प्रशासनिक सख्ती और जमीनी हकीकत की थाह लेने का एक अनूठा उदाहरण बुधवार को सुपौल जिले में देखने को मिला। प्रशासनिक व्यस्तताओं के बीच जब किसी जिले का मुखिया खुद कागजों से निकलकर सीधे कक्षाओं की बेंच पर पहुंच जाए, तो व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें स्वतः बढ़ जाती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा सुपौल में देखने को मिला, जहां जिलाधिकारी सावन कुमार ने निर्मली अंचल क्षेत्र में एक उच्च माध्यमिक विद्यालय से जुड़े भूमि विवाद की सुनवाई के बाद सीधे स्कूल का औचक निरीक्षण कर डाला। इस दौरान उन्होंने न केवल प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था का जायजा लिया, बल्कि भविष्य के निर्माताओं से सीधे संवाद कर उनकी शिक्षा का हाल भी जाना।
निर्मली अंचल में भूमि विवाद पर मैराथन सुनवाई
घटना की शुरुआत निर्मली अंचल के एक उच्च माध्यमिक विद्यालय से जुड़े भूमि विवाद के मामले से हुई। विद्यालय की जमीन से जुड़े इस संवेदनशील मामले को सुलझाने के लिए जिलाधिकारी सावन कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। सुनवाई के दौरान उन्होंने दोनों पक्षों के तर्कों और कागजातों को बेहद बारीकी से परखा। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उन्होंने मौके पर मौजूद राजस्व और शिक्षा विभाग के तमाम संबंधित अधिकारियों को तलब किया और उन्हें स्पष्ट एवं कड़े दिशा-निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने यह सुनिश्चित करने को कहा कि शिक्षण संस्थानों की जमीनों पर किसी भी तरह का अतिक्रमण या विवाद छात्रों के भविष्य पर भारी नहीं पड़ना चाहिए। प्रशासनिक अमले को निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि मामले की कानूनी और व्यावहारिक दोनों पहलुओं से निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
औचक निरीक्षण: फाइलों से निकलकर सीधे क्लासरूम में पहुंचे डीएम
भूमि विवाद की सुनवाई खत्म होने के बाद, जिलाधिकारी ने बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे संबंधित उच्च माध्यमिक विद्यालय का रुख किया। उनका यह औचक निरीक्षण शिक्षा विभाग के महकमे में चर्चा का विषय बन गया। विद्यालय के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही उन्होंने सबसे पहले वहां की साफ-सफाई, बुनियादी सुविधाओं और परिसर के रख-रखाव का मुआयना किया। इसके बाद वे सीधे शैक्षणिक गतिविधियों की जांच के लिए आगे बढ़े।
स्कूल के स्टाफ रूम में पहुंचकर डीएम ने शिक्षकों के कामकाज की डायरियों यानी 'लेसन प्लान' की गहनता से जांच की। उन्होंने एक-एक शिक्षक के लेसन प्लान को देखा और यह जानने की कोशिश की कि पाठ्यक्रम को समय पर पूरा करने के लिए किस प्रकार की कार्ययोजना बनाई गई है। शिक्षकों से संवाद के दौरान उन्होंने शिक्षण के दौरान आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को भी सुना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रेरित किया।
छात्र-छात्राओं के साथ सीधा संवाद, पूछा पढ़ाई का हाल
निरीक्षण का सबसे खास और प्रेरणादायक पल वह था जब जिलाधिकारी कक्षाओं के भीतर पहुंचे। उन्होंने विभिन्न कक्षाओं में जाकर छात्र-छात्राओं से सीधे संवाद किया। बच्चों के बीच पहुंचकर उन्होंने मित्रवत लहजे में पूछा, "बच्चों, पढ़ाई ठीक से चल रही है या कोई समस्या आ रही है?"
बच्चों ने भी बिना किसी झिझक के अपने प्रशासनिक मुखिया को अपने बीच पाकर उत्साह के साथ जवाब दिया। डीएम ने विद्यार्थियों से गणित, विज्ञान और अन्य विषयों की पढ़ाई के तौर-तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने बच्चों से यह भी जाना कि उन्हें विद्यालय में मिलने वाली सुविधाएं कैसी लग रही हैं। विद्यार्थियों की हौसलाअफजाई करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा ही एकमात्र ऐसा साधन है जो जीवन की हर चुनौती को पार करने की ताकत देता है। इसलिए मन लगाकर पढ़ाई करें और अपने सपनों को नई उड़ान दें।
अंचल अधिकारी को दिए कड़े निर्देश: जल्द सौंपे रिपोर्ट
विद्यालय परिसर का मुआयना करने और बच्चों से फीडबैक लेने के बाद, जिलाधिकारी ने निर्मली के अंचल अधिकारी (CO) को बेहद सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि विद्यालय की भूमि से जुड़े विवाद का कागजी अध्ययन करने के बजाय जमीन पर उतरकर भौतिक सत्यापन किया जाए।
- स्थल जांच: अंचल अधिकारी को निर्देश दिया गया कि वे स्वयं विद्यालय परिसर की भूमि पर जाकर भौतिक रूप से सीमांकन और स्थिति की जांच करें।
- अभिलेखों की जांच: पुराने से पुराने राजस्व अभिलेखों और खतियान की गहनता से पड़ताल की जाए ताकि मालिकाना हक को लेकर कोई संशय न रहे।
- त्वरित प्रतिवेदन: सभी आवश्यक दस्तावेजों और जांच रिपोर्ट को तैयार कर जल्द से जल्द जिला मुख्यालय को समर्पित करने का आदेश दिया गया है।
प्रशासनिक सक्रियता से जगी उम्मीद
जिलाधिकारी सावन कुमार के इस कदम की इलाके में खासी चर्चा हो रही है। आम तौर पर प्रशासनिक अधिकारी दफ्तरों की चारदीवारी तक सीमित रहते हैं, लेकिन इस तरह धरातल पर उतरकर एक ही दिन में भूमि विवाद के समाधान की पहल करना और साथ ही शिक्षण संस्थान की गुणवत्ता परखना एक सकारात्मक संदेश देता है। स्थानीय अभिभावकों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि इस तरह की औचक निरीक्षण प्रक्रिया नियमित रूप से जारी रहे, तो सरकारी स्कूलों की सूरत और सीरत दोनों में सुधार देखने को मिलेगा।
फिलहाल, अंचल प्रशासन हरकत में आ चुका है और विद्यालय की भूमि से जुड़ी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। देखना यह होगा कि इस प्रशासनिक पहल के बाद कितनी जल्दी स्कूल को भूमि विवाद के साये से पूरी तरह मुक्ति मिलती है और वहां पढ़ने वाले बच्चों का भविष्य सुरक्षित होता है।