बिहार के मुंगेर और भागलपुर जिलों में बाढ़ की विभीषणता के बीच राजनीति और प्रशासन का शीर्ष नेतृत्व सीधे ज़मीन पर उतर आया है। राज्य में भले ही बाढ़ का पानी धीरे-धीरे उतर रहा हो, लेकिन तबाही के निशान और लोगों की परेशानियां अब भी जस की तस बनी हुई हैं। इस संकट की घड़ी में स्थिति का जायजा लेने और पीड़ितों का दर्द बांटने के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुंगेर और भागलपुर का दौरा किया। इस दौरान दोनों दिग्गजों ने राहत शिविरों का निरीक्षण किया, आम जनता से सीधा संवाद किया और क्षेत्र के विकास तथा भविष्य की सुरक्षा को लेकर कई बड़े ऐलान किए।
सीताकुंड डीह राहत शिविर में दिखा मानवीय चेहरा
मुंगेर के सीताकुंड डीह स्थित राहत शिविर में उस वक्त एक अलग ही भावुक और सहज माहौल देखने को मिला जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान अचानक वहां पहुंच गए। राहत शिविर के भीतर पहुंचते ही मुख्यमंत्री सीधे अस्थायी आंगनबाड़ी केंद्र की ओर बढ़े। वहां उन्होंने न सिर्फ मासूम बच्चों से बातचीत की, बल्कि मुस्कुराते हुए उनसे यह भी पूछा कि क्या वे उन्हें पहचानते हैं या नहीं। बच्चों और मुख्यमंत्री के बीच की यह अनौपचारिक बातचीत शिविर में मौजूद लोगों के चेहरे पर कुछ पलों के लिए ही सही, मुस्कान ले आई।
इसके बाद दोनों नेताओं ने शिविर में रह रहे बाढ़ पीड़ितों से एक-एक कर मुलाकात की। इस दौरान शिविर में भोजन कर रही कुछ महिलाओं ने अपनी समस्याएं सीधे मुख्यमंत्री के सामने रखीं। पीड़ितों ने अपने उजड़े आशियानों और खेतों में बर्बाद हुई फसलों का दर्द बयां किया। मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री ने पूरी गंभीरता के साथ उनकी बातों को सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि सरकार इस मुश्किल वक्त में उनके साथ चट्टान की तरह खड़ी है। राहत शिविरों में भोजन, दवा, कपड़े, और पशु चारे जैसी बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था का भी बारीकी से निरीक्षण किया गया।
मुंगेर से भागलपुर के बीच नई सड़क का बड़ा ऐलान
बाढ़ की मार झेल रहे मुंगेर के लिए इस दौरे में एक बड़ी राहत भरी घोषणा भी सामने आई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जनता को संबोधित करते हुए ऐलान किया कि बरसात का मौसम पूरी तरह खत्म होने के बाद मुंगेर और भागलपुर के बीच करीब 83 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण कार्य को तेजी से शुरू किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट की रूपरेखा इस तरह तैयार की जा रही है कि भविष्य में जब भी बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा आए, तो आवागमन पूरी तरह बाधित न हो। इसके लिए एट-ग्रेड सड़क निर्माण की विशेष व्यवस्था की जाएगी, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी हमेशा बनी रहे।
वहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार बिहार के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि और ग्रामीण कार्य विभाग की विशेष टीमें मुंगेर और भागलपुर क्षेत्रों में पहुंचकर फसलों, मकानों और पशुओं को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन कर रही हैं। नुकसान की रिपोर्ट आते ही केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव वित्तीय और प्रशासनिक मदद मुहैया कराई जाएगी। राहत शिविरों में व्यवस्थाओं को संतोषजनक बताते हुए उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पीड़ितों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
वित्तीय सहायता प्रक्रिया शुरू और प्रशासनिक समीक्षा
राज्य सरकार की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए आर्थिक मदद के द्वार भी खोल दिए गए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जानकारी दी कि प्रभावित परिवारों को राज्य सरकार की तरफ से 7-7 हजार रुपये की सहायता राशि देने की प्रक्रिया को आधिकारिक तौर पर शुरू कर दिया गया है। यह राशि सीधे पीड़ितों के खातों में भेजी जा रही है ताकि वे अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकें।
मुंगेर के इस दौरे के दौरान प्रशासनिक अमला पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। मौके पर राज्य के प्रभारी मंत्री संजय कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, स्थानीय विधायक, प्रमंडलीय आयुक्त, डीआईजी, जिलाधिकारी (DM), पुलिस अधीक्षक (SP) समेत तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि राहत सामग्री के वितरण में किसी भी प्रकार की हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
भागलपुर दौरा और नवगछिया में ग्रामीणों का गुस्सा
मुंगेर के बाद दोनों नेताओं का काफिला भागलपुर जिले के दौरे पर पहुंचा। समय के अभाव और व्यस्त शेडूल के चलते नेताओं का हेलीकॉप्टर सीधे बरारी स्थित पॉलीटेक्निक कॉलेज पहुंचा, जहां बनाए गए राहत शिविर का उन्होंने जायजा लिया। इसके बाद भागलपुर हवाई अड्डे पर उच्च अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें बाढ़ बचाव, राहत और पुनर्वास कार्यों को युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए गए।
हालांकि, इस दौरे के दौरान कुछ स्थानों पर स्थानीय स्तर पर नाराजगी भी देखने को मिली। नवगछिया के काजीकोरैया बांध पर मंत्रियों के आने का इंतजार कर रहे ग्रामीण जब मायूस हुए और उनके न आने की सूचना मिली, तो वे आक्रोशित हो गए। निर्धारित रूट में बदलाव और मंत्रियों के राघोपुर व काजीकोरैया न पहुंच पाने के कारण गुस्साए ग्रामीणों ने बांध पर लगे प्रशासन के पोस्टर, जल संसाधन विभाग की हैलोजन लाइटें और कटाव निरोधी जियो बैग को क्षतिग्रस्त कर अपना विरोध जताया।
स्थिति को संभालते हुए नवगछिया के एसपी वैभव शर्मा, एसडीम के. परीक्षित, जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर जयप्रकाश पासवान और कार्यपालक अभियंता गौतम कुमार सहित भारी पुलिस बल मौके पर डटे रहे। स्थानीय स्तर पर समाज सेवकों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिलकर नाराज ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत कराया और उन्हें सरकार की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया।
निष्कर्ष
मुंगेर और भागलपुर का यह दौरा प्रशासनिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा। जहां एक ओर सरकार ने बाढ़ पीड़ितों को तुरंत आर्थिक राहत और भविष्य के लिए पक्की सड़क का तोहफा दिया है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर जनता के गुस्से और व्यवस्था की कमियों को भी उजागर किया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इन इलाकों में पुनर्वास के काम को कितनी तेजी से अमलीजामा पहनाता है।