे में टोल दरों में हुआ यह बदलाव सीधे तौर पर ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री के बजट को प्रभावित करने वाला है।
ट्रांसपोर्ट संगठनों में भारी रोष, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने जताया विरोध
इस फैसले के सामने आते ही ट्रांसपोर्ट जगत से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। देश के सबसे बड़े ट्रांसपोर्ट संगठनों में शुमार 'ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस' (AIMTC) ने इस टोल वृद्धि का कड़ा विरोध किया है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार अचानक और भारी दरों में बढ़ोतरी करना पूरी तरह से अनुचित है।
"पहले से ही डीजल के बढ़ते दाम और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर लागत के कारण ट्रांसपोर्टर्स आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे में टोल दरों में यह इजाफा आग में घी डालने का काम करेगा। इससे माल ढुलाई की लागत में भारी उछाल आएगा।"
- ट्रांसपोर्ट संगठन प्रतिनिधि
संगठन ने सरकार और संबंधित प्राधिकरणों से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका तर्क है कि जब माल ढुलाई महंगी होगी, तो उसका सीधा असर बाजार में बिकने वाली दैनिक उपभोग की वस्तुओं, सब्जियों, अनाजों और अन्य मैन्युफैक्चरिंग गुड्स की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे अंततः आम उपभोक्ता की कमर टूटेगी।
आम आदमी की जेब पर पड़ेगा अप्रत्यक्ष प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि टोल टैक्स में होने वाली इस बढ़ोतरी को केवल कमर्शियल वाहनों तक सीमित नहीं देखा जा सकता। जब ट्रकों और कंटेनरों को मुंबई में प्रवेश करने के लिए ज्यादा पैसे चुकाने होंगे, तो ट्रांसपोर्ट कंपनियां अपने फ्रेश रेट्स (Freight Rates) बढ़ा देंगी।
इसके परिणामस्वरुप:
- सब्जियां और फल जो दूसरे राज्यों या जिलों से मुंबई की मंडियों में आते हैं, वे महंगे हो सकते हैं।
- फैक्ट्री से बनकर निकलने वाले कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और एफएमसीजी प्रोडक्ट्स की ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाएगी।
- खुदरा बाजार (Retail Market) में खुदरा विक्रेता इस बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों से ही वसूलेंगे।
यातायात और लॉजिस्टिक्स पर क्या होगा असर?
मुंबई जैसे महानगर में प्रतिदिन लाखों टन माल की आवाजाही होती है। ऐसे में यदि लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ती है, तो पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होती है। हालांकि, अधिकारियों का यह भी तर्क है कि इन टोल नाकों पर आधुनिक तकनीक और फास्टैग के जरिए ट्रैफिक को सुचारू रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि वाहनों को लंबे समय तक लाइनों में न खड़ा रहना पड़े।
परंतु, बढ़ी हुई दरों ने एक बार फिर इस बहस को छेड़ दिया है कि क्या देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर वसूला जाने वाला टोल टैक्स आम जनता और छोटे कारोबारियों के लिए बहुत बड़ा आर्थिक बोझ बनता जा रहा है?
आगे क्या कदम उठा सकते हैं ट्रांसपोर्टर्स?
सूत्रों के हवाले से यह भी खबरें आ रही हैं कि यदि प्रशासन द्वारा इस टोल वृद्धि को वापस नहीं लिया जाता है, तो आने वाले दिनों में विभिन्न ट्रांसपोर्ट यूनियनें बैठक करके कोई बड़ा आंदोलन या चक्का जाम जैसी रणनीति तैयार कर सकती हैं। फिलहाल, आज से इन पांचों नाकों पर बढ़ी हुई दरों के साथ ही टोल वसूली की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और मौके पर सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम देखे जा रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बिगड़े।
मुंबई और आसपास के इलाकों में सफर करने वाले या माल ढुलाई का काम करने वाले हर व्यक्ति के लिए यह अपडेट बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि आने वाले दिनों में इसका असर बाजार की हर छोटी-बड़ी चीज पर दिखाई देना तय है।